शहर की सड़कों और कॉलोनी-मोहल्लों में छह हजार से ज्यादा खतरनाक स्ट्रीट डॉग्स मौजूद हैं। ये ही आए दिन इंसानों पर हमले कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में ऐसे मामले भी सामने आए, जिसमें खतरनाक हो चुके स्ट्रीट डॉग्स ने लोगों को गंभीर रूप से घायल कर दिया।
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शहर के अंदर नगर निगम पिछले कई सालों से स्ट्रीट डॉग्स की नसबंदी कर रहा है। तब भी जनसंख्या कम होने की बजाए निरंतर बढ़ती जा रही है। शहर के अंदर निगम के पास स्ट्रीट डॉग्स को सुरक्षित रखने के लिए शेल्टर हाउस तक नहीं है। सिर्फ एनीमल बर्थ कंट्रोल सेंटर से ही काम चलाया जा रहा है। निगम ने हाल में 4 अगस्त को नई कंपनी को स्ट्रीट डॉग्स की नसंबदी का ठेका दिया है। कंपनी ने काम भी शुरू कर दिया है।
अब 340 रुपए ज्यादा देना होंगे संस्था को
निगम ने अबकी बार ठेका एनीमल क्योर एंड केयर नाम संस्था को दिया है। इसे टेंडर में आई दरों के हिसाब से 1170 रुपए प्रति डाग की नसबंदी के हिसाब से पैसा दिया जाएगा। जबकि पूर्व की संस्था को 835 रुपए प्रति डॉग के हिसाब से पैसा दिया जाता था। ये संस्था फिलहाल बिरलानगर में बने एनबीसी सेंटर में चार अगस्त से स्ट्रीट डॉग की नसबंदी करने का काम कर रही है। अभी लक्ष्मीगंज में नया सेटर भी बनना है। दोनों स्थानों के सेंटर एक दिन में 70 स्ट्रीट डाग की नसबंदी हो सकेगी। संस्था को दो डॉक्टर, दो कम्पाउंडर और कैचिंग वाहन रखना है।
स्ट्रीट डॉग्स को पकड़ने के लिए नगर निगम की तरफ से व्यवस्था
निगम की तरफ से अब एक ही डोर-टू-डोर वाहन की गाड़ी को चलाया जा रहा है। उसे डाग कैचिंग के हिसाब से तैयार किया है। इस पर रोज चार लीटर डीजल खर्च होता है। डाग को पकड़ने के लिए चार कर्मचारी तैनात है। इसके अलावा अधिकारी भी नजर रखे रहते हैं। वहीं संस्था भी एक वाहन चला रही है। दिन भर में औसतन 30 स्ट्रीट डाग्स को पकड़ा जा रहा है।
लक्ष्मीगंज में शेल्टर हाउस बनाने की चल रही है तैयारी
जानकारों का कहना है कि लक्ष्मीगंज में बन रहे एनबीसी सेंटर के लिए 5 हजार वर्गफीट एरिया मिला है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल में दिल्ली-एनसीआर को लेकर दिए आदेश दिए है। भविष्य में उसे ध्यान में रखकर तैयार की जाना चाहिए। इसलिए लक्ष्मीगंज में बन रहा एनबीसी सेंटर को बिरलानगर में शिफ्ट कर दिया जाए और लक्ष्मीगंज में बन रहे सेंटर को शेल्टर हाउस में बदला जा सकता है।
इस साल जिला अस्पताल में सबसे ज्यादा 18591 आए केस
शहर में आवारा कुत्तों का आतंक व्याप्त है। हर दिन डॉग बाइट के नए मरीज शहर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। अगर न्यू जेएएच और जिला अस्पताल मुरार की बात की जाए तो 7 माह 12 दिन में 35970 डॉग बाइट के मरीज इलाज के लिए पहुंचे, जिन्हें एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगाए गए। इनमें से किसी मरीज को पहला तो किसी को दूसरा या तीसरा इंजेक्शन लगाया गया। जिला अस्पताल मुरार में इस साल सबसे ज्यादा 18591 मरीज डॉग बाइट से पीड़ित आए थे। इसी तरह न्यू जेएएच के पीएसएम विभाग में 17379 मरीज पहुंचे।
सात साल के बच्चे को लगे थे 107 से अधिक टांके
- केस-1: शारदा बालग्राम में रहने वाले 7 साल के रविकांत पटेल पर 24 जनवरी को आवारा कुत्तों ने बच्चे को बुरी तरह से चीथ डाला। हालात यह थी कि बच्चे के सिर की खाल तक कुत्ते खा गए थे। उसके सिर, चेहरे, हाथ–पैरों में 17 से 18 जगह घाव थे। बच्चे को करीब 107 से अधिक टांके आए थे।
- केस-2: वार्ड 4 निवासी 26 वर्षीय नवीन सेंगर किसी काम से कहीं जा रहा था तभी आवारा कुत्ते ने हमला बोल दिया। कुत्ते ने उसकी कोहनी के पास का मांस तक नौंच लिया। घायल अवस्था में नवीन 14 जुलाई को न्यू जेएएच के पीएसएम विभाग में इलाज के लिए आया,जहां उसे एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगाए गए।
- केस-3: अवाड़पुरा निवासी पांच वर्षीय नायरा अपने घर के आंगन में खेल रही थी। सुबह करीब 11:30 बजे आवारा कुत्ता घर में घुस गया और कुत्ते ने बच्ची का पैर बुरी तरह अपने मुंह में जकड़ लिया। परिजन बच्ची को 3 जुलाई को पीएसएम विभाग लेकर पहुंचे। जहां उसे एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया था।