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मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मेधावी छात्रों को उच्च शिक्षा का अवसर देने के लिए विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना चलाई जा रही है. इस योजना का मकसद उन छात्रों के सपनों को पूरा करना है, जो विदेश में पढ़ाई करना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक स्थिति के कारण पीछे रह जाते हैं. इसके तहत सरकार छात्रों को हर साल लगभग 35 लाख रुपए तक की आर्थिक मदद करती है. जानिए पूरी योजना.

मध्य प्रदेश सरकार की विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना का फायदा केवल, उन्हीं छात्रों को मिलेगा, जो मध्य प्रदेश के मूल निवासी हैं और जिनके परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपए से कम है. यानी यह योजना विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर, लेकिन प्रतिभाशाली छात्रों को ध्यान में रखकर बनाई गई है.

प्रदेश सरकार इस योजना के तहत हर साल केवल 20 छात्रों को विदेश में पढ़ाई के लिए वित्तीय सहायता देती है. इन छात्रों का चयन मेरिट और निर्धारित शर्तों के आधार पर किया जाता है.

इस योजना में आवेदन करने के लिए आयु सीमा भी निर्धारित है. स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए अधिकतम आयु सीमा 25 वर्ष और पीएचडी पाठ्यक्रम के लिए 35 वर्ष तय की गई है.

विदेश में पढ़ाई के लिए छात्र के पास वहां की मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी में एडमिशन होना अनिवार्य है. इसके अलावा उसे अंतरराष्ट्रीय परीक्षाएं जैसे GRE, GMAT, TOEFL या IELTS पास करनी होंगी.

जो छात्र पीएचडी करना चाहते हैं, उन्हें मास्टर डिग्री में न्यूनतम 75 प्रतिशत अंक होना जरूरी है. साथ ही, आवेदक के पास मध्य प्रदेश की यूनिवर्सिटी या सरकारी कॉलेज में दो साल का शिक्षण अनुभव या एमफिल डिग्री होना अनिवार्य है.

योजना के तहत छात्रों को हर साल अधिकतम 40 हजार डॉलर (करीब 35 लाख) तक की राशि मिलती है. इसमें ट्यूशन फीस, किताबें, लैब उपकरण, टाइपिंग, थीसिस बाइंडिंग, रिसर्च से जुड़ी सामग्री और अन्य शैक्षणिक खर्च शामिल किए जाते हैं. इस आर्थिक सहयोग से छात्रों का पूरा शैक्षणिक बोझ सरकार उठाती है.

योजना का लाभ उठाने के लिए छात्र उच्च शिक्षा आयुक्त कार्यालय या संभागीय सहायक आयुक्त कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा अधिक जानकारी और आवेदन के लिए highereducation.mp.gov.in पर भी लॉग इन किया जा सकता है. वेबसाइट पर आवेदन की प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज़ और अंतिम तिथि की जानकारी विस्तार से दी गई है.