अनंत चतुर्दशी पर झांकियां देखने रात भर जागा इंदौर: 28 झांकियों के साथ 32 अखाड़ों ने करतब दिखाए; 3500 जवानों ने संभाली सुरक्षा व्यवस्था – Indore News

अनंत चतुर्दशी पर झांकियां देखने रात भर जागा इंदौर:  28 झांकियों के साथ 32 अखाड़ों ने करतब दिखाए; 3500 जवानों ने संभाली सुरक्षा व्यवस्था – Indore News


12 घंटे में झांकियों ने करीब 6 किलो मीटर का सफर पूरा किया। चल समारोह मार्ग पर डेढ़ से 2 लाख लोग जुटे थे।

इंदौर में अनंत चतुर्दशी पर शनिवार को रतजगा हुआ। झांकियां देखने पूरा शहर सड़कों पर उतर आया। इंदौर में इसी के साथ झांकियों का 102वां साल भी पूरा हो गया। 12 घंटे में झांकियों ने करीब 6 किलो मीटर का सफर पूरा किया। चल समारोह मार्ग पर डेढ़ से 2 लाख लोग जुट

.

पूरी झांकी मार्ग पर सुरक्षा के लिए 3500 से ज्यादा जवान तैनात रहे। कलेक्टर आशीष सिंह ने ड्रोन से निगरानी की। शनिवार शाम चिकमंगलूर चौराहे पर भगवान गणेश के पूजन के साथ से शुरू हुआ झांकियों का कारवां सुबह भंडारी ब्रिज तक पहुंचा। झांकियों का जगह-जगह स्वागत किया गया। लोग घरों की छत और गैलरियों से पुष्प वर्षा करते नजर आए।

मंत्री ने भजन गाया, युवकों ने किया गरबा चल समारोह के दौरान प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी रंग जमा दिया। उन्होंने अपने अंदाज में भजन और देशभक्ति गीत गाए। इस दौरान लोगों ने झांकी पर पुष्प वर्षा की। अखाड़ों की ओर से छोटे-छोटे बच्चों और युवतियों ने करतब दिखाए। यह सिलसिला पूरी रात चलता रहा।

15 तस्वीरों में देखिए अनंत चतुर्दशी चल समारोह…

कलेक्टर आशीष सिंह ने खजराना गणेश की झांकी में पूजन कर चल समारोह की शुरुआत की।

झांकियों का कारवां जब कृष्णपुरा छत्री पहुंचा तो नजारा देखते बन रहा था।

झांकियों का कारवां जब कृष्णपुरा छत्री पहुंचा तो नजारा देखते बन रहा था।

नगर निगम की झांकी भगवान गणेश के विवाह पर आधारित रही।

नगर निगम की झांकी भगवान गणेश के विवाह पर आधारित रही।

मालवा मिल की झांकी में निषाद राज प्रभु श्रीराम का चरण वंदन करते नजर आए।

मालवा मिल की झांकी में निषाद राज प्रभु श्रीराम का चरण वंदन करते नजर आए।

ओम श्री महावीर व्यायाम शाला की खूबसूरत झांकी।

ओम श्री महावीर व्यायाम शाला की खूबसूरत झांकी।

हनुमंत ध्वज पथक के कलाकारों ने ढोल की प्रस्तुति दी।

हनुमंत ध्वज पथक के कलाकारों ने ढोल की प्रस्तुति दी।

पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखने वाली महिलाओं की झांकी।

पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखने वाली महिलाओं की झांकी।

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने श्रम शिविर के पास झांकी में देश भक्ति गीत गया।

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने श्रम शिविर के पास झांकी में देश भक्ति गीत गया।

