भोपाल के वरुण नामदेव ने रचा इतिहास, 3000 मीटर की ऊंचाई पर की चढ़ाई

भोपाल के वरुण नामदेव ने रचा इतिहास, 3000 मीटर की ऊंचाई पर की चढ़ाई


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Bhopal News: वरुण नामदेव ने कहा, ‘मैंने ठान लिया था कि मुझे भी इस रेस में भाग लेना है और मध्य प्रदेश से जाने वाले प्रतियोगी से रेस को लेकर मार्गदर्शन लेना है, लेकिन एमपी से किसी भी व्यक्ति ने भाग नहीं लिया था. …और पढ़ें

भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के साइकिलिस्ट वरुण नामदेव ने एक अनोखा चैलेंज पूरा कर न सिर्फ भोपाल बल्कि मध्य प्रदेश का नाम देशभर में रोशन किया है. ग्रेट हिमालयन अल्ट्रा, जिसे साइकिलिंग की दुनिया में सबसे कठिन माना जाता है, वरुण ने उसे लगभग 26 घंटे में पूरा कर दिखाया है. इसके लिए उन्होंने लद्दाख के पहाड़ों पर साइकिलिंग कर यह इतिहास रचा है. लोकल 18 के माध्यम से जानेंगे कि वरुण ने अपने इस सफर की शुरुआत कैसे की.

वरुण नामदेव ने लोकल 18 से बातचीत करते हुए कहा कि मुझे इस रेस के बारे में साल 2022 में पता चला. उस समय में लद्दाख में इसी रेस के लिए भोपाल टीम की ओर से बतौर वॉलंटियर गया था. उस समय मुझे पता चला कि लद्दाख में 430 किमी की एक रेस आयोजित की जाती है, जिसमें सारा सामान लादकर भाग लेना होता है. इसमें लगभग 30 घंटे का समय दिया जाता है. हालांकि वहां पर सुरक्षा की दृष्टि से रात के समय साइकिलिंग की परमिशन नहीं होती है. ऐसे में मुझे दिन के समय ही अपनी रेस पूरी करनी थी.

वरुण ने कहा कि मैंने यह ठान लिया कि मुझे भी इस रेस में भाग लेना है और मध्य प्रदेश से जाने वाले प्रतियोगी से रेस को लेकर मार्गदर्शन प्राप्त करना है. मगर मध्य प्रदेश से किसी भी व्यक्ति ने भाग नहीं लिया था. मैं पहला और इकलौता साइक्लिस्ट हूं, जिसने प्रदेश से इस रेस में भाग लिया. हालांकि यह मेरे लिए चुनौती के साथ एक मौका भी था कि मैं अपने शहर और प्रदेश का नाम देशभर में रोशन कर सकता हूं. पिछले साल एवरेस्टिंग चैलेंज पूरा करने के बाद मैं इस रेस की तैयारी में लग गया.

बारिश में भी की तैयारी
वरुण बताते हैं कि मैं बरसात के मौसम में तेज बारिश में भीगते हुए भी अपनी तैयारी नहीं छोड़ी और लगातार प्रैक्टिस करता रहा. मैंने शहर के कलियासोत, श्यामला हिल्स और मनुआभान टेकरी जैसी अलग-अलग पहाड़ी इलाकों में साइकिलिंग कर प्रैक्टिस की. इसके अलावा मटकुली से लेकर पचमढ़ी तक भारी बारिश में साइकिल ले जाकर प्रैक्टिस की और मेरे कोच प्रवीण सबकल के मार्गदर्शन में मैंने इस रेस को पूरा किया.

रेस से पहले हुआ एक्सीडेंट
वरुण ने बताया कि इस रेस से पहले मुझे कई तरह की दिक्कतों से गुजरना पड़ा. भोपाल के लिंक रोड नंबर दो पर प्रैक्टिस के दौरान मेरी कार से भिड़ंत हो गई. इसके बाद करीब तीन हफ्ते तक डॉक्टर ने मुझे पूरी तरह आराम करने के लिए कहा. मेरी तैयारी पूरी तरह से नहीं हो पा रही थी, जिसके कारण मुझे डर भी लग रहा था. इसके बाद मैंने यह फैसला लिया कि रेस से करीब 20 दिन पहले मैं लद्दाख पहुंचकर अपनी प्रैक्टिस पूरी करूंगा.

26 घंटे में पूरी की रेस
वरुण ने बताया कि रेस के पहले दिन मैंने 12 घंटे में करीब 220 किलोमीटर की रेस पूरी की और अगले दिन के लिए तैयार हुआ. दूसरे दिन बारिश और तेज आंधी के कारण रेस काफी चुनौतीपूर्ण हो गई थी. मगर उसे भी मैंने 15 घंटे की जगह 14 घंटे में ही पूरा कर लिया. इस तरह से मैं ग्रेट हिमालयन अल्ट्रा रेस को इतने समय में पूरा करने वाला पहला साइकिलिस्ट बना.

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