एमबीए पास को टॉयलेट का पानी पिलाया, उल्टा लटकाकर मारा: पीड़ित बोले- जबरन जुर्म कबूल कराया; पुलिस बोली- हमारे पास मूर्तियां तोड़ने के पुख्ता सबूत – Madhya Pradesh News

एमबीए पास को टॉयलेट का पानी पिलाया, उल्टा लटकाकर मारा:  पीड़ित बोले- जबरन जुर्म कबूल कराया; पुलिस बोली- हमारे पास मूर्तियां तोड़ने के पुख्ता सबूत – Madhya Pradesh News


तीनों युवकों के हाथ और पैरों में सूजन है। पट्टियां बंधी हैं।

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ये कहते हुए रितेश अजमेरी भास्कर रिपोर्टर को अपनी चोटें दिखाने लगता है। रितेश देवास के जिला अस्पताल में भर्ती है। उसके साथ रवि और रितेश सिनम भी भर्ती हैं। तीनों के हाथ और पैरों में सूजन है। पट्टियां बंधी हैं। इनकी ऐसी हालत करने का आरोप देवास के दो थाने के पुलिसकर्मियों पर है।

दरअसल, 5 अगस्त को शहर के दो मूर्तिकारों के कारखानों में रखी भगवान गणेश और दुर्गा माता की प्रतिमाओं को किसी ने तोड़ दिया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और इस आरोप में इन तीनों युवकों को गिरफ्तार किया। पुलिस का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर इनकी गिरफ्तारी की गई। वहीं, युवकों का कहना है कि उन्होंने जिस मूर्ति का ऑर्डर दिया था, उसे देखने के लिए वे कारखाने में गए थे।

युवकों ने पुलिस पर बेरहमी से मारपीट करने, टॉयलेट का पानी पिलाने और उल्टा लटकाकर मारने जैसे संगीन आरोप लगाए हैं। मामले के तूल पकड़ने के बाद एसपी ने सीएसपी स्तर के अधिकारी को जांच का जिम्मा सौंपा है। भास्कर ने इन तीनों युवक और उनके परिजन के साथ पुलिस के अधिकारियों से बात की। साथ ही मूर्तिकारों से भी बात कर मामले को समझा।

युवकों ने कहा- मूर्ति का पैसा देने गए थे रितेश अजमेरी जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में भर्ती है। उसके दोनों पैरों में घुटनों तक पट्टी बंधी हुई है। हाथ की भी दो उंगलियों में पट्टी है। भास्कर रिपोर्टर ने उससे पूछा कि ऐसी हालत कैसे हुई तो उसने बताया- 5 अगस्त को मैं और मेरे दोनों साथी रवि और रितेश सिनम एक ही बाइक पर बीमा चौराहे पर गए थे। हम हर साल गणेश पंडाल और देवी के पंडाल सजाते हैं।

हमने पहले से ही एक मूर्ति की बुकिंग की थी। हम तीनों इसे देखने और इसका पेमेंट करने गए थे। वहां हमें लखन भैया नहीं मिले। उन्हें ही पैसा देना था। यहां से हम कैला देवी की तरफ गए। वहां गणेश जी की मूर्ति बनाने का कारखाना है। हम लोग जब वहां पहुंचे तो हमें कोई नहीं मिला। हम लौट आए। इसके हम लोग अपने-अपने घर पहुंच गए।

हम तीनों सयाजी गेट पर एक भैया की दुकान पर मिलते हैं। हम लोग वहां बैठे थे, तभी रात 11 बजे पुलिस आई और हमें कोतवाली थाना लेकर गई। वहां हमारे साथ जमकर मारपीट की। सुबह औद्योगिक थाने ले जाया गया। वहां भी हमारे साथ मारपीट की। मुझे तो इतना मारा कि मैं बेहोश हो गया। इसके बाद मुझे कुछ याद नहीं। वो हमें ये ही कह रहे थे कि तुम लोगों ने मूर्तियां तोड़ीं। हम लोग उन्हें मना कर रहे थे।

मुंह पर लात रखी, जातिसूचक गालियां दीं इसी वार्ड में रितेश सिनम भी भर्ती है। रितेश ने बताया- 15 दिन पहले ही मेरा एमबीए कम्प्लीट हुआ है। मैं पहले से गेब्रियल कंपनी में काम कर रहा था। अभी एमबीए के हिसाब से नई नौकरी ढूंढ रहा था कि अचानक यह सब हो गया। हम लोग तो कई सालों से अपने मोहल्ले में दुर्गा जी और गणेश जी का पंडाल सजाते हैं।

