Harchhath Vrat: जन्माष्टमी के पहले होता है ये व्रत, संतान के लिए महिलाएं करती हैं साधना, जानें तिथि, महिमा

Harchhath Vrat: जन्माष्टमी के पहले होता है ये व्रत, संतान के लिए महिलाएं करती हैं साधना, जानें तिथि, महिमा


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Harchhath Vrat 2025 Date: इस व्रत के प्रभाव से संतान को लंबी आयु की प्राप्ति होती है. इस व्रत को विधि-विधान से करने से संतान के जीवन में चल रहे सभी दुख-दर्द होते हैं. जानें तिथि, विधि

Harchhath Vrat Date: सनातन धर्म जन्माष्टकी से पहले महिलाएं हरछठ का व्रत रखती हैं. भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलरामजी का जन्म हुआ था. उन्हीं के नाम पर हरछठ व्रत रखा जाता है. इस व्रत को ललही छठ, हलछठ, हरछठ व रांधन छठ आदि नामों से भी जाना जाता है. इसे महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र की कामना के लिए रखती हैं. उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज से जानें इस बार यह व्रत कब रखा जाएगा? और इस दिन किन कार्यों को करने से बचना चाहिए?

कब रखा जाएगा हरछठ व्रत?
वैदिक पंचांग के अनुसार, षष्ठी तिथि 14 अगस्त को सुबह 04 बजकर 23 मिनट के लगभग शुरू होगी. 15 अगस्त को सुबह 02 बजकर 07 मिनट के लगभग पर समाप्त होगी. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल हरछठ का व्रत 14 अगस्त को है. हरछठ व्रत भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी से पहले रखा जाता है.

व्रत में क्या खाएं
इस दिन व्रत में तालाब में पैदा हुई चीजें ही खाई जाती हैं. हरछठ व्रत में गाय के दूध से बनी चीजें या हल चलाकर खेत से पैदा हुई चीजें नहीं खाई जाती हैं. तामसिक भोजन जैसे प्याज व लहसुन आदि का सेवन नहीं करना चाहिए. इस व्रत में गाय के दूध, दही या घी का प्रयोग नहीं करना चाहिए.

व्रत की पूजन विधि
इस दिन व्रती महिलाएं कोई अनाज नहीं खाती हैं. महिलाएं महुआ पेड़ की डाली का दातून, स्नान कर व्रत रखती हैं. इस पूजन की सामग्री में बिना हल जुते हुए जमीन से उगी हुए धान का चावल, महुआ के पत्ते, धान की लाई, भैंस का दूध-दही व घी आदि रखते हैं. सामने एक चौकी या पाटे पर गौरी-गणेश, कलश रखकर हलषष्ठी देवी की मूर्ति या प्रतिमा की पूजा करते हैं. साथ ही बच्चों के खिलौने जैसे-भौरा, बाटी आदि भी रखा जाता है.

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जन्माष्टमी के पहले होता है ये व्रत, संतान के लिए महिलाएं करती हैं साधना



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