ITR Refund: सिर्फ ITR भरकर नहीं पा सकते रिटर्न, पैसा पाने के लिए ये काम करना बहुत जरूरी, जानें एक्सपर्ट की सलाह 

ITR Refund: सिर्फ ITR भरकर नहीं पा सकते रिटर्न, पैसा पाने के लिए ये काम करना बहुत जरूरी, जानें एक्सपर्ट की सलाह 


ITR Filing last Date: वित्त वर्ष 2024-25 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का काम अब तेज़ी से हो रहा है. 15 सितंबर इसकी लास्ट डेट है. लाखों लोग पहले ही अपना ITR भर चुके हैं और रिफंड का इंतजार कर रहे हैं. कई टैक्सपेयर्स का कहना है कि आईटीआर दाखिल किए हुए एक महीने से ज्यादा समय बीत गया है, लेकिन अभी तक उनके खाते में रिफंड नहीं आया. इस बार रिफंड प्रोसेसिंग की स्पीड धीमी नज़र आ रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर केवल ITR भर देने से पैसा क्यों नहीं आता और टैक्सपेयर को किन ज़रूरी कदमों का पालन करना चाहिए.

रिफंड क्यों अटकता है?
सीए गणेश पटेल का कहना है कि रिफंड सिर्फ तभी मिलता है जब आपका रिटर्न सही ढंग से प्रोसेस हो चुका हो और विभाग की ओर से उसकी पुष्टि की जा चुकी हो. अगर आपके दस्तावेज अधूरे हैं, बैंक डिटेल्स गलत हैं या रिटर्न वेरिफाई नहीं हुआ है तो रिफंड अटक जाता है. अक्सर देखने को मिलता है कि लोग आईटीआर भरते तो हैं, लेकिन उसके बाद वेरिफिकेशन नहीं करते. बिना वेरिफिकेशन के रिटर्न को विभाग मान्य नहीं करता और रिफंड की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाती. यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोगों को महीनों तक इंतजार करना पड़ता है.

ITR वेरिफिकेशन सबसे पहला कदम
एक्सपर्ट सीए गणेश पटेल बताते हैं कि रिटर्न फाइल करने के बाद 30 दिनों के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन करना जरूरी है. इसके लिए आप आधार ओटीपी, नेट बैंकिंग, डीमैट अकाउंट या ई-फाइलिंग वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन वेरिफिकेशन कर सकते हैं, जो लोग ऑनलाइन वेरिफिकेशन नहीं करना चाहते, वे सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर (CPC) बेंगलुरु को फिजिकल ITR-V फॉर्म डाक से भेज सकते हैं. जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, रिटर्न “इनवैलिड” माना जाता है.

बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेशन
दूसरा बड़ा कारण जिससे रिफंड रुकता है, वह है बैंक अकाउंट का प्री-वैलिडेशन न होना. इनकम टैक्स विभाग रिफंड सीधे टैक्सपेयर के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करता है. अगर वह खाता पहले से विभाग के पोर्टल पर अपडेट और प्री-वैलिडेटेड नहीं है, तो रिफंड अस्वीकृत हो जाता है, इसलिए हर टैक्सपेयर को यह ध्यान रखना चाहिए कि जिस खाते में पैसा आना है, वह एक्टिव हो, आधार से लिंक हो और ई-फाइलिंग पोर्टल पर प्री-वैलिडेटेड हो.

पेंडिंग डिमांड या नोटिस की जांच
कई बार टैक्सपेयर पर पुराने वर्षों का बकाया टैक्स डिमांड होता है, जिसे वह नजरअंदाज कर देता है. ऐसे मामलों में विभाग रिफंड को समायोजित कर लेता है, इसलिए रिफंड क्लेम करने से पहले यह जांच लेना जरूरी है कि आपके खिलाफ किसी साल का पेंडिंग डिमांड तो नहीं है. इसके अलावा, अगर विभाग ने किसी स्पष्टीकरण के लिए नोटिस भेजा है और उसका जवाब नहीं दिया गया, तो भी रिफंड प्रक्रिया रुक सकती है.

प्रोसेसिंग स्टेटस पर नजर रखें
टैक्स विभाग की वेबसाइट पर जाकर आप अपने रिटर्न का स्टेटस आसानी से चेक कर सकते हैं. “इनकम टैक्स रिटर्न प्रोसेस्ड” दिखने के बाद ही रिफंड जारी होता है. अगर “रिफंड इश्यूड” लिखा है और पैसा अभी तक खाते में नहीं आया है, तो तुरंत बैंक से संपर्क करना चाहिए.

एक्सपर्ट की सलाह
विशेषज्ञ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का कहना है कि टैक्सपेयर को केवल रिटर्न दाखिल कर निश्चिंत नहीं हो जाना चाहिए. फाइलिंग के बाद वेरिफिकेशन, बैंक वैलिडेशन और पेंडिंग नोटिस की जांच जैसे सभी चरण पूरे करना जरूरी है. इसके अलावा, अगर कोई तकनीकी दिक्कत आ रही है तो ई-फाइलिंग हेल्पलाइन या अपने सीए की मदद लें.



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