इंदौर में शुक्रवार को मूसलाधार बारिश ने कई इलाकों को पानी-पानी कर दिया. खजराना क्षेत्र में तीन मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई. गनीमत रही कि हादसे में कोई बड़ी जानहानि की खबर सामने नहीं आई. वहीं रतलाम के परसोड़ा और ग्वालियर के ललियापुरा इलाकों में पानी भरने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया. हालात को देखते हुए इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और धार जिले में शनिवार को स्कूल और आंगनबाड़ियां बंद रखी गईं.
मौसम विभाग ने प्रदेश के झाबुआ, रतलाम, मंदसौर और नीमच जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. यहां अति भारी बारिश और वज्रपात की संभावना जताई गई है. वहीं 15 से ज्यादा जिलों में येलो अलर्ट दिया गया है, जिनमें भोपाल, इंदौर, उज्जैन और गुना भी शामिल हैं.
भारी बारिश और नदियों में बढ़ते जलस्तर के कारण कई डैमों के गेट खोल दिए गए हैं. आगर-मालवा के कुंडलिया डैम के आठ गेट, रायसेन के हलाली डैम के तीन गेट और उमरिया के जोहिला डैम का एक गेट खोलना पड़ा.
बारिश के ताजा आंकड़े
टीकमगढ़ के पलेरा में सबसे ज्यादा 188 मिमी बारिश दर्ज हुई. रतलाम के पिपलौदा में 118 मिमी, राओटी में 110 मिमी, इंदौर के हातोड़ में 101 मिमी और विदिशा के ग्यारसपुर में 90 मिमी बारिश हुई.
बारिश के चलते कई शहरों का तापमान नीचे आ गया है. इंदौर और भोपाल में पारा 27°C तक पहुंच गया, वहीं ग्वालियर में 29.4°C और जबलपुर में 30.6°C दर्ज किया गया. दूसरी ओर खंडवा में न्यूनतम तापमान सिर्फ 17.4°C रहा, जो प्रदेश में सबसे कम है.
मौसम विभाग का अनुमान
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, फिलहाल पूर्वी मध्यप्रदेश में लो प्रेशर एरिया बना हुआ है. इसी वजह से साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइनों का असर देखने को मिल रहा है. अगले 24 घंटों तक भारी बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है.
राजधानी भोपाल से लेकर ग्रामीण इलाकों तक लोग इस समय बारिश के कहर से जूझ रहे हैं. कहीं जलभराव है, कहीं मकान गिर रहे हैं और कहीं नदियां खतरे के निशान पर बह रही हैं. साफ है कि मानसून इस वक्त पूरे प्रदेश को अपनी गिरफ्त में लिए हुए है.