भाद्रपद मास की सप्तमी को सिवनी जिले में महिलाओं ने संतान सप्तमी का पर्व मनाया। घरों में महिलाओं ने संतान सप्तमी की कथा का वाचन और श्रवण किया। उन्होंने विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की।
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पूजा में चंदन, वेलपत्र, फूल, धूप, दीप, अक्षत, पुए और नारियल का प्रयोग किया गया। पूजन में शीतल जल, कुमकुम, नारियल, अनाज, वस्त्र और मिष्ठान अर्पित किए गए।
संतान की खुशहाली के लिए किया व्रत
पंडित उपेंद्र उपाध्याय ने बताया कि यह व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए होता है। महिलाएं अपनी संतान की खुशहाली के लिए निराहार रहकर व्रत रखती हैं।
इस अवसर पर महिलाएं शिव-पार्वती के साथ शीतला माता की भी पूजा करती हैं। पूजा में कच्चे सूत का डोरा रखकर उसमें सात गांठ लगाई जाती है।
आटे-गुड़ से बने सात पुए पूजा में रखे
स्त्री-पुरुष दोनों व्रत करें तो दो डोरे रखे जाते हैं। एक व्यक्ति व्रत करे तो एक डोरा रखा जाता है। पूजा के बाद संतान की रक्षा के लिए कलावा उनकी कलाई पर बांधा जाता है। भोग में आटे-गुड़ से बने सात पुए रखे जाते हैं।

यह व्रत वंश वृद्धि के लिए किया जाता है। जिन दंपती को संतान नहीं है, वे यह व्रत करें तो उन्हें उत्तम संतान की प्राप्ति होती है। संतानों के स्वस्थ जीवन और दीर्घायु के लिए यह व्रत किया जाता है।