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Khargone News: डॉ बीएल पटेल ने लोकल 18 को बताया कि पशुपालकों की मदद के लिए राज्य सरकार ने 1962 टोल फ्री नंबर पर घर बैठे इलाज की सुविधा शुरू की है. इस एंबुलेंस सेवा में डॉक्टर और स्टाफ आपके घर तक आकर पशुओं का इल…और पढ़ें
खरगोन के पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ डॉ बीएल पटेल ने लोकल 18 को बताया कि गलघोंटू रोग मुख्य रूप से बरसात के मौसम में फैलता है. संक्रमित पशु को शुरुआत में जुकाम, नाक से पानी बहना और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. स्थिति गंभीर होने पर गला पूरी तरह जाम हो जाता है और पशु झटके से सांस लेने लगता है. इलाज न मिलने पर यह रोग केवल दो दिन में मौत का कारण बन सकता है.
एक्सपर्ट्स के अनुसार, गलघोंटू रोग से बचाव का सबसे कारगर तरीका टीकाकरण है. पशुपालकों को अपने पशुओं को गीली जगहों और ठंडी हवा से बचाकर रखना चाहिए. जिन पशुओं को टीका लग चुका होता है, वे इस बीमारी से सुरक्षित रहते हैं. यदि कोई पशु संक्रमित हो जाए, तो तुरंत एंटीबायोटिक और सूजन कम करने वाली दवाएं देना जरूरी है.
पशुपालकों को मिल रही राहत
बरसात के समय पशुओं को बीमारियों से बचाना चुनौती बन जाता है लेकिन अगर लक्षण समय रहते पहचान लिए जाएं और नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क कर लिया जाए, तो गलघोंटू रोग का इलाज संभव है. डॉक्टरों का मानना है कि सावधानी और सही समय पर इलाज से पशुओं की जान बचाई जा सकती है.
घर बैठे इलाज की सुविधा
डॉ पटेल ने बताया कि पशुपालकों की मदद के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने 1962 टोल फ्री नंबर पर घर बैठे इलाज की सुविधा शुरू की है. इस एंबुलेंस सेवा में डॉक्टर और स्टाफ गांव तक पहुंचकर पशुओं का इलाज करते हैं. बड़े पशुओं के इलाज के लिए प्रति पशु 150 रुपये का शुल्क लिया जाता है. यह सुविधा खासतौर पर दूरस्थ क्षेत्रों के पशुपालकों के लिए राहत लेकर आई है.