हवन में हर आहुति पर क्यों कहते हैं स्वाहा? आचार्य से जानें महत्व…ताकि भाव से करें देवताओं को प्रसन्न

हवन में हर आहुति पर क्यों कहते हैं स्वाहा? आचार्य से जानें महत्व…ताकि भाव से करें देवताओं को प्रसन्न


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Hawan Me Swaha Ka Matlab: अक्सर देखा जाता है कि हवन में आहुति देते वक्त स्वाहा (Swaha) कहा जाता है. ऐसा क्यों कहा जाता है? क्या आपको पता है ये कथाएं? आचार्य से जानें…

Swaha Ka Matlab: हिंदू धर्म में तप-जप के साथ यज्ञ या हवन का बहुत महत्व माना जाता है. किसी भी तरह का कोई भी शुभ या मांगलिक काम हो, सभी का आरंभ हवन के साथ ही किया जाता है. हवन करने की यह परंपरा अति प्राचीन मानी जाती है. प्राचीन काल से ही ऋषि मुनि ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए यज्ञ-हवन करते थे. इसके विषय में बहुत ही कम लोग जानते हैं कि आखिर हवन में आहुति देते वक्त स्वाहा क्यों कहा जाता है? आइए जानते हैं ताकि अगली बार हवन के समय आप भी भावपूर्ण ढंग से स्वाहा का उच्चारण करें.

क्या है स्वाहा का अर्थ
उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज ने बताया, जब हवन किया जाता है, तब हवन कुंड में हवन की सामग्री अर्पित करते समय स्वाहा शब्द का उच्चारण किया जाता है. इसका अर्थ है कि सही रीति से देवताओं तक हवन का भाग पहुंचाना. वहीं, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अग्निदेव की पत्नी का नाम स्वाहा था, जो दक्ष प्रजापति की पुत्री थीं. इसलिए, हवन कुंड में आहुति देते समय हर मंत्र के उच्चारण के बाद स्वाहा कहा जाता है और यह माना जाता है कि इससे अग्निदेव प्रसन्न होते हैं.

भगवान तक पहुंचती है आहुति
बता दें कि स्वाहा अग्नि देव की पत्नी हैं जो आहुति को अग्नि देव के माध्यम से मंत्र के देवी-देवता या भगवान तक पहुंचाने का कार्य करती हैं. जब हमारी आहुति अग्नि देव के माध्यम से उनके सही स्थान पर पहुंच जाती है तो हमें हवन यज्ञ करने का संपूर्ण फल प्राप्त हो जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सामग्री को स्वाहा अग्नि देव के माध्यम से देवताओं तक पहुंचने का एकमात्र साधन है. हालांकि धार्मिक ग्रंथो के अनुसार स्वाहा को लेकर बहुत सी कथाएं बताई गई हैं.

जानिए पौराणिक कथा

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब सृष्टि की उत्पत्ति हुई तब भूलोक पर भगवान ब्रह्मा ने कई प्रकार के जीव और मानव को उत्पन्न किया था. मानव के लिए धरती पर खाने पीने की वस्तुएं उत्पन्न हुई थीं. भूलोक पर जब अन्न का अभाव हुआ था तब भगवान ब्रह्मा ने मनुष्य से अग्निदेव और स्वाहा की उपासना करने को कहा था. इसके बाद हवन यज्ञ करने से धरती पर बारिश हुई और बारिश से खाने पीने की वस्तुएं, जल और जल से अन्न की उत्पत्ति हुई. शुभ कार्य करने से पहले हवन करने पर डाली गई आहुति अग्निदेव के माध्यम से देवताओं तक पहुंच जाती है, जिससे व्यक्ति को उसका संपूर्ण फल प्राप्त होता है.

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