तारीख-26 अगस्त 2012। जगह- इंदौर का होलकर क्रिकेट स्टेडियम। शाम के 6 बजे थे…
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स्टेडियम के भीतर कांग्रेस नेता और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत कांग्रेस के बड़े नेता और मप्र सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय समेत बीजेपी के बड़े नेता मौजूद थे। स्टेडियम के बाहर कांग्रेस और बीजेपी के स्थानीय नेताओं का जमावड़ा था। अंदर की खबरें मैसेज के तौर पर बाहर खड़े कांग्रेस-बीजेपी समर्थकों तक पहुंच रही थी।
इन मैसेज को पढ़कर समर्थक अपने-अपने नेताओं के लिए नारे लगा रहे थे। साल 2012 में मप्र क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में कुछ ऐसा ही नजारा था। इस चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया और कैलाश विजयवर्गीय के बीच मुकाबला था। कुछ देर बार चुनाव के नतीजे घोषित किए गए और सिंधिया ने कैलाश विजयवर्गीय को 77 वोटों से हरा दिया।
अब 13 साल बाद एमपीसीए के चुनाव में सिंधिया परिवार की तीसरी पीढ़ी उतरी है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे महानआर्यमन सिंधिया का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय है। जानकारों का मानना है कि इसके जरिए महानआर्यमन की सियासी पारी की तैयारी की जा रही है, क्योंकि पिता और दादा ने भी अपने सियासी करियर की ऐसे ही शुरुआत की थी। पढ़िए रिपोर्ट
इंग्लैंड क्रिकेट टीम का हिस्सा थे माधवराव सिंधिया माधवराव सिंधिया का क्रिकेट से जुड़ाव स्कूल के दिनों से ही शुरू हो गया था। इंग्लैंड में पढ़ाई के दौरान भी उन्होंने क्रिकेट खेलना नहीं छोड़ा था। भारत लौटने के बाद उन्होंने जय विलास पैलेस की ओर से एक टीम बनाई, जिसका नाम रखा गया ग्वालियर टाइगर्स। यह टीम सिंधिया स्कूल और अन्य स्थानीय क्लबों के साथ मुकाबले खेलती थी।
साल 1967-68 में माधवराव ने ग्वालियर डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन को फिर से संगठित किया और उसके संरक्षक बने। उनके संरक्षण और आर्थिक सहयोग से ही वर्ष 1968-69 में पहला “सिंधिया सिल्वर कप टूर्नामेंट” (स्थानीय स्तर पर) आयोजित किया गया। अगले ही साल, 1969-70 में इस टूर्नामेंट को राष्ट्रीय स्वरूप दिया गया और इसका नाम बदलकर रखा गया “ऑल इंडिया सिंधिया इन्विटेशन कप टूर्नामेंट”।
इस प्रतियोगिता में देश के कई जाने माने क्रिकेट खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। उनमें नवाब पटौदी जूनियर, बी. एस. चंद्रशेखर, वी. आर. विश्वनाथ, एम. एल. जयसिंह, हनुमंत सिंह, अब्बास अली बेग,. एस. प्रसन्ना, सलीम दुर्रानी, राज सिंह, पार्थसारथी शर्मा शामिल थे।

सिंधिया क्रिकेट टूर्नामेंट का स्कोरबोर्ड उस समय के अखबार में प्रकाशित
1982 में माधवराव सिंधिया एमपीसीए के अध्यक्ष बने
एमपीसीए के मौजूदा अध्यक्ष अभिलाष खांडेकर कहते हैं कि होलकर घराने के दामाद हैं और महारानी उषा रानी के पति सतीश मल्होत्रा लंबे समय तक एमपीसीए के अध्यक्ष पद पर रहे। कुछ साल बाद सतीश मल्होत्रा की एमपीसीए में रुचि नहीं रही। उन्होंने कम समय का हवाला दिया।
उस समय एमपीसीए के कुछ सदस्यों ने जिनमें पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष ए.डब्ल्यू. कनमड़ीकर भी शामिल थे, उन्होंने माधवराव सिंधिया से निवेदन किया कि वे एमपीसीए के अध्यक्ष का दायित्व संभालें। इसके बाद 1982 में माधवराव सिंधिया पहली बार एमपीसीए के अध्यक्ष बने। इसके साथ ही वे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सदस्य भी बन गए। बाद में, 1990 में वे बीसीसीआई के अध्यक्ष बने और 1993 तक इस पद पर बने रहे।

