जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन 15 से 23 अगस्त के बीच किए गए थे।
बालाघाट के लांजी एसडीएम कार्यालय में जाति प्रमाण पत्र बनवाने में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। एसडीएम कार्यालय में भानेगांव से 4 और घोटी नंदोरा से एक व्यक्ति ने जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था।
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एक वकील के माध्यम से किए गए इन आवेदनों में मनीष कुमार, राहुल सिंह, योगेश पाल, अभिषेक और मोनू सिंह शामिल थे। इन्होंने खुद को क्रमश गोंड, चमार, बैगा, चम्हार और बैगा जाति का बताया था।
जांच में सभी फर्जी दस्तावेज मिले
एसडीएम की जांच में सभी दस्तावेज फर्जी पाए गए। आवेदकों ने आधार कार्ड, शाला शैक्षणिक प्रमाण पत्र, माध्यमिक शिक्षा मंडल की अंकसूची, मूल निवासी प्रमाण पत्र और समग्र आईडी सहित सभी दस्तावेज जाली बनाए थे।
पटवारी, आरआई और सरपंच की नकली सील का किया इस्तेमाल
जांच में यह भी पता चला कि आवेदकों ने पटवारी, आरआई और सरपंच की नकली सील और हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया। ये आवेदन 15 से 23 अगस्त के बीच किए गए थे।
दरअसल, जिन गांवों के निवासी होने का दावा का 5 शख्सों ने दावा किया था, वहां आरक्षित जाति के लोग रहते ही नहीं हैं। वकील का कहना है कि उसने सिर्फ आवेदन में मदद की है, फर्जी दस्तावेज बनाने में उसकी कोई भूमिका नहीं है।
एसडीएम ने जाति प्रमाण पत्र जारी करने पर रोक लगा दी है। इस मामले में जल्द ही अपराध दर्ज किया जा सकता है।