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Ganesh Pandal Ujjain News: फेडरेशन के अध्यक्ष प्रशांत सोनी ने लोकल 18 से कहा कि भगवान गणेश को साहूकार का रूप इसलिए दिया गया है ताकि वह भी समझें कि टैरिफ और सोने के भाव में रोजाना हो रहे उतार-चढ़ाव की वजह से व्या…और पढ़ें
भगवान गणेश का यह भव्य पंडाल महाकाल मंदिर से कुछ ही दूरी पर पटनी बाजार के पास देखने को मिल रहा है. इस पंडाल को सोने-चांदी की दुकान और भगवान गणेश को व्यापारी के रूप में दर्शाया गया है. उन्हें तीन करोड़ रुपये से ज्यादा के सोने के गहने पहनाए गए हैं. गणपति महाराज का यह रूप आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
पंडाल में भगवान गणेश नोट गिनने की मशीन, बही-खाता, तराजू, लैपटॉप और कैलकुलेटर लेकर विराजमान हैं. सर्राफ यूथ फेडरेशन के 100 व्यापारियों ने मिलकर यह पंडाल बनाया है. उन्होंने कहा कि इस दुकान (जिस जगह पंडाल है) का पुराने समय में बहुत बड़ा नाम था लेकिन यह दुकान कई सालों से बंद है. अब जो दुकान के मालिक हैं, वह इस दुकान को 14 साल से केवल गणेश जी को विराजमान कराने के लिए देते हैं. सालभर में सिर्फ 10 दिन यह दुकान खुलती है और यहां बप्पा का बड़े ही धूमधाम से उत्सव मनाया जाता है.
पिछले साल किया था नोटों से श्रृंगार
फेडरेशन के अध्यक्ष प्रशांत सोनी ने लोकल 18 से कहा कि भक्त यहां शाम 6 बजे से रात 12 बजे तक भगवान गणेश के दर्शन कर सकते हैं. रात को शयन आरती के बाद सभी ज्वेलरी निकालकर अपने पास रख लेते हैं. भगवान गणेश के विसर्जन के बाद सभी व्यापारियों को उनके आभूषण लौटा दिए जाएंगे. बता दें कि पिछले साल श्रीगणेश का लाखों रुपये के नोटों से श्रृंगार किया गया था.
भगवान गणेश क्यों बने साहूकार?
प्रशांत सोनी ने आगे कहा कि भगवान गणेश को साहूकार का स्वरूप इसलिए दिया गया है ताकि भगवान भी समझें कि टैरिफ और सोने के भाव में रोजाना हो रहे उतार-चढ़ाव से व्यापार करने में कितनी दिक्कत हो रही है. यही वजह है कि उन्हें ज्वेलरी शॉप जैसे पंडाल में बैठाया गया है.