इस शहर में लगा MP का दूसरा सबसे बड़ा मेला, पहली बार मेले में आए ये नए झूले

इस शहर में लगा MP का दूसरा सबसे बड़ा मेला, पहली बार मेले में आए ये नए झूले


दीपक पांडेय/खरगोन: खरगोन में लगने वाला नवग्रह मेला इस साल अपने 134वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है. ग्वालियर के बाद इसे मध्य प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा और पुराना मेला माना जाता है. जिला मुख्यालय पर लगने वाला यह मेला हर साल खास आकर्षण का केंद्र रहता है. इस बार भी मेले की शुरुआत के साथ ही शहर और आसपास के इलाकों से लोगों की आवाजाही शुरू हो गई है. खरगोन सहित पड़ोसी जिलों से बड़ी संख्या में लोग मेले का आनंद लेने पहुंच रहे हैं. कुछ दुकानें अभी भी लग रही है.

मेले में झूले हैं आकर्षण का केंद्र
खरगोन के नवग्रह मेले का मुख्य आकर्षण यहां लगे झूले और दुकानें हैं. इस साल मेले में 30 से ज्यादा छोटे बड़े झूले लगाए गए हैं, जबकि करीब 450 से अधिक दुकानें सजी हैं. इन दुकानों पर घर गृहस्थी का हर छोटा बड़ा सामान किफायती दामों पर मिल रहा है. खिलौने, कपड़े, बर्तन, ज्वेलरी, सजावटी सामान, किचन क्रोकरी, अलमीरा, बिस्तर पेटी, किसानी यंत्र यहां मिल रहे है. साथ ही खाने-पीने की भी कई दुकानें लोगों को लुभा रही हैं. जैसे ही झूलों और दुकानों की शुरुआत हुई, वैसे ही मेले की रौनक बढ़ने लगी.

इस बार कौन से नए झूले आए
मेले में पहली बार डांसिंग पलाय और जीरो ग्रेविटी मिक्सर झूला लगाया गया है, जो दर्शकों को खूब पसंद आ रहा है. झूला संचालक राजू सोनी और शुभम सोनी के अनुसार डांसिंग पलाय, टोरा-टोरा झूले का अपग्रेडेड वर्जन है, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को रोमांचक अनुभव देता है. वहीं जीरो ग्रेविटी मिक्सर झूला युवाओं और बच्चों के बीच खासा लोकप्रिय बना हुआ है. इसके अलावा आकाश झूला, नाव झूला, ब्रेक डांस, ड्रेगन ट्रेन, 75 फिट ऊंचा टॉवर झूला, भूत बंगला और गोल्डन सर्कस भी आकर्षण का केंद्र हैं. अधिकांश झूलों का टिकट 20 से 40 रुपए के बीच रखा गया है.

पुलिस के जवान किए गए तैनात
करीब 4 लाख 87 हजार स्क्वेयर फीट में फैले मेले में 16 गलियां बनाई गई हैं और 3 एंट्रेंस गेट तैयार किए गए हैं. इसके अलावा 28 ब्लॉक बनाए गए हैं, जिनमें झूलों, खाने-पीने की दुकानों और अन्य दुकानों के अलग-अलग जोन तय किए गए हैं, ताकि लोगों को आवाजाही में परेशानी ना हो. मेले की सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर भी खास ध्यान दिया गया है. PWD विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने झूलों की मैकेनिकल जांच और भौतिक सत्यापन के बाद ही उन्हें ओके सर्टिफिकेट जारी किया है. वहीं, आमजनों की सुरक्षा के लिए 50 सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं. अस्थाई पुलिस चौकी बनाई है और करीब 10 पुलिस जवान तैनात किए गए हैं.

नवग्रह मंदिर से जुड़ा है कनेक्शन
नवग्रह मेला सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी है. खरगोन में कुंदा नदी के तट पर देश का इकलौता सूर्य प्रधान नवग्रह मंदिर स्थित है, इसी मंदिर के समाने यह मेला लगता है. मान्यता है कि साल 1892 में नवग्रह भगवान की जतरा से ही इस मेले की शुरुआत हुई थी. आज भी मेले के दौरान भगवान की जतरा निकलती है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहती है. माना जाता है कि जतरा निकलने के साथ ही मेला समाप्ति की ओर बढ़ता है. आमतौर पर यह जतरा मेले के आखिरी गुरुवार को निकलती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं.



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