विशेषज्ञ की चेतावनी: बाहर से आने वाले कुत्तों से बढ़ा रिस्क
लोकल 18 से बातचीत में पशुचिकित्सालय प्रभारी डॉ. बृहस्पति भारती ने बताया कि हाल ही में कुत्तों का ब्रीडिंग सीजन खत्म हुआ है. इस दौरान बाहर से कई एक्सोटिक नस्ल के कुत्ते लाए गए हैं. बाहरी कुत्तों में कनाइन पर्वो और कनाइन डिस्टेंपर वायरस का संक्रमण आम होता है, जो स्थानीय कुत्तों में भी तेजी से फैल सकता है. उन्होंने बताया कि महीने भर पहले स्वास्थ्य विभाग ने मैहर के लिए पशुपालन विभाग को एडवाइजरी भी जारी की थी, क्योंकि वहां एक व्यक्ति में लेप्टोस्पायरोसिस पॉजिटिव पाया गया था, उन्होंने बताया रेबीज की तरह यह जीवाणु कुत्तों से इंसानों में फैल सकता है.
डॉ. भारती के मुताबिक, इस समय रोज 4–5 केस पर्वो वायरस के सामने आ रहे हैं, जिसमें उल्टी और दस्त की समस्या प्रमुख होती है. इसके अलावा डिस्टेंपर, आईसीएच, लेप्टोस्पायरोसिस और उसके चार वैरिएंट, कुत्तों का कोरोना वायरस और कैनल कफ भी कुत्तों में देखे जा रहे हैं. हालांकि, इन सभी बीमारियों के लिए वैक्सीन मौजूद है.
टीकाकरण की पूरी समय-सीमा
विशेषज्ञों का कहना है कि पिल्लों को 30 दिन की उम्र से ही पहला वैक्सीन लगना चाहिए. इसके 21 से 28 दिन बाद बूस्टर, फिर एक और बूस्टर और उसके बाद सालाना वैक्सीन लगती है. पर्वो और डिस्टेंपर के लिए शुरुआती वैक्सीन बेहद ज़रूरी है क्योंकि यह बीमारी पिल्लों में ज्यादा घातक होती है. एडल्ट डॉग्स तो कई बार दिन में ही रिकवर हो जाते हैं, लेकिन नवजात पिल्लों में मृत्यु दर बहुत अधिक रहती है.
बरसात में नमी और अधिक नहलाने की आदत के कारण लंबे बालों वाले कुत्ते जैसे जर्मन शेफर्ड, लासा आदि में स्किन इन्फेक्शन का खतरा सबसे ज्यादा होता है. इस समय उन्हें न केवल सूखा रखना ज़रूरी है बल्कि नहलाने के बाद अच्छे से सुखाना भी उतना ही आवश्यक है.
सफाई और खानपान में बरतें खास ध्यान
बारिश में कुत्तों को बाहर घुमाने के बाद उनके पंजे तुरंत धोकर सुखाएं. सफाई के लिए डस्टिंग पाउडर और क्लोट्रिमाज़ोल का इस्तेमाल करें. कुत्तों को मीठा, नमकीन और मसालेदार भोजन न दें. घर पर दूध-रोटी, चावल, दलिया, अंडा (बिना जर्दी) और दूध जैसे हल्के व पचने वाले भोजन दें. चाहें तो बाज़ार से रेडीमेड डॉग फूड का भी उपयोग किया जा सकता है.
संक्रमित कुत्तों से दूरी और सावधानी ही बचाव
डॉ. भारती ने कहा कि बरसात में कुत्तों को संक्रमित जानवरों से दूर रखना, समय पर वैक्सीन लगवाना और साफ-सफाई बनाए रखना ही सबसे बड़ा बचाव है. अगर आपके कुत्ते में सुस्ती, भूख कम होना, उल्टी या दस्त जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें. समय पर इलाज न मिलने पर ये बीमारियां जानलेवा साबित हो सकती हैं.