“मामा माहेल की चुगली में…” जानिए बुंदेलखंड की इस कहावत की सच्ची कहानी, कहलाती है 800 साल पुरानी चेतावनी

“मामा माहेल की चुगली में…” जानिए बुंदेलखंड की इस कहावत की सच्ची कहानी, कहलाती है 800 साल पुरानी चेतावनी


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Bundelkhand Kahavat: बुंदेलखंड की एक कहावत “मामा महल की चुगली में हो गए गांव बर्बाद…” 800 साल पुरानी एक ऐतिहासिक घटना पर आधारित है. आज हम आपको इसके पिछे की कहानी बताएंगे.

Bundelkhand Kahavat: छतरपुर के पंडित रमाकांत दीक्षित बताते हैं कि हमारे बुंदेलखंड में एक कहावत प्रचलित है, जो 800 साल से भी ज्यादा पुरानी है. ”मामा महल की चुगली में हो गए, गांव बर्बाद और पानी की काई से ताला हो गए बेकार.”  बता दें, यह कहावत 800 साल से भी ज्यादा पुरानी है.

मामा माहेल ने की चुगली 
पंडित रमाकांत बताते हैं कि 12वीं सदी में महोबा में चंदेल वंश का शासन था. इस वंश के राजा परमाल के शासन में आल्हा-ऊदल नाम के दो सेनापति थे. ये वीर योद्धा चंदेल साम्राज्य का विस्तार करते जा रहे थे, जिससे उनकी ख्याति दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी. आल्हा-ऊदल की ये प्रसिद्धि देखकर मामा माहेल चिढ़ने लगा था. आल्हा-उदल को चंदेल साम्राज्य से बाहर निकालने के लिए मामा महल ने एक कूटनीतिक षड्यंत्र रचा.

मामा की चुगली से आल्हा-ऊदल ने छोड़ा देश 
मामा माहेल ने राजा परमाल से आल्हा ऊदल के प्रति द्वेष भावना भरी जिससे राजा परमाल चिढ़ गए और उन्होंने आल्हा उदल को महोबा रियासत से बाहर निकालने का फरमान जारी कर दिया.

चंदेल वंश का हुआ पतन 
आल्हा ऊदल ने अपनी जन्मभूमि को छोड़कर कन्नौज में बस गए. कन्नौज के राजा के यहां शरण ले ली. यहीं पर वह रहने लगे. मामा माहेल यही चाहता था की आल्हा-ऊदल महोबा रियासत के बाहर चले जाएं और चंदेल साम्राज्य का सेनापति भी न रहें, लेकिन जब पृथ्वीराज चौहान ने महोबा पर आक्रमण कर दिया, तो आल्हा-उदल को अपनी जन्मभूमि की रक्षा के लिए युद्ध में लड़ने पड़ा, लेकिन इस युद्ध के साथ ही चंदेल साम्राज्य का भी पतन हो गया और फिर यहीं से शुरू होती है, बुंदेलखंड की ये पुरानी कहावत

मामा माहेल की चुगली में बिगड़ गए गांव 
मामा माहेल की चुगली में बिगड़ गए गांव और काई से ताला हो गए खराब. मतलब यहां की बातें वहां करना और वहां की यहां जैसी चुगली करने से गांव के गांव तबाह हो जाते हैं. जैसे मामा माहेल की चुगली से चंदेल साम्राज्य का पतन हो  वैसे ही चुगली करने से गांव के गांव बर्बाद हो जाते हैं. जैसे काई से तालाब का पूरा पानी गंदा हो जाता है और वह पीने लायक नहीं होता है वैसी ही चुगली होती है जिससे कि पूरा गांव का गांव या परिवार के परिवार तबाह हो जाते हैं. चंदेल साम्राज्य का पतन हुए 800 साल से भी ज्यादा हो गए, लेकिन आज भी पूरे बुंदेलखंड में यह कहावत प्रचलित है.

Anuj Singh

Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digital), bringing over Two Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has worked a…और पढ़ें

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