खंडवा की मिट्टी से जुड़ी यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है. पहले किसान अपने खेतों से गन्ना लाकर कोल्हू में पीसते थे, जो काफी समय लेने वाली प्रक्रिया थी. कोल्हू से प्राप्त रस