5 अगस्त को भी हम लोग मूर्तियां देखने गए थे। पुलिस ने हमें रात में पकड़ा और फिर जमकर पिटाई की। हमें जातिसूचक गालियां दीं। मेरे मुंह पर लात रखी। कुछ पुलिसकर्मियों ने मुझे टॉयलेट का पानी पिलाया और जबरिया गुनाह कबूल कराया।

रवि बोला- कुर्सी से उठाकर फेंक दिया तीसरा पीड़ित रवि भी इसी वार्ड में भर्ती है। रवि के पिता सोहन अजमेरी ने उसके घाव दिखाते हुए बताया कि उसे इतना मारा है कि चल ही नहीं पा रहा है। वे रवि की पीठ पर चोटों के निशान दिखाते हुए कहते हैं कि चलना तो छोड़िए, यह रोजमर्रा के काम भी नहीं कर पा रहा है।

रवि से जब इस हालत के बारे में पूछा तो उसने बताया कि पुलिसवालों ने डंडे, जूते-चप्पल से पिटाई की। मुझे उठाकर कुर्सी से फेंक दिया। मेरे सामने रितेश अजमेरी को बेरहमी से पीटा। मुझसे बार-बार कह रहे थे कि जैसा रितेश को मार रहे हैं, वैसा ही सलूक तुम्हारे साथ भी करेंगे। एक पुलिसवाले ने मुझे लंगड़ा करने की धमकी भी दी।

परिजन बोले- बिना किसी गलती के दोषी बनाया अस्पताल में तीनों युवकों के साथ उनके परिजन भी मौजूद हैं। रितेश अजमेरी की शादी हो चुकी है। पिता मोहन अजमेरी ने कहा कि मेरा बेटा ड्राइवरी का काम करता है। वह घर से अलग रहकर कमाता-खाता है। हम सब भी दिहाड़ी कमाने वाले लोग हैं।

अब उसकी जो हालत की है, उससे लगता नहीं है कि वो दो-तीन साल ढंग से बिस्तर से उठ पाएगा। जहां तक मेरे बेटे पर मूर्ति तोड़ने का आरोप है तो वह खुद सनातनी है। पूजा पाठ करने वाला है। अभी कांवड़ यात्रा में भी शामिल हुआ था। वो भला मूर्ति क्यों तोड़ेगा? मेरे बेटे के साथ पुलिस ने ऐसा सलूक किया, जैसे वो आतंकवादी हो।

रात भर एक थाने से दूसरे थाने भटकते रहे रितेश की मां चंद्रकला बताती हैं कि उस दिन मेरे बेटे का उपवास था। वह घर पर कहकर निकला था कि खाटू श्याम के मंदिर जाएंगे और वहीं से पैसा देकर मूर्ति बुक कर आएंगे। रात 11 बजे हमें फोन आया कि तुम्हारे लड़के को पुलिस उठा ले गई है। हम लोग भागते हुए कोतवाली थाने पहुंचे।

कोतवाली थाने की पुलिस ने कहा कि यहां कोई नहीं है। उसके बाद हम एक थाने से दूसरे थाने भटकते रहे। 6 अगस्त को शाम को 4 बजे हम औद्योगिक थाने पहुंचे और पुलिस से कहा कि हम लोग सीएम हेल्पलाइन में शिकायत करेंगे, तब हमें बताया कि बच्चे थाने में हैं।

एक फोटो के आधार पर आरोपी बना दिया रितेश अजमेरी की पत्नी दिव्या अजमेरी बताती है कि पति को बेहोशी की हालत में घर लाए थे। मैं प्रेग्नेंट हूं और नौवां महीना चल रहा है। कभी भी मेरी डिलीवरी हो सकती है। अभी पति की हालत ऐसी है कि खुद से खाना तक खा नहीं पा रहे।

दिव्या ने बताया कि मेरे पति और उनके दोस्त कई सालों से मोहल्ले में माताजी और गणेशजी की मूर्तियां स्थापित करते हैं। अब माताजी बैठाना कोई गुनाह तो है नहीं। केवल एक फोटो के आधार पर पुलिस उठाकर ले गई और इतनी बुरी तरह से मारपीट की। पुलिस वाले कोई पुख्ता सबूत भी नहीं दे पाए। पति और उनके साथियों को उठा ले गए।

