कलेक्टर आशीष सिंह की अध्यक्षता में जिला शांति समिति की बैठक हुई।
आगामी त्योहारों और आयोजनों के दौरान इंदौर में डीजे का उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। इसके साथ ही ध्वनि विस्तारक यंत्रों के लिए निर्धारित मानकों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। दो से अधिक स्पीकर देने वाले संस्थानों के खिलाफ भी कार्यवाही
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ये निर्णय मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय में कलेक्टर आशीष सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई जिला शांति समिति की बैठक में लिए गए। बैठक में तय किया गया कि सभी त्योहार इंदौर की गौरवशाली परंपरा के अनुरूप सांप्रदायिक सौहार्द, शांति, एकता और भाईचारे के साथ मनाए जाएंगे।
कलेक्टर ने इंदौर में पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनने वाली और बेची जाने वाली मूर्तियों पर लगाए गए प्रतिबंध की जानकारी दी। उन्होंने नागरिकों और आयोजकों से अपील की कि वे परम्परागत रूप से मिट्टी से बनने वाली मूर्ति ही स्थापित करें। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान सभी प्रशासनिक व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित रहें ताकि किसी को असुविधा न हो।
धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली गतिविधियों पर होगी कार्रवाई
एडिशनल पुलिस कमिश्नर अमित सिंह ने बैठक में सुरक्षा प्रबंधों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मूर्ति निर्माता केवल पारंपरिक स्वरूप में मूर्तियां बनाएं, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली मूर्तियां नहीं बनाएं। उन्होंने कहा कि मटकी फोड़ प्रतियोगिता निर्धारित ऊंचाई पर ही हो और पंडाल यातायात बाधित न करने वाले स्थान पर ही लगाए जाएं।
नगर निगम कमिश्नर शिवम वर्मा ने नगर निगम द्वारा की जाने वाली व्यवस्थाओं की जानकारी दी। बैठक में शांति समिति के सदस्यों ने भी अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) मूर्तियों के निर्माण और विक्रय के प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराने का काम शुरू हो गए हैं।
बाणगंगा क्षेत्र में पीओपी से बनी मूर्तियां जब्त की गई।
पीपीओ से बनी 900 छोटी-बड़ी प्रतिमाएं जब्त
मंगलवार को मल्हारगंज एसडीएम निधि वर्मा की टीम ने बाणगंगा क्षेत्र में दो मूर्ति निर्माताओं से पीओपी से बनी 130 से अधिक बड़ी गणेश प्रतिमाएं और करीब 700 से अधिक छोटी प्रतिमाएं जब्त की। कार्रवाई मुख्य रूप से बाणगंगा क्षेत्र में मूर्ति निर्माता विनोद पिता गुलाबचंद्र के यहां की गई।
इसी तरह खेमकरण चितले और मनीष प्रजापति के खिलाफ भी की गई है। इनके गोदाम सील कर दिए गए हैं। मूर्ति निर्माता विनोद से लगभग 130 बड़ी और 700 छोटी मूर्तियां गोडाउन में सील की गई। शेष मूर्तियां फैक्ट्री में हैं। मूर्तिकारों का कहा गया है वे इन्हें न बेचे और न ही किसी को उपयोग के लिए दें।
इसी तरह की कार्रवाई डिस्ट्रीब्यूटर खेमकरण चितले और मूर्ति निर्माता मनीष प्रजापति के यहां भी की गई। मनीष प्रजापति के यहां अधिकांश मूर्तियां मिट्टी की पाई गई। करीब 15 मूर्तियां पीओपी की पाई गई। इन्हें बेचने या किसी को उपयोग के लिए नहीं देने के निर्देश देते हुए कब्जे में दिया गया। डिस्ट्रीब्यूटर खेमकरण चितले के गोदान में लगभग 50 मूर्तियां पीओपी की पाई गई। यह गोदाम भी सील किया गया।
गणेशोत्सव में पीओपी मूर्तियों पर प्रतिबंध
कलेक्टर ने कहा कि पीओपी मूर्तियां पानी में आसानी से नहीं घुलती है। इनमें उपयोग किए गए रसायन हानिकारक होते हैं। इस कारण नदियों, तालाबों और अन्य जलस्रोतों में प्रदूषण बढ़ता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जिले में पीओपी मूर्तियों का निर्माण, भंडारण और बेचने पर पूरी तरह प्रतिबंधित है।
उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मिट्टी की पारंपरिक प्रतिमाएं पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि आगामी गणेशोत्सव में केवल पर्यावरण अनुकूल मूर्तियों का ही उपयोग करें।