सागर कलेक्टर पर कार्रवाई के लिए NHRC लिखेगा पत्र: एसपी की वर्किंग पर भी उठाए सवाल; पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के क्रशर से करंट लगने का मामला – Bhopal News

सागर कलेक्टर पर कार्रवाई के लिए NHRC लिखेगा पत्र:  एसपी की वर्किंग पर भी उठाए सवाल; पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के क्रशर से करंट लगने का मामला – Bhopal News


क्रशर से अवैध हाईटेंशन बिजली लाइन से झुलसा सागर निवासी मानस शुक्ला जिसकी ओर से राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में शिकायत की गई है।

सागर के बारदा में अवैध क्रशर से करंट लगने के मामले में पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह और उनके भांजे लखन सिंह ठाकुर के विरुद्ध कार्यवाही नहीं करने के मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने सागर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को फटकार लगाई है।

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आयोग ने मुख्य सचिव अनुराग जैन को चिट्‌ठी लिखी है। जिसमें कहा है कि इस घटना में करंट लगने से हाथ कटवाने को मजबूर हुए मानस शुक्ल के परिजनों को 10 लाख रुपए की सहायता क्यों न दी जाए?

आयोग ने सागर कलेक्टर संदीप जीआर को इस मामले में जिम्मेदार मानते हुए उनके विरुद्ध डीओपीटी (डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ट्रेनिंग) में कम्प्लेंट कर कार्रवाई के लिए पत्र लिखने को कहा है।

सागर कलेक्टर-एसपी घोर लापरवाह राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने इस पूरे मामले में सागर कलेक्टर और एसपी दोनों को ही घोर लापरवाह बताते हुए नाराजगी जताई है। मुख्य सचिव जैन को भेजे नोटिस में कहा है कि सागर जिले के बीना थाना क्षेत्र के बारदा गांव में क्रशर के लिए खींची गई हाई टेंशन बिजली लाइन में तार खुले छोड़कर रखे गए थे।

जिसके पास से गुजरते समय 1 जनवरी 2025 को 14 साल का बच्चा मानस शुक्ला का गंभीर रूप से झुलस गया था और बेहोश भी हुआ था। घटना के बाद बीना अस्पताल के चिकित्सकों ने थाने को सूचना भी दी थी लेकिन पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने FIR दर्ज नहीं की।

अवैध खनन के लिए पूर्व मंत्री ने खींची लाइन आयोग ने कहा है कि मानस के पिता राकेश शुक्ला ने शिकायत की है कि विधायक और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह ठाकुर और उनके भांजे लखन सिंह ठाकुर द्वारा किए जा रहे अवैध खनन के लिए यह बिजली लाइन खींची गई थी।

जिसकी जानकारी के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई। राकेश और उसके परिजनों को धमकाया गया कि ज्यादा शिकायत की तो FIR करा देंगे। जान से मारने की धमकी भी दी गई।

मानव अधिकार आयोग ने अपनी जांच के बाद कहा है कि इस केस में पुलिस और प्रशासन ने पांच महीने तक टालमटोल किया और FIR दर्ज नहीं की। सरकार यह बताए कि आखिर इस मामले में एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई?

10 लाख मुआवजा क्यों न दें, दलील मानने योग्य नहीं 9 अगस्त को भेजे गए नोटिस में यह भी कहा है कि मानस शुक्ला के परिवार को 10 लाख का मुआवजा क्यों न दिया जाए। साथ ही डीजीपी को FIR कराने के लिए निर्देशित किया है। कहा है कि 23 अगस्त तक सरकार इस मामले में जवाब दें, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी।

विधायक भूपेंद्र सिंह ने झूठे आरोपों वाले पत्र भेजे आयोग ने पूरे घटनाक्रम को सत्ता के दुरुपयोग और जनता के भरोसे से खिलवाड़ का वाला मामला बताया है। आयोग ने यह भी ध्यानाकर्षित किया है कि खुरई के विधायक भूपेंद्र सिंह ने झूठे आरोपों वाले पत्र भेज कर आयोग की कार्यवाही को प्रभावित करने का प्रयास किया है।

आयोग ने नोटिस में यह भी कहा है कि आयोग के विचार में कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक सागर द्वारा यह दलील कि शिकायत कर्ता ने कोई शिकायत प्रस्तुत नहीं की, असमर्थनीय है। इस मामले में FIR दर्ज होना इसलिए भी आवश्यक है ताकि बालक संबंधित विभाग से आर्थिक सहायता प्राप्त कर सके।

क्रशर मालिक के विरुद्ध कार्रवाई का रिकार्ड नहीं आयोग ने इस पूरे मामले में सबसे अधिक लापरवाही कलेक्टर की मानी है और कहा है कि ऐसे कलेक्टर के विरुद्ध कार्यवाही के लिए डीओपीटी को क्यों न लिखा जाए।

आयोग ने कहा है कि मध्यप्रदेश शासन कारण बताए कि आखिर वह क्यों न भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) और लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय को यह अनुशंसा करे कि सागर कलेक्टर पर कार्रवाई की जाए, क्योंकि उन्होंने कानून के अनुसार जरूरी कार्रवाई नहीं की।

आयोग ने नोटिस में यह भी कहा-

मामले में क्रशर मालिक के खिलाफ किसी वैधानिक दंडात्मक कार्रवाई का कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं है। यह प्रशासनिक एवं पुलिसीय दायित्वों में गंभीर चूक है। घटना स्थल का कोई आधिकारिक निरीक्षण उसी दिन नहीं किया, जिससे कारणों का आकलन, साक्ष्यों का संरक्षण और दोबारा ऐसी घटना रोकने के लिए कदम उठाए जा सकते थे।

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