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Shivpuri News: मान्यता है कि 15वीं सदी में दोंदेरिया जाट शासकों के काल में किले का विस्तार हुआ जबकि बुंदेला और ओरछा शासनकाल में यह सुरक्षा चौकी के रूप में विकसित हुआ था. यह किला आयताकार है और लगभग 25–30 फीट ऊंचे परकोटे से घिरा है.
शिवपुरी. मध्य प्रदेश के पिछोर कस्बे की पश्चिमी पहाड़ी पर स्थित प्राचीन किला (पिछोर किला) अब फिर से अपनी ऐतिहासिक पहचान और स्थापत्य सौंदर्य के साथ पर्यटकों को आकर्षित करने की तैयारी में है. लंबे समय से उपेक्षा का शिकार यह किला जीर्ण-शीर्ण अवस्था में था लेकिन अब राज्य स्तर पर इसके संरक्षण और सौंदर्यीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है. राज्य पुरातत्व विभाग भोपाल के निर्देश पर ग्वालियर पुरातत्व विभाग और राज्य पर्यटन विभाग की संयुक्त टीम ने स्थल का विस्तृत सर्वे किया है. पर्यटन विभाग के कार्यपालन यंत्री द्वारा क्षतिग्रस्त हिस्सों, गुंबदों, परकोटे, छतों और जल संरचनाओं का मापन किया गया है. प्राथमिकता टूट-फूट की मरम्मत, रिसाव रोकने, प्राचीरों को मजबूत करने और मूल स्वरूप के अनुरूप पुनर्स्थापन पर रहेगी. साथ ही परिसर में गार्डन, सूचना पट्ट और वाहन पार्किंग जैसी सुविधाओं का प्रस्ताव भी भेजा गया है.
ऐतिहासिक दृष्टि से यह किला अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है. मध्यकाल में आगरा से दक्षिण भारत जाने वाला मार्ग इसी क्षेत्र से गुजरता था, जिसकी निगरानी के लिए यहां गढ़ीनुमा किले का निर्माण किया गया. मान्यता है कि 15वीं सदी में दोंदेरिया जाट शासकों के काल में इसका विस्तार हुआ जबकि बुंदेला और ओरछा शासनकाल में यह सुरक्षा चौकी के रूप में विकसित हुआ. किला आयताकार है और लगभग 25–30 फीट ऊंचे परकोटे से घिरा है. मुख्य द्वार पूर्व दिशा में है जबकि उत्तर की ओर दूसरा द्वार मोती सागर तालाब के बांध की तरफ खुलता है.
उन्नत जल प्रबंधन समझ
किले के उत्तरी हिस्से में राजमहल के अवशेष और दक्षिण में सैनिकों और कर्मचारियों के कक्ष आज भी दिखाई देते हैं. परिसर में तालाब, बावड़ी और पेयजल आपूर्ति की प्राचीन व्यवस्थाएं मौजूद हैं, जो उस दौर की उन्नत जल प्रबंधन समझ को दर्शाती हैं. किले के बाहर तालाब के बांध पर 16वीं सदी के नरसिंह, रसिक बिहारी, रणछोड़ और हनुमान मंदिर बने हैं, जिनमें ओरछा शैली की झलक मिलती है.
पिछोर पर प्रभाव
इतिहास में पिछोर पर परमार, बुंदेला, मराठा, सिंधिया और अंग्रेजों का प्रभाव रहा. सिकंदर लोदी के समय से लेकर मराठा सरदारों के आक्रमण, पानीपत के युद्ध के बाद की उथल-पुथल और 1857 के विद्रोह तक यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना रहा. बाद में यह ग्वालियर राज्य के प्रशासनिक ढांचे में परगना बना, जिसमें सैकड़ों गांव शामिल थे.
अर्थव्यवस्था को मिलेगी गति
यह किला शिवपुरी और ग्वालियर से चंदेरी जाने वाले पर्यटन मार्ग पर पड़ता है. ऐसे में इसके विकसित होने से यात्रियों को बीच मार्ग में एक आकर्षक ऐतिहासिक पड़ाव मिलेगा. स्थानीय स्तर पर रोजगार, छोटे व्यापार, गाइड सेवा और पर्यटन आधारित गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. जीर्णोद्धार के बाद पिछोर की पहचान एक महत्वपूर्ण विरासत स्थल के रूप में मजबूत होगी और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.