इंदौर जिला कोर्ट ने पहली बार एक ऐसा फैसला सुनाया है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। कोर्ट ने सास को प्रताड़ित करने वाली बहू से कहा है कि वह तीन दिन के भीतर ‘शांति का बॉन्ड’ भरकर वादा करें कि वह सास को न सताएगी और न ही धमकाएगी। ये भी कहा कि वह सास को न व
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दरअसल, सास ने बहू के खिलाफ अदालत में याचिका दायर कर राहत की मांग की थी। ये मामला केवल घरेलू कलह का नहीं था, बल्कि दरवाजा तोड़ने, घर में घुसकर ताला लगाने और धमकियों तक जा पहुंचा था। सास ने याचिका में कहा था कि वह साल 2022 में ही बेटे-बहू को संपत्ति से बेदखल कर चुकी है, इसके बाद भी बहू आए दिन घर आकर उसे परेशान कर रही है।
कोर्ट ने इस मामले में महिला बाल विकास विभाग की रिपोर्ट को अहम माना और बहू को बॉन्ड भरने के लिए कहा है। कोर्ट ने अपने आदेश में न सास के नाम को उजागर किया है और न ही बहू के, इसलिए खबर को आसानी से समझने के लिए सास-बहू के बदले नामों का इस्तेमाल किया है। पढ़िए क्या है मामला और कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा है?
वैलेंटाइन डे के दिन शादी, एक साल में रिश्ते में दरार इंदौर के खजराना थाना क्षेत्र के पीपल चौक में रहने वाली बुजुर्ग सास साधना (बदला हुआ नाम) के बेटे ने एयरहोस्टेस अनिता (बदला नाम) से 14 फरवरी 2024 को शादी की थी। ये लव मैरिज थी। शादी में न कोई अड़चन थी, न ही विवाद। शादी के बाद बेटा पत्नी अनिता के साथ उसी के ससुराल महू में रहने लगा।
बेटे ने माता-पिता के पास आना-जाना कम कर दिया। इस तरह मां-बाप से उसकी दूरी बढ़ती गई। ऐसा कई महीनों तक रहा। जब बेटे ने ही माता-पिता से रिश्ता तोड़ा तो सास साधना ने 26 सितंबर 2024 को बेटे-बहू से संबंध तोड़ दिए। उन्हें अपनी संपत्ति से बेदखल कर दिया। इसके बाद बेटे ने भी माता-पिता के घर आना बंद कर दिया।
कुछ समय बाद साधना के बेटे और बहू के बीच विवाद शुरू हुआ। ये इस कदर बढ़ा कि बेटे ने अनिता का घर छोड़ दिया और कहीं चला गया। दोनों का एक बेटा है लेकिन उसकी मौजूदगी भी रिश्तों को बचा नहीं पाई। दोनों का कोर्ट में तलाक का केस चल रहा है।

बहू ने सास-ससुर को परेशान करना शुरू किया पति के जाने के बाद बहू ने सास-ससुर के खिलाफ मोर्चा खोला। 27 मई 2025 को बहू अनिता ने सास साधना और उनके पति के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कराया। इसके बाद से अनिता का रवैया और आक्रामक हो गया। वह फोन और वॉट्सऐप पर सास साधना को धमकियां देने लगी कि तुम्हें देख लूंगी और झूठे केस में फंसा दूंगी।
सास-ससुर को घर में बंद कर चली गई 6 अगस्त 2025 की शाम लगभग 5 बजे बहू अनिता सास के घर पहुंची। यहां वह अपनी मां और एक अन्य लड़के के साथ आई थी। बहू अनिता ने पहले तो दरवाजा खोलने के लिए कहा, जब सास ने दरवाजा नहीं खोला तो जबरदस्ती दरवाजे को धक्का देकर घर में दाखिल हो गई।
इसके बाद उसने सास के साथ झूमाझटकी की। बहू अनिता और उसके साथ आए लड़के ने सास को घर से बाहर निकालकर मेन गेट पर ताला लगा दिया। इतना ही नहीं सास से पैसों की भी मांग की गई।

6 अगस्त को बहू ने सास के घर में दाखिल होकर हंगामा किया था।
खजराना पुलिस ने सास की रिपोर्ट नहीं लिखी पीड़ित सास शाम 6 बजे इस पूरे मामले की शिकायत करने खजराना थाने पहुंची लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी। सास वापस घर लौटी। बहू, उसकी मां और साथ आया लड़का रात करीब 8 बजे तक सास के घर पर ही रहे। विवाद करते रहे। गाली-गलौज की। बाद में धमकी देकर बाहर से मेन गेट पर ताला लगाकर चले गए।
सास साधना ने बहू अनिता से चाबी मांगी, लेकिन बहू ने न तो चाबी दी और न ही घर का ताला खोला। सास-ससुर रातभर घर के अंदर ही बंद रहे। अगले दिन सुबह मकान मालिक ने पीछे वाले गेट से जैसे-तैसे दोनों को बाहर निकाला।
बहू के हिंसात्मक व्यवहार से परेशान सास साधना ने कोर्ट से मदद मांगी। घर के मेन गेट का ताला खुलवाने की मांग की। साथ ही कहा कि घर में बहू और उसके परिजन को घुसने से रोका जाए।

वकील बोले- कोर्ट ने सामाजिक मिसाल कायम की सास की तरफ से कोर्ट में इस केस की पैरवी करने वाले एडवोकेट आशीष शर्मा के मुताबिक संभवतः यह इंदौर जिला कोर्ट का पहला ऐसा मामला है जिसमें बहू को सास से दूर रहने और हिंसा न करने के लिए बॉन्ड भरने का आदेश दिया है। यह आदेश सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी एक मिसाल है।
आशीष ने बताया कि जब सास की तरफ से कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई तब महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी से घरेलू हिंसा का प्रतिवेदन बनवाया गया। इसमें अधिकारी ने सास के खजराना स्थित घर के आसपास के लोगों से बातचीत की और उनके बयान लिए। साथ ही सास और उसकी बहू के बयान भी दर्ज किए। अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि सास घरेलू हिंसा से पीड़ित है। इसी रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है।
