बचपन से ही संघर्ष
सीताराम पटेल का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता. परिवार खेती-किसानी से जुड़ा था लेकिन आमदनी इतनी नहीं थी कि घर का खर्च आसानी से चल सके. इसी कारण सीताराम ने पढ़ाई के साथ-साथ छोटी उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया. कभी मेडिकल की दुकान पर ₹150 महीने की नौकरी, तो कभी मोबाइल रिपेयरिंग का काम, जीवन की गाड़ी उन्होंने मेहनत के सहारे ही आगे बढ़ाई.
सन 2006 सीताराम की जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. नौकरी से संतोष नहीं मिल रहा था और खुद का कुछ करने का सपना दिन-रात उन्हें बेचैन कर रहा था. लेकिन पूंजी कहां से आती? घर की हालत तो ऐसी थी कि बड़ी रकम की कल्पना भी मुश्किल थी. तभी मां ने बेटे का सपना पूरा करने के लिए अपने गहने गिरवी रख दिए. मां के इस त्याग से सीताराम ने मोबाइल का कारोबार शुरू किया. इसी पूंजी से उन्होंने “श्री दादाजी मोबाइल” और “एचडीएम सेल्स” की नींव रखी.
मेहनत और ईमानदारी का फल
शुरुआती दौर आसान नहीं था, अनुभव कम था, बाजार की समझ भी सीमित थी. लेकिन सीताराम ने हार नहीं मानी. उन्होंने ईमानदारी से काम किया और ग्राहकों के विश्वास को सबसे बड़ी पूंजी माना. यही कारण रहा कि धीरे-धीरे उनका कारोबार बढ़ता गया और आज वे मोबाइल की एजेंसी के साथ-साथ रिटेल व्यापार, बाटा शोरूम, सफल सीट्स और सफल इंडस्ट्रीज के नाम से वेयरहाउस का कारोबार भी कर रहे हैं.
आज सीताराम का बिजनेस खंडवा सहित आसपास के चार जिलों तक फैला हुआ है. मोबाइल एजेंसी से लेकर बीज और वेयरहाउस तक, उनके कई कारोबार एक साथ चल रहे हैं. यह सब कुछ उन्होंने महज बीस सालों के भीतर हासिल किया. जहां कभी ₹150 महीने पर नौकरी करते थे, वहीं आज वे कई युवाओं को रोजगार देने वाले सफल उद्यमी हैं.
संघर्ष से मिली सीख
सीताराम कहते हैं कि व्यापार में तीन से पांच साल तक संघर्ष करना पड़ता है. इस दौरान आपको धैर्य रखना होगा, ईमानदारी बनाए रखनी होगी और ग्राहकों के भरोसे को कभी टूटने नहीं देना होगा. एक बार बाजार में अच्छी छवि बन गई तो काम अपने आप चलने लगता है.
अपनी सफलता का श्रेय सीताराम अपनी मां को देते हैं. वे बताते हैं कि मां के गहने ही उनकी पहली पूंजी थे और मां की दुआओं ने ही व्यापार को बढ़ाने में शक्ति दी. आज उन्होंने अपनी मां और बहनों के लिए हर वह सुविधा जुटा दी है जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी.
युवाओं के लिए प्रेरणा
सीताराम की कहानी सिर्फ व्यापार की सफलता नहीं, बल्कि सपनों को सच करने का जीता-जागता उदाहरण है. वे युवाओं से कहते हैं कि कभी हिम्मत मत हारो. मुश्किलें जरूर आएंगी, लेकिन अगर मन में ईमानदारी और आत्मविश्वास है तो मंज़िल एक दिन जरूर मिलेगी.