भुजरियां महापर्व: 300 फीट ऊंचे पेड़ पर निशाना, फायरिंग कर फोड़ते हैं नारियल

भुजरियां महापर्व: 300 फीट ऊंचे पेड़ पर निशाना, फायरिंग कर फोड़ते हैं नारियल


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 MP News: मध्य प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में भुजरियां पर्व धूमधाम से मनाया गया. इसको मनाने के भी कई अलग-अलग तरीके हैं. विदिशा के एक गांव में इस मौके पर बंदूक से निशाना लगाने की परंपरा है.

भुजरियां महापर्व: 300 फीट ऊंचे पेड़ पर निशाना, फायरिंग कर फोड़ते हैं नारियलविदिशा में मनाया गया भुजरियां पर्व.
पीयूष मालवीय

विदिशा. मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के झुकरजोगी गांव में भुजरियों का त्योहार बड़े ही अनोखे अंदाज में मनाया जाता है. यहां 300 फीट ऊंचे पेड़ पर एक नारियल को बांधा जाता है. फिर गांव के लाइसेंस धारी बंदूक के निशानेबाज यहां जमा होते है. फिर बंदूक की गोली से निशाना लगाकर नारियल को फोड़ते है. नारियल के नीचे गिरने के बाद ही भुजरियों को विसर्जित करने की परंपरा है. यह परंपरा मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से लगभग 120 किलोमीटर दूर विदिशा के ग्राम झूकरजोगी में मनाया जाता है.

कहते हैं कि सदियों से ये परंपरा गांव में चली आ रही है. यहां बंदूकधारी जब तक बंदूक से 300 फीट ऊंचे बंधे नारियल को फोड़ ना दे, तब तक भुजरियां विसर्जित नहीं जा सकती. यह परंपरा बरसों पुरानी है, जो सालों से लगातार आज भी जारी भी है.

जानें क्या है परंपरा
कहा जाता है कि यह परंपरा कई सालों पुरानी है. ऐसा माना जाता है कि सालों पहले यहां पर हाथी घोड़े और साज सज्जा के साथ यह पर्व मनाया जाता था. यहां के पुराने निवासियों को भी इस परंपरा की शुरुआत का कोई अंदाजा नहीं है. लेकिन ऐसा माना जाता है कि आल्हा उदल के जमाने से इस परंपरा का निभाया जा रहा है. आल्हा खंड में भी एक जगह भुजरियों की लड़ाई का उल्लेख है. यह गांव राजपूत बाहुल्य है. भुजरियां निकलने की इस तरह के आयोजन का उल्लेख आल्हा में मिलता है. पुराने समय में भुजरियां लूटने की भी कहानियां प्रचलित हैं. माना जाता है कि भुजरियों को सुरक्षित विसर्जित के लिए इस तरह हथियारों के साथ भुजरियों की परंपरा की शुरुआत हुई थी.

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इस प्रथा को जिंदा रखने के लिए गांव के 25 से ज्यादा बंदूकधारियों को लाइसेंस दिया गया है. जो हर साल बंदूक से निशाना लगाते हैं. जब तक पेड़ की ऊंचाई पर बंधा वह नारियल बंदूक की गोली से नहीं फूटता तब तक गांव में भुजरियां विसर्जित नहीं की जाती है. इस आयोजन के दौरान मंदिर के सामने एक चौक के नजदीक गांव की सभी भुजरियां इकट्ठी होती है. महिलाएं नृत्य करती है और मंगल गीत गाए जाते हैं. वहीं एक से बढ़कर एक निशानेबाज बंदूक से निशाना आजमाते हैं. निशानेबाजी के इस त्योहार पर कई गांवों के हजारों लोग इस आयोजन में शिरकत करते हैं, लेकिन समय के साथ-साथ बंदूक के लाइसेंस की कठिन प्रक्रिया और नियमों के कारण गांव में लाइसेंसधारियों की संख्या कम होती जा रही है. लोगों का कहना है कि इस परंपरा को जीवित रखने के लिए प्रशासन के सहयोग की जरूरत है.

Preeti George

Preeti George is lead content writer at hindi.news18.com having experience of more than 5 years in digital media. After completing her masters from Kushabhau Thakre Journalism university, she worked in various …और पढ़ें

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