कौन है IFS पति-पत्‍नी की जोड़ी, जिन्‍होंने MP की राजनीति में मचाया हड़कंप, दोनों हैं B.Tech पास

कौन है IFS पति-पत्‍नी की जोड़ी, जिन्‍होंने MP की राजनीति में मचाया हड़कंप, दोनों हैं B.Tech पास


IFS Story, UPSC Story: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में इन दिनों एक बड़ा विवाद छाया हुआ है, जहां जंगल,वन्य जीवों की मौत और राजनीति का घालमेल हो गया है.बात एक बाघिन की रहस्यमयी मौत से शुरू हुई जो अब रिश्वतखोरी और धमकियों के आरोपों तक पहुंच गई.इस पूरे मामले में सुर्खियां बटोर रही हैं महिला DFO नेहा श्रीवास्तव जिन्होंने कांग्रेस MLA अनुभा मुंजारे पर उनके DFO पति से घूस मांगने का सनसनीखेज आरोप लगाया है. आइए जानते हैं दोनों डीएफओ अधिकारियों के बारे में…

Who is IFS Neha Srivastava: कौन हैं DFO नेहा श्रीवास्तव?

नेहा श्रीवास्तव एक तेज-तर्रार IFS अधिकारी हैं जो मूल रूप से झारखंड के हजारीबाग की रहने वाली हैं.उनका जन्म 2 मार्च 1990 को हुआ था. उनकी प्रारंभिक शिक्षा आरके मिशन देवघर से हुई. इसके बाद उन्‍होंने डीयू पाटिल कॉलेज से बीटेक किया.नेहा ने बायोटेक्नोलॉजी में B.Tech किया है और नेहा श्रीवास्‍तव ने 2015 की संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की भारतीय वन सेवा परीक्षा यानि आईएफएस (IFS) में 12वां स्‍थान हासिल किया.

IFS Neha Srivastava: मध्‍य प्रदेश IFS की लिस्‍ट में नेहा श्रीवास्‍तव का नाम.
2016 में उनका सेलेक्शन इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFS) में हो गया. 29 अगस्त 2016 से वो आधिकारिक तौर पर DFO बनीं. फिलहाल वह 3 अगस्त 2021 से बालाघाट के साउथ डिविजन में DFO के पद पर तैनात हैं.

Who is IFS Adhar Gupta: कौन हैं DFO अधर गुप्ता?

नेहा की शादी अधर गुप्ता से हुई है.अधर गुप्‍ता भी 2016 बैच के DFO अधिकारी हैं.अधर अलीगढ़, यूपी के रहने वाले हैं.उनका जन्‍म 30 अगस्त 1990 को हुआ और उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में B.Tech किया है.वह 9 मार्च 2022 से बालाघाट के रेंजर कॉलेज में DCF इंस्ट्रक्टर के तौर पर काम कर रहे हैं. नेहा को एक साहसी अधिकारी के रूप में जाना जाता है जो जंगल की सुरक्षा और वन्य जीवों के लिए हमेशा आगे रहती हैं,लेकिन इस बार वो अपने पति को घेरे में देखकर खुद मोर्चा संभाल रही हैं.

how to become ifs officer: कैसे बनते हैं IFS अधिकारी?

भारतीय वन सेवा (Indian Forest Service-IFS/IFoS)ऑफ‍िसर बनने के लिए UPSC की परीक्षा देनी पड़ती है. सबसे पहले IAS वाली प्रिलिम्स परीक्षा (CSE Prelims)देनी होती है.जो इस प्रिलिम्स को पास करते हैं वे अलग से होने वाली IFS की मेन्स परीक्षा में बैठते हैं. इस मेन्स में अंग्रेजी,सामान्य ज्ञान और चुने हुए दो विषयों के पेपर होते हैं. उसके बाद इंटरव्यू होता है.

UPSC Age Limit: कितनी होनी चाहिए उम्र?

इस परीक्षा में बैठने के लिए आपकी उम्र कम से कम 21 साल और ज़्यादा से ज्‍यादा 32 साल होनी चाहिए.आरक्षण वालों को छूट मिलती है.पढ़ाई की बात करें तो आपके पास ग्रेजुएशन में खास विषय जैसे कृषि,वानिकी,इंजीनियरिंग,पशुपालन,बायोलॉजी,केमिस्ट्री,मैथ्स,फिजिक्स,जूलॉजी वगैरह होना चाहिए.इसके साथ ही फिजिकल फिटनेस टेस्ट भी जरूरी होता है.परीक्षा पास करने के बाद पहले मसूरी (LBSNAA) में फाउंडेशन ट्रेनिंग होती है और फिर देहरादून के इंदिरा गाँधी नेशनल फॉरेस्ट अकैडमी (IGNFA) में करीब 20 महीने की खास ट्रेनिंग होती है.इसके बाद आपको किसी राज्य का कैडर मिल जाता है.

DFO Kaise bante hain: कैसे बनते हैं DFO?

