Last Updated:
Green Pea Farming: अगर आप हरी मटर की खेती करने की सोच रहे हैं तो यही सही सयम है. लेकिन, बुवाई से पहले ये जानना जरूरी है कि कौन सी किस्म बोई जाए जिससे बंपर फायदा हो. यहां जानिए एक्सपर्ट से सब…
विंध्य में मटर सबसे लोकप्रिय सब्जियों में से एक है. हर घर की रसोई में इस्तेमाल होने वाली यह फसल किसानों के लिए भी सोने की खदान है, क्योंकि इसकी मांग हमेशा बनी रहती है और फसल जल्दी तैयार हो जाती है.

लोकल 18 को जानकारी देते हुए आरईएचओ मीनाक्षी वर्मा ने बताया, अगर किसान सितंबर से अक्टूबर के बीच मटर की बुवाई करें तो उन्हें अगेती किस्मों का बेहतरीन लाभ मिलता है. शुरुआती फसल से बाजार में दाम ज्यादा मिलते हैं और पैदावार भी बेहतर होती है.

अर्ली बैजर-ये एक विदेशी किस्म है जो किसानों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है. इसका पौधा बौना होता है और फसल 50–60 दिनों में तैयार हो जाती है. एक हेक्टेयर में करीब 10 टन उत्पादन की क्षमता रखती है.

काशी नंदिनी- 2005 में जारी की गई यह किस्म कई राज्यों में सफल साबित हुई है. पंजाब, यूपी, हिमाचल से लेकर दक्षिण भारत तक किसान इसकी खेती कर रहे हैं. इससे 44 से 48 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन मिलता है.

काशी उदय- यह किस्म खासतौर पर बिहार, झारखंड और यूपी के लिए उपयुक्त है. इसकी फलियां 9 से 10 सेंटीमीटर लंबी होती हैं. 60 दिन में तैयार होकर यह प्रति एकड़ 42 क्विंटल तक उत्पादन देती है.

काशी अगेती- तेजी से पकने वाली किस्मों में यह सबसे खास है. महज 50 दिनों में बाजार में पहुंच जाती है. गहरे हरे रंग की सीधी फलियां इस किस्म की पहचान हैं. इससे 38–40 क्विंटल प्रति एकड़ पैदावार संभव है.

पूसा श्री- अगेती फसल के लिए उपयुक्त यह किस्म 50–55 दिनों में तैयार हो जाती है. प्रति फली 6–7 दाने और प्रति एकड़ 20–21 क्विंटल उत्पादन देती है. बाजार में जल्दी पहुंचने से किसानों को अच्छा मुनाफा मिलता है.

उन्होंने कहा की मटर की ये पांचों किस्में किसानों को कम समय में बेहतर पैदावार और ज्यादा मुनाफा देने वाली साबित होती हैं. सही समय पर बुवाई, संतुलित खाद और सिंचाई का ध्यान रखकर किसान अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा सकते हैं.