मोहन ढाकले/बुरहानपुर: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के दौलतपुरा इलाके में रहने वाले योगेश बामले की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. साधारण परिवार में जन्मे योगेश ने बड़े सपने जरूर देखे, लेकिन हालात हमेशा उनके साथ नहीं थे. पढ़ाई उन्होंने सिर्फ 12वीं तक की, इसके बाद परिवार की जिम्मेदारियों के चलते काम में जुट गए.
शुरुआत में योगेश फुटपाथ पर चप्पल-जूते बेचते थे. दिनभर मेहनत करने के बाद भी कमाई इतनी नहीं होती थी कि घर की जरूरतें और भविष्य की प्लानिंग दोनों हो सके. लेकिन कहते हैं ना, मुश्किलें इंसान को सोचने पर मजबूर कर देती हैं.
फुटपाथ पर आया बिजनेस आइडिया
योगेश बताते हैं कि जब वो फुटपाथ पर सामान बेचते थे, तभी उनके दिमाग में एक बात आई अगर लोग कपड़ों पर ज्यादा खर्च करते हैं, तो क्यों न रेडीमेड कपड़ों का काम शुरू किया जाए. बस यहीं से उनकी जिंदगी की दिशा बदल गई.
करीब 5 साल पहले योगेश ने ₹1,00,000 का लोन लिया. यह रकम उनके लिए बहुत बड़ी थी, लेकिन हौसला उससे भी बड़ा. माता-पिता और भाई के सहयोग से उन्होंने रेडीमेड कपड़ों की एक छोटी सी दुकान शुरू की.
आज है अपनी पहचान
आज योगेश गुजराती समाज मार्केट में अपनी रेडीमेड कपड़ों की दुकान चला रहे हैं. दुकान सुबह 10 बजे खुलती है और रात 9 बजे तक ग्राहकों से गुलजार रहती है. यहां शर्ट-पैंट ₹500 से लेकर ₹1500 तक में मिल जाती है.
दिल्ली, मुंबई और आगरा से लाए गए ट्रेंडिंग कपड़े, ब्रांडेड कंपनियों की कॉपी होने के कारण ग्राहकों को खूब पसंद आते हैं. सस्ते दाम और अच्छा कलेक्शन यही योगेश की सबसे बड़ी ताकत है.
कमाई भी, रोजगार भी
योगेश बताते हैं कि आज उनकी सालाना कमाई करीब 4 से 5 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है. इतना ही नहीं, वो अपनी दुकान पर तीन लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. 31 साल की उम्र में मिली इस सफलता ने उनका आत्मविश्वास और बढ़ा दिया है.
सपना है और लोगों को रोजगार देना
योगेश का कहना है कि उनका सपना सिर्फ पैसा कमाना नहीं है, बल्कि अपने इलाके के ज्यादा से ज्यादा लोगों को काम देना है. वो चाहते हैं कि जैसे उन्हें मौका मिला, वैसे ही दूसरे युवाओं को भी अपने पैरों पर खड़े होने का मौका मिले.