अलग-अलग अखाड़ों के कलाकारों ने अपना दमखम दिखाया।

अलग-अलग अखाड़ों के कलाकारों ने अपना दमखम दिखाया।

10 साल की लावण्या माता कालका का भेष बनाकर चल समारोह में शामिल हुई।

10 साल की लावण्या माता कालका का भेष बनाकर चल समारोह में शामिल हुई।

राजवाड़ा में कृष्णपुरा की छत्री के पास चल समारोह का ड्रोन व्यू।

राजवाड़ा में कृष्णपुरा की छत्री के पास चल समारोह का ड्रोन व्यू।

कई लोग झांकी देखने सड़क किनारे ओटले में बैठक जमाई।

कई लोग झांकी देखने सड़क किनारे ओटले में बैठक जमाई।

सड़कों पर हर तरफ झांकियां और दूर-दूर से आए लोग दिख रहे हैं।

सड़कों पर हर तरफ झांकियां और दूर-दूर से आए लोग दिख रहे हैं।

झांकियों में बाल गणेश से जुड़ी कथा का दिखाया गया।

झांकियों में बाल गणेश से जुड़ी कथा का दिखाया गया।

कृष्णपुरा छतरी से जेल रोड के बीच का नजारा।

कृष्णपुरा छतरी से जेल रोड के बीच का नजारा।

कल्याण मिल ने सैनिकों के सम्मान में झांकी बनाई अनंत चतुर्दशी के चल समारोह में इस बार 6 मिलों की 16 झांकियां और 4 संस्थाओं की 12 अन्य झांकियां भी शामिल रहीं। समारोह में खजराना गणेश की झांकी सबसे आगे चली। 32 अखाड़ों के समूह ने करतब दिखाए।

कल्याण मिल ने सैनिकों के सम्मान में झांकी बनाई है। 10 साल की एक बच्ची लावण्या पवार मां कालका के भेष में आई। छोटे-छोटे कलाकारों ने भी करतब दिखाए। झांकियों को देखने के लिए लाखों की संख्या में लोग पहुंचे।

छोटा हाथी और कालू मदारी ने बच्चों का दिल जीता मालवा मिल की झांकियों में छोटा हाथी और कालू मदारी ने बच्चों का दिल जीत लिया। वहीं, होप मिल की झांकी में गणेशजी बारात लेकर निकले। उनके भाई कार्तिकेय के जन्म की गाथा प्रदर्शित की गई।

होम मिल की झांकियों में गंगाजी का धरती पर अवतरण देखने को मिला, तो मालवा मिल की झांकी में निषाद राज प्रभु श्रीराम का चरण वंदन करते नजर आए। श्रीकृष्ण वाली झांकी में वे गोपियों के साथ रासलीला करते दिखे।

कल्याण मिल की झांकी में ऑपरेशन सिंदूर के तहत सेना की मिसाइलें और बम ने दुश्मन को तबाह किया। अन्य झांकियों में जहां वीर बालक अभिमन्यु के साथ ही क्रूर राक्षस हिरण्यकश्यप और बकासुर का वध, हनुमानजी द्वारा लंका दहन की चलित दृश्य दिखाया गया।

102 साल पहले हुई थी चल समारोह की शुरुआत

  • झांकियों के चल समारोह की शुरुआत करीब 102 साल पहले मिल मजदूर मोरू भैया पुराणिक और मैनेजर श्रीपंत वैद्य ने की थी, तब शायद ही उन्होंने कल्पना की हो कि ये इंदौर की पहचान बन जाएगा।
  • लेखक स्व. गणेश मतकर ने अपनी किताब ‘इंदौर दर्शन’ में यहां की मिलों का सफर बताया है। उनके एक लेख के अनुसार, ‘इंदौर में पहली स्टेट कॉटन मिल की स्थापना 1866 में हुई। 1913 से 1915 के बीच हुकुमचंद मिल अस्तित्व में आई।
  • 1924-25 में पहली बार हुकुमचंद मिल में मोरेश्वर पुराणिक उर्फ मोरू भैया ने गणेशोत्सव की शुरुआत की। मजदूरों से चंदा जुटाया और 10 दिन तक रोजाना 20 से 25 मजदूर आकर सिर्फ आरती-पूजा करते।
  • 1925-26 में मिल के मैनेजर श्री पंत वैद्य ने इस उत्सव में भजन-कीर्तन को भी जोड़ दिया। यहीं से अनंत चतुर्दशी पर झांकी जुलूस की शुरुआत हो गई। प्रतिमा को एक बग्घी पर निकालने का फैसला किया गया, जिसे बैलगाड़ी की तरह निकाला।



Source link