अब बात करें DFO (Divisional Forest Officer) बनने की. जब आप IFS अफसर बन जाते हैं और ट्रेनिंग पूरी कर लेते हैं तो आपकी पहली बड़ी फील्ड पोस्टिंग अक्सर DFO या डिप्‍टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्‍ट (DCF,Deputy Conservator of Forests) के रूप में होती है. मतलब DFO बनने के लिए कोई अलग परीक्षा नहीं है बल्कि IFS अफसर बनने के बाद ही यह जिम्मेदारी मिलती है.DFO जिले या डिवीजन का वन विभाग का मुखिया होता है और वहां के जंगल, वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण का काम देखता है.

Who is MLA Anubha Munjare: कौन हैं MLA अनुभा मुंजारे?

अनुभा मुंजारे मध्य प्रदेश की कांग्रेस पार्टी से बालाघाट विधानसभा की MLA हैं.वह एक जमीनी नेता के रूप में जानी जाती हैं जो आदिवासी इलाकों में वन अधिकारों, पर्यावरण और स्थानीय मुद्दों पर जोर देती हैं. अनुभा ने कई बार विधानसभा में जंगल और वन्य जीवों से जुड़े सवाल उठाए हैं.वो खुद को लोगों की आवाज बताती हैं और कहती हैं कि वो भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ती हैं, लेकिन इस मामले में वो खुद आरोपों के घेरे में आ गई हैं. अनुभा ने नेहा के आरोपों को सिरे से खारिज किया है और कहा है कि ये सब उनके खिलाफ साजिश है, क्योंकि वो DFO अधर गुप्ता पर कार्रवाई की मांग कर रही थीं. अनुभा ने यहां तक कहा कि वो नेहा के खिलाफ हाईकोर्ट में मानहानि का केस करेंगी और जरूरत पड़ी तो अनशन भी करेगी.

बाघिन की मौत पर विधायक ने उठाया सवाल

बात शुरू होती है जुलाई 2025 से.जब बालाघाट के लालबर्रा वन क्षेत्र में एक बाघिन की संदिग्ध मौत हो गई.ये इलाका नेहा के पति अधर गुप्ता के डिविजन में आता है. 27 जुलाई को सोनेवानी के जंगल में बाघिन का शव मिला, लेकिन 29 जुलाई को वन विभाग के कुछ कर्मचारियों ने बिना पूरी जांच के शव को जला दिया जो कि नियमों के खिलाफ था. इससे साक्ष्य नष्ट होने का शक पैदा हुआ. 2 अगस्त को ये बात सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, तो विभाग ने 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की. 6 को गिरफ्तार किया गया, लेकिन डिप्टी रेंजर और वन रक्षक फरार हैं.विभाग ने पहले SIT बनाई, लेकिन बाद में STSF को सौंप दिया.अब MLA अनुभा मुंजारे ने इस मौत को मुद्दा बनाया. 5 अगस्त को विधानसभा में उन्होंने DFO अधर गुप्ता पर सवाल उठाया और कार्रवाई की मांग की.FIR दर्ज करने और सस्पेंड करने की भी मांग की. 12 अगस्त को वह ACS और वन प्रमुख से मिलीं और अधर को हटाने की बात कही. अनुभा का कहना है कि अधर ने साक्ष्य छिपाए और वो जंगल व बाघों की रक्षा के लिए लड़ रही हैं. बालाघाट की पहचान ही टाइगर्स से है और वो कहती हैं कि ये पति-पत्नी जोड़ी वन्य जीवों को नुकसान पहुंचा रही है.

नेहा ने लगाए रिश्‍वत मांगने के आरोप

इसके बाद नेहा श्रीवास्तव ने 16 अगस्त को PCCF (प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट) को एक पत्र लिखा जो वायरल हो गया.इसमें नेहा ने आरोप लगाया कि MLA अनुभा ने उन्हें फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में बुलाया और वहां 2-3 पेटी यानी 2-3 लाख रुपये की घूस मांगी.नेहा के मुताबिक जब उन्होंने मना किया तो MLA ने गालियां दीं.परिवार को धमकाया और कहा कि जिले में किसी DFO को टिकने नहीं देंगी. नेहा ने ये भी कहा कि MLA के निजी सहायक व उनके भतीजे ने उनसे अभद्रता की. नेहा का दावा है कि ये सब उनके पति अधर पर दबाव बनाने के लिए था ताकि वो बाघिन मौत केस में कार्रवाई न करें.नेहा ने पत्र में अपनी सुरक्षा और विभागीय काम में बाधा रोकने की मांग की.

अनुभा ने बताया झूठा

विधायक अनुभा ने तुरंत पलटवार किया. उन्होंने कहा कि नेहा के आरोप झूठे हैं वो पति को बचाने के लिए ओछी हरकत कर रही हैं. बैठक में वन विभाग के दूसरे अधिकारी भी थे और वहां जंगल सुरक्षा पर बात हुई थी.कोई घूस की मांग नहीं. अनुभा ने नेहा पर बदनाम करने का आरोप लगाया और कहा कि वो 2.5 लाख वोटर्स की चुनी हुई MLA हैं, ऐसे में ये अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगी.इस पत्र के वायरल होने के बाद 3 सितंबर को मध्य प्रदेश वन विभाग ने दो सदस्यीय जांच कमिटी बनाई जिसमें अपर PCCF कमलिका मोहंता और वन संरक्षक अंजना सुचिता तिर्की शामिल हैं.कमिटी को 2 हफ्तों में रिपोर्ट देनी है.



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