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान नवाब पटौदी के साथ माधवराव सिंधिया
सांसद बनने के बाद ज्योतिरादित्य बने एमपीसीए प्रेसिडेंट 2002 में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पहली बार लोकसभा का उपचुनाव लड़ा था। 2004 में ज्योतिरादित्य सिंधिया एमपीसीए के अध्यक्ष बनाए गए, उन्होंने 2010 तक एमपीसीए का नेतृत्व किया। 2010 और 2012 में पहली बार सिंधिया के सामने कैलाश विजयर्गीय ने फॉर्म भरा, पर इसमें विजयवर्गीय को हार का सामना करना पड़ा।
2010 में ज्योतिरादित्य ने विजयवर्गीय को 70 वोटों के अंतर से हराकर अध्यक्ष पद बरकरार रखा। कुल 215 वोटों में से सिंधिया को 142 वोट मिले, जबकि विजयवर्गीय को केवल 72 वोट ही मिले। इस दौरान सिर्फ अध्यक्ष पद ही नहीं, बल्कि सिंधिया पैनल ने भी जबरदस्त जीत दर्ज की। कार्यालय पदों से लेकर प्रबंध समिति तक सभी सीटों पर सिंधिया समर्थित उम्मीदवारों ने जीत हासिल की।
2012 में ज्योतिरादित्य सिंधिया एक बार फिर एमपीसीए के अध्यक्ष चुने गए। 26 अगस्त 2012 को होल्कर स्टेडियम में हुए चुनाव में सिंधिया ने कैलाश विजयवर्गीय को बड़े अंतर से हराया। सिंधिया को इस बार कुल 232 में से 150 वोट मिले, जबकि विजयवर्गीय को केवल 73 वोट मिले।

महानआर्यमन ने क्रिकेट लीग से दिखाई क्षमताएं महानआर्यमन फिलहाल ग्वालियर क्रिकेट डिवीजन के उपाध्यक्ष हैं और पिछले दो वर्षों से क्रिकेट के मेनेजमेंट में सक्रिय हैं। उन्होंने दो साल पहले ‘मध्य प्रदेश प्रीमियर लीग सिंधिया कप’ की शुरुआत की थी, जो आईपीएल की तर्ज पर आधारित एक फ्रेंचाइजी-लीग की प्रतियोगिता है। वर्तमान अध्यक्ष अभिलाष खांडेकर कहते हैं कि महानआर्यमन में बड़ी जिम्मेदारियों को संभालने की क्षमता है।
मध्यप्रदेश प्रीमियर लीग का उन्होंने नेतृत्व किया है, उसे देखकर मैं और MPCA के बाकी सदस्य भी इस बात को मानते है कि वो नेतृत्व के लिए तैयार है। खांडेकर कहते हैं कि 2019 और 2022 में सर्वानुमति से चुनाव हुआ था। हमारे यहां लगभग 350 सदस्य है, सर्वानुमति से चुनाव लड़ने का ये महत्व है कि अगर ये आपस में दो पैनल बना कर लड़ने लगेंगे तो क्रिकेट का कोई भला नहीं होगा।

प्रेसिडेंट पद के लिए किसी ने नामांकन नहीं भरा एमपीसीए चुनाव के लिए शनिवार यानी 30 अगस्त को नामांकन की अंतिम तिथि थी, लेकिन महानआर्यमन के अलावा प्रेसिडेंट पद के लिए अन्य किसी ने भी नामांकन नहीं भरा है। ऐसे में उनका निर्विरोध चुना जाना तय है। महानआर्यमन एमपीसीए के सबसे युवा अध्यक्ष होंगे। चुनाव अधिकारी 31अगस्त यानी आज नामांकन फॉर्म की स्क्रूटनी कर नाम प्रकाशन करेंगे।
1 सितंबर को नाम वापसी का दिन है। इसके बाद 2 सितंबर को फाइल रिजल्ट जारी किया जाएगा। इस तरह से एमपीसीए की नई कार्यकारिणी तीन साल के लिए चुन ली जाएगी। इसमें शामिल होने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया और महानआर्यमन के 1 सितंबर को इंदौर पहुंचने की संभावना है।
