इंदौर के भंवरकुआ स्थित आरके हॉस्पिटल में भर्ती 24 वर्षीय युवती छाया जायसवाल की मंगलवार सुबह मौत हो गई। युवती के परिजन ने इसे लेकर हंगामा कर दिया। उनका आरोप है कि सुबह नाश्ते के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। उस दौरान बिजली भी गुल हो गई।
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वार्ड से आईसीयू में ले जाने में 15 मिनट की देरी की गई। आईसीयू में कोई सीनियर डॉक्टर मौजूद नहीं था। बोतल वाला ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध न होने के कारण उसकी मौत हुई। मरने के बाद भी दवाइयां मंगवाई गई।
वहीं इस मामले में ड्यूटी डॉ. अंकित मेश्राम ने बताया कि छाया को अस्पताल में गंभीर हालत में एडमिट किया गया था। वह टीबी की मरीज थी। इन्फेक्शन भी काफी था। उसकी मौत कॉर्डियक पल्मोनरी अरेस्ट (हॉर्ट और लंग्स फेल होना) से हुई है।
आरके हॉस्पिटल में मंगलवार को 24 वर्षीय युवती छाया जायसवाल की मौत हो गई।
नाश्ते के बाद अचानक तबीयत बिगड़ी छाया पिता रमेश जायसवाल को चार दिन पहले सांस लेने में तकलीफ के कारण भर्ती कराया गया था। चाचा सुरेश जायसवाल ने बताया कि मंगलवार सुबह छाया ने नाश्ता किया और इसके बाद अचानक घबराहट होने लगी। जब डॉक्टरों को बुलाया तो उस समय कमरे में ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं थी। इसी बीच बिजली भी चली गई। वार्ड से आईसीयू पहुंचने के बाद इलाज शुरू हुआ। करीब 20 मिनट बाद उसकी मौत की सूचना दी गई।

परिजनों का कहना है कि बोतल वाला ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध नहीं था।
डॉक्टरों का दावा: मरीज को ऑक्सीजन लगी थी परिजनों ने दावा किया कि छाया को ऑक्सीजन नहीं लगाई गई। वहीं डॉक्टरों का दावा था कि मरीज को ऑक्सीजन लगी थी। हालांकि, परिजनों ने पुलिस की मौजूदगी में सीसीटीवी फुटेज देखी। इसमें नजर आया कि छाया को ऑक्सीजन नहीं मिली थी। घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। उन्होंने परिजनों को समझाया और पोस्टमॉर्टम कराने की बात कही। परिवार राजी हो गया और शव को एमवाय अस्पताल भेजा गया, जहां शाम को पोस्टमॉर्टम हुआ।

युवती की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा किया। उन्होंने प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए।
परिजनों का थाने पर हंगामा, की शिकायत युवती के परिजन ने थाने पर भी हंगामा किया और लिखित शिकायत दर्ज कराई। छाया अपने परिवार में सबसे बड़ी थी। वह कॉलेज की छात्रा थी। उसके तीन छोटे भाई-बहन हैं। अचानक मौत से पूरा परिवार सदमे में है। मां ममता जायसवाल बदहवास हालत में हैं।
डॉक्टर बोले- सीपीआर के साथ देनी थी दवाइयां डॉ. अंकित मेश्राम ने बताया कि छाया की गंभीर हालत की स्थिति परिजन को पहले ही अवगत करा दी गई थी। नाश्ते के बाद उसकी हालत जैसे ही बिगड़ी तो तुरंत आईसीयू में रेफर किया गया। इस दौरान उसे सीपीआर दिया गया लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा।
जब उसे आईसीयू में लाया गया तो सीपीआर के साथ उसे इमरजेंसी दवाइयों की सख्त जरूरत थी। ऐसे में परिजन से बाहर से दवाइयां मंगवाते को बहुत देर हो जाती इसलिए अस्पताल की इमरजेंसी की दवाइयां उसे दी गई। ये ही दवाइयां परिजन को लाने को कहा गया ताकि अस्पताल में फिर से उपलब्ध रहे।