रितेश समिति का अध्यक्ष और 20 लड़के सदस्य रितेश और उसके साथी क्या वाकई में पंडाल सजाते हैं, इसकी तस्दीक करने भास्कर की टीम देवास के रेवाबाग मोहल्ले पहुंची। यहां रोहित से मुलाकात हुई। रोहित ने कहा कि हम कई सालों से मोहल्ले में गणेश जी और दुर्गा जी की झांकियां सजाते हैं। रितेश भैया हमारी समिति के अध्यक्ष हैं।

रितेश और रवि के साथ मोहल्ले भर के 20 लड़के समिति में हैं। जब से हमने यह सुना है कि इन लोगों को मूर्ति तोड़ने के आरोप में पुलिस में पकड़ा है, तो हमें भरोसा ही नहीं हो रहा। हम सालों से उन्हें जानते हैं। पुलिस कह रही है कि वो लोग शराब पीए थे, जबकि वो लोग शराब नहीं पीते। उस दिन तो उनका व्रत था। पुलिस उन्हें जबरन फंसा रही है।

रितेश ने काली माता की मूर्ति को 18,101 रुपए में बुक किया था। ये उसकी रसीद है।

रितेश ने काली माता की मूर्ति को 18,101 रुपए में बुक किया था। ये उसकी रसीद है।

मूर्तिकार बोले- हमने किसी को नहीं देखा भास्कर की टीम उन मूर्तिकारों से भी मिली, जिनके कारखानों में मूर्तियां तोड़ी गई थीं। मूर्तिकार राहुल पाल ने बताया कि उनके कारखाने पर 10 मूर्तियां तोड़ दी गईं। मगर, ऐसा करते हुए उन्होंने किसी को नहीं देखा। दूसरे मूर्तिकार लखन ठाकुर बताते हैं कि हम लोगों का एक रूटीन है। उस रूटीन के हिसाब से हम लोग सुबह 7 बजे उठकर दोपहर 2:30 बजे तक मूर्तियां बनाते हैं।

उसके बाद खा-पीकर 3 बजे तक सो जाते हैं। शाम को करीब साढ़े पांच बजे उठकर हम लोग फिर से अपने काम में जुट जाते हैं और रात के लगभग 2 बजे तक मूर्ति बनाने का काम करते हैं। घटना वाले दिन 5 अगस्त को हम लोग दोपहर में खाना खाकर सो गए थे। शाम को साढ़े पांच बजे उठे तो देखा कि करीब 30 मूर्तियां टूटी पड़ी हैं।

गुजराती समाज ने कार्रवाई पर सवाल उठाए गुजराती रविदास समाज ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। समाज के प्रतिनिधियों ने एसपी और कलेक्टर कार्यालय में आवेदन देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि पुलिस ने बिना ठोस सबूत के गिरफ्तारी की है। आरोपियों के परिजन का दावा है कि तीनों युवक अपनी पहले से बुक कराई गई मूर्तियों को देखने गए थे।

अधिकारी बोले- सीसीटीवी फुटेज से मिले पुख्ता सबूत इन आरोपों के बीच पुलिस का कहना है कि पूरी कार्रवाई वैधानिक तरीके से की गई है। औद्योगिक क्षेत्र थाना के थाना प्रभारी शशिकांत चौरसिया कहते हैं- जैसे ही हमें मूर्ति कारखानों में तोड़फोड़ की सूचना मिली, हमने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। एक टीम को सीसीटीवी फुटेज देखने की जिम्मेदारी दी।

इसमें हमें दिखाई दिया कि बाइक पर सवार तीन युवक कारखाने के बाहर आए। उनमें से दो अंदर गए, करीब 4 मिनट बाद वह बाहर निकले। ये समय कारीगरों के आराम करने का होता है। जिस रास्ते से वह लोग आए थे, उसे ट्रैक किया तो तीनों का चेहरा एक जगह साफ दिखाई दिया। हमने तीनों की फोटो वायरल की।

इनके बारे में हमें पता चला तो 6 अगस्त को तीनों को गिरफ्तार किया। इनसे पूछताछ की तो तीनों ने अपना जुर्म कबूल किया। इन्हें कोर्ट के सामने पेश किया। जेल से छूटने के बाद यह अस्पताल में भर्ती हुए हैं और इन्होंने पुलिस पर मारपीट के आरोप लगाए हैं। इसकी जांच वरिष्ठ अधिकारी कर रहे हैं।

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