मप्र में खाद की कालाबाजारी: किसानों को दूसरी खाद बांट रही समितियां, रिकॉर्ड में यूरिया दर्ज – Bhind News

मप्र में खाद की कालाबाजारी:  किसानों को दूसरी खाद बांट रही समितियां, रिकॉर्ड में यूरिया दर्ज – Bhind News



पिछले सप्ताह यूरिया की कमी को लेकर भिंड कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव और भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह भिड़ गए थे। गत बुधवार को खुद सीएम डॉ. मोहन यादव ने खाद वितरण को लेकर कलेक्टरों को फटकार लगाई थी। कृषि विभाग के अफसर कहते हैं कि जिले में पर्याप्त खाद

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भास्कर पड़ताल में सामने आया कि सहकारी समितियों ने रिकार्ड में 6700 टन यूरिया बांटा दिखाया। असल में किसानों को यूरिया की जगह डीएपी, एनपीके और एएसपी की बोरियां मिली हैं। किसानों को यूरिया की जरूरत है, इसलिए उन्हें मजबूरी में ब्लैक मार्केट से खरीदना पड़ रहा है। कृषि विभाग के अनुसार, खरीफ सीजन के लिए जिले में 53 हजार टन खाद की जरूरत थी। इसमें 30 हजार टन यूरिया, 10-10 हजार टन डीएपी और एनपीके शामिल थे।

इसलिए यूरिया की मांग ज्यादा : कृषि विभाग के अफसरों की मानें तो जिले में धान का रकवा बढ़ रहा है। पिछले वर्ष जिले में 42 हजार हेक्टेयर में धान की बोनी हुई थी। जबकि इस वर्ष यह आंकड़ा 50 हजार के पार हो चु का है। धान के लिए यूरिया खाद की ही जरूरत होती है। भिंड कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव का कहना है कि खाद वितरण में गड़बड़ी की जहां भी शिकायत प्राप्त हो रही है। वहां कार्रवाई कर रहे हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट – दो उदाहरणों से समझें किस तरह से समितियों से चोरी हो रही खाद

1. सहकारी समिति अटेर

  • 16 अगस्त से 23 अगस्त के बीच सोसायटी ने रिकाॅर्ड के अनुसार 27 टन यूरिया बांटा।
  • किसान अहिवरन सिंह भदौरिया को रिकाॅर्ड में 33 बोरी यूरिया मिली दिख रही थी, लेकिन उन्हें केवल 23 बोरी एएसपी मिली।
  • गिरजाशंकर पांडेय को रिकार्ड में 44 बोरी यूरिया दी गई दिख रही थी, लेकिन उन्हें केवल 40 बोरी एनपीके मिली।
  • शिवराम को भी यूरिया दी गई दिख रही थी, पर उनके भाई रामप्रकाश के अनुसार उन्हें केवल 22 बोरी एनपीके मिली।
  • अटेर सोसायटी के सचिव राजू दीक्षित का कहना है कि उन्होंने अब तक यूरिया नहीं बांटी है।

2. सहकारी समिति उदोतगढ़ : यहां भी रिकॉर्ड गड़बड़

  • 16 अगस्त से 23 अगस्त तक सोसायटी ने रिकाॅड के अनुसार कुल 21.740 टन यूरिया बांटा।
  • किसान केशव सिंह तोमर ने बताया कि 22 अगस्त को सोसायटी से 13 बोरी डीएपी और 5 बोरी एनपीके मिली। रिकार्ड में उनके नाम 40 बोरी यूरिया दर्ज है।
  • संजीव सिंह तोमर को भी 10 बोरी डीएपी, 5 बोरी एनपीके मिली, रिकार्ड में 28 बोरी यूरिया दर्ज है।
  • नरेंद्र सिंह राजावत के नाम रिकार्ड में 33 बोरी यूरिया दर्ज थी, पर उन्हें 15 बोरी डीएपी, 5 एनपीके मिली।

यूरिया का हिसाब : अब तक 13.5 हजार टन यूरिया, 5300 टन डीएपी और 5100 टन एनपीके बांटी जा चुकी हैं। उपलब्ध खाद का 50% हिस्सा सहकारी समितियों के जरिए (6700 टन) किसानों को दिया जा रहा है। बाकी का 20% निजी दुकानों और 30% नगद गोदामों से वितरित किया जा रहा है।



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