ठाटीपुर पुनर्घनत्वीकरण योजना: 200 से ज्यादा पेड़ शिफ्ट किए, अधिकांश ठूंठ हुए – Gwalior News

ठाटीपुर पुनर्घनत्वीकरण योजना:  200 से ज्यादा पेड़ शिफ्ट किए, अधिकांश ठूंठ हुए – Gwalior News



ठाटीपुर पुनर्घनत्वीकरण योजना। मप्र हाउसिंग बोर्ड की सबसे बड़ी रेसीडेंशियल-कॉमर्शियल परियोजना, जिसमें सैकड़ों की संख्या में पेड़ उखाड़कर अन्य स्थानों पर ट्रांसप्लांट किए गए। एक पेड़ ट्रांसप्लांट करने मप्र हाउसिंग बोर्ड ने निजी एजेंसी को लगभग 44 हजार रुपए

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लेकिन तीनों ही जगह परिणाम एक जैसा यानी कि ट्रांसप्लांट फेल रहा। ग्वालियर में औहदपुर के फॉरेस्ट एरिया में 40 से 42 पेड़ ट्रांसप्लांट किए गए, जिनमें चंद ही बचे हैं। उनके भी बचने की संभावना न के बराबर है। इसके अलावा झांसी बायपास में 150 पेड़ शिफ्ट किए गए। यहां भी आपको केवल ठूंठ देखने को मिलेंगे। इसका खुलासा दैनिक भास्कर ने 17 मई के अंक में किया था।

13 हेक्टेयर में हो रहा है निर्माण कार्य, पेड़ों की कटाई का मामला कोर्ट पहुंचा था

ये पेड़ ट्रांसप्लांट क्यों किए गए, इसका कारण स्थानीय लोगों द्वारा जनहित याचिका दायर करना है। हाई कोर्ट में जब हाउसिंग बोर्ड से जवाब मांगा गया तो बताया गया कि केवल 79 पेड़ काटेंगे। 329 को ट्रांसप्लांट करेंगे। कुल निर्माण केवल 13 हेक्टेयर में होगा। इस पर हाई कोर्ट ने 79 पेड़ काटने के एवज में 10 गुना पौधे अन्य स्थान पर लगाने का निर्देश दिया, साथ ही उसी क्षेत्र में अलग से 500 पौधे भी रोपने के लिए कहा।

झांसी बायपास जहां पेड़ ट्रांसप्लांट किए गए, जो अब ठूंठ बन गए

फलदार –647 (आम, जामुन, मौसमी, चीकू, सहजन, नींबू, — इमली, सहतूत, अमरूद, लभेड़ा, बेर आदि) फूलदार –117 (चांदनी, कचनार, चंपा, हरसिंगार आदि) — मिश्रित — 908 (मीठा नीम, बबूल, शीशम, पीपल, अशोक, — चिरौल, गूलर, कन्हेर, अमरूद आदि)

भोपाल: 60 लाख में 650 पेड़ हुए शिफ्ट भोपाल सीहोर नाका पर 650 पेड़ शिफ्ट किए। एक पेड़ पर लगभग 9230 रुपए खर्च किए। कुल 60 लाख रुपए खर्च किए, लेकिन एक भी पेड़ नहीं बचा। वहीं स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के कलियासोत के पास 125 पेड़ शिफ्ट किए। इस कार्य में 18.75 लाख यानी कि प्रत्येक पेड़ के लिए लगभग 15 हजार खर्च हुए। यहां भी नतीजा शून्य निकला।

इंदौर: पेड़ ट्रांसप्लांट के प्रयोग असफल निगम के एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर ने बताया कि पूर्व में पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने के एवज में निगम 12 से 15 हजार रुपए लेती थी। कुछ समय बाद इंदौर विकास प्राधिकरण, लोक निर्माण विभाग ने खुद पेड़ ट्रांसप्लांट किए। ये प्रयोग असफल रहा। इसलिए निगम ने अब पेड़ ट्रांसप्लांट करने का निर्णय लिया है। इस कार्य के लिए निगम करीब 26 हजार रुपए प्रति पेड़ वसूलेगी।



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