दूध से आती कट-कट की आवाज, बिस्तर पर खुद लेटने आते बिहारी जी…शिवपुरी का वो चमत्कार जिससे पुजारी भी हैरान!

दूध से आती कट-कट की आवाज, बिस्तर पर खुद लेटने आते बिहारी जी…शिवपुरी का वो चमत्कार जिससे पुजारी भी हैरान!


रिपोर्ट-आशीष पांडेय

Shivpuri Ajab Gajab News: मध्य प्रदेश के करैरा कस्बे की यह कहानी सुनकर अच्छे-अच्छों की रूह कांप जाती है. जिला मुख्यालय शिवपुरी से करीब 50 किलोमीटर दूर बसे करैरा में स्थित बांके बिहारी जी मंदिर सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि सच्ची भक्ति और चमत्कार की मिसाल माना जाता है. यहां की एक बुज़ुर्ग अम्मा की कथा आज भी लोगों की आस्था को मजबूत करती है.

चाय-पकौड़ी से शुरू हुई भक्ति
मंदिर के पास रहने वाली एक वृद्ध महिला थीं, जिन्हें सब प्यार से अम्मा कहते थे. गुजर-बसर के लिए वो चाय-पकौड़ी बेचती थीं. सादा जीवन, लेकिन मन में गहरी भक्ति. एक रात उन्होंने सपना देखा कि उनकी मौत के बाद रिश्तेदार संपत्ति के लिए आपस में लड़ रहे हैं और बात खून-खराबे तक पहुंच जाती है. यह सपना उनके दिल में घर कर गया. अगले ही दिन अम्मा ने अपनी सारी जमा-पूंजी बिहारी जी के चरणों में अर्पित कर दी और मंदिर परिसर में ही रहकर सेवा-भक्ति में जीवन लगा दिया.

दूध में गूंजी ‘कट-कट’ की आवाज
मंदिर के पुजारी रोज़ अम्मा को थोड़ा दूध-भोजन दे देते थे. एक दिन जब अम्मा दूध पी रही थीं, तो बर्तन से कट-कट की आवाज आने लगी. पुजारी चौंके “अम्मा, दूध में क्या डाल दिया?” अम्मा बोलीं “महाराज, जो आपने काजू-बादाम डाले हैं, वही चबा रही हूं.”

पुजारी हैरान! उन्होंने साफ कहा “मैंने तो कुछ नहीं डाला.” कुछ दिन बाद दाल से घी की खुशबू आने लगी. अम्मा का जवाब वही “आपने ही तो दिया है महाराज.”

अफवाह और पंचायत
धीरे-धीरे गांव में अफवाह फैल गई कि अम्मा को कोई आदमी मेवे-घी देकर जाता है. बात चरित्र पर आ गई. दुखी अम्मा बोलीं “मेरा शादी-ब्याह का समय नहीं, तेरहवीं की तैयारी करो.” आख़िर पंचायत बैठी. उसी रात पुजारी को सपना आया बिहारी जी ने उन्हें ऐसा तगड़ा शॉट दिया कि नींद टूट गई. सुबह पंचायत में पुजारी ने भगवान की कसम खाकर कहा कि “अम्मा का कोई और नहीं, उनके पति खुद बिहारी जी हैं.”

भगवान खुद आए लाज बचाने
सबूत मांगा गया तो अम्मा ने अन्न-जल त्याग दिया. उसी रात मंदिर के कपाट अपने-आप खुल गए. ठाकुर जी के चरणों में काजू-बादाम, मेवे और पोस्त बिखरे थे. पुजारी ने स्वीकार किया मैंने ठाकुर जी के हाथ मेवों से सने देखे. गांव वालों की आंखें खुल गईं. सब अम्मा के चरणों में गिर पड़े. अम्मा के निधन के बाद उनकी याद में मंदिर परिसर में चबूतरा बना, जो आज भी मौजूद है.

आज भी बिस्तर पर आते हैं भगवान
मान्यता है कि रात में बिहारी जी जिस बिस्तर पर विश्राम करते हैं, उस गद्दे पर आज भी लेटने के निशान दिखते हैं. भक्त इसे साक्षात उपस्थिति का प्रमाण मानते हैं और दूर-दूर से दर्शन को आते हैं.



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