इंदौर में आईडीए की 35 साल की लापरवाही: रीजनल पार्क की करोड़ों की जमीन पर अतिक्रमण; बन गए मकान, दुकानें और वेयर हाउस – Indore News

इंदौर में आईडीए की 35 साल की लापरवाही:  रीजनल पार्क की करोड़ों की जमीन पर अतिक्रमण; बन गए मकान, दुकानें और वेयर हाउस – Indore News


कब्जे हटाने के आदेश पर भी नहीं हुई कार्रवाई।

इंदौर में आईडीए की लापरवाही और प्रशासनिक अनदेखी सामने आई है। शहर के हुकुमाखेड़ी स्थित 3.043 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाली जमीन, जिसकी आज की बाजार कीमत लगभग 5 करोड़ रुपए आंकी गई है, पिछले 35 सालों में कई बार बिकी और इस पर लगातार अवैध निर्माण होते रहे।

.

जमीन को 1991 में अधिग्रहित किया गया था, लेकिन आईडीए ने कब्जा 2002 में लिया और 2005 में इसे अपने नाम दर्ज किया। इस दौरान CAT के वैज्ञानिक और अधिकारी भी जमीन के खरीदार रहे। दो महीने पहले जब मामला प्रशासन के सामने आया, तब भी अतिक्रमण हटाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

अतिक्रमण के चलते आईडीए की जमीन पर मकान, दुकानें, गोदाम और वेयरहाउस बन गए।

क्या है मामला

मामला स्कीम 97/4 हुकुमाखेड़ी की जमीन (खसरा नं. 40) का है। 1991 में आईडीए ने भू-अर्जन अवॉर्ड पारित किया, जिसके तहत इस जमीन पर आवासीय विकास के साथ पर्यावरण के लिए रीजनल पार्क बनाने की योजना थी। नियम के अनुसार कब्जा उसी समय लेना था, लेकिन तत्कालीन अधिकारियों ने इसे 2002 तक टालते रहे। 2005 में जमीन का नामांतरण आईडीए के नाम हुआ। इस बीच जमीन कई बार बिकी और इस पर अवैध निर्माण जैसे मकान, दुकानें, गोदाम और वेयरहाउस बन गए। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया।

आईडीए ने एसडीएम और इंजीनियरों को मौके पर जाकर निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं।

आईडीए ने एसडीएम और इंजीनियरों को मौके पर जाकर निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं।

अतिक्रमण और विवाद की स्थिति बनी

राजा रमन्ना प्रोद्योगिक केंद्र (CAT) के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने 1994 से 2002 तक जमीन के कुछ हिस्सों को खरीदा। उस समय CAT में आवासीय सुविधाएं पर्याप्त नहीं थीं। पहले डायरेक्टर डॉ. डीडी भावलकर के निर्देशन में अधिकारियों-कर्मचारियों को सामूहिक रूप से जमीन खरीदने के लिए प्रेरित किया गया। मूल किसानों से प्लॉट खरीदकर अधिकारियों और कर्मचारियों में बंटवाया गया, जिससे बाद में अतिक्रमण और विवाद की स्थिति बनी।

सीएम से की शिकायत

मामला तब उजागर हुआ जब राजवीर सिंह और CAT के कुछ वैज्ञानिकों ने 5 जून को मुख्यमंत्री, नगरीय प्रशासन मंत्री, कमिश्नर, कलेक्टर और आईडीए सीईओ को लिखित शिकायत दी। उन्होंने बताया कि जमीन पर लगातार अवैध निर्माण हो रहा है और कब्जे हटाने की कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। इसके बाद 16 जून को आईडीए के भू-अर्जन अधिकारी ने राऊ एसडीएम को पत्र भेजकर अतिक्रमणकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने और जमीन का कब्जा आईडीए को दिलाने के निर्देश दिए। बावजूद इसके दो महीने बाद भी प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

अधिकारियों ने दी सफाई

भू-अर्जन अधिकारी सुदीप मीणा का कहना है कि स्कीम पुरानी है और भू-अर्जन 1990 के दशक में हो गया था। कोर्ट में लिटिगेशन चलते रहे। कुछ जमीन पर कब्जा मिला और उसे डेवलप और बेचा गया। 2022 में हाई कोर्ट ने आईडीए के पक्ष में फैसला दिया। अब जमीन पर नई योजना तैयार की जा रही है। अतिक्रमण हटाने और कब्जा सुनिश्चित करने के लिए एसडीएम और आईडीए के इंजीनियरों को मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस मामले में एसडीएम गोपाल वर्मा ने कहा कि वे पूरी जानकारी लेने के बाद ही कोई निर्णय या बयान देंगे।

शासन-प्रशासन और आईडीए जिम्मेदार

रमेश चंद्रा , पीडित (सीनियर साइंटिस्ट, CAT) ने बताया कि वैसे तो इस मामले में लगभग 500 लोग प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन हमने सर्वे नंबर 40 पर प्लॉट खरीदे थे, जिनमें करीब 40 लोग प्रभावित हैं। अपनी वैधानिक स्थिति स्पष्ट करने के लिए हमने आईडीए को पत्र लिखा था। उस पत्र के संदर्भ में हमें सूचित किया गया कि यह जमीन इंदौर विकास प्राधिकरण की है और यहां रीजनल पार्क बनाने की प्रक्रिया चल रही है।

इसके साथ ही, अतिक्रमण हटाने के लिए उन्होंने एसडीएम को भी पत्र जारी किया था, लेकिन इसके बावजूद वहां कोई भौतिक कार्यवाही नहीं की गई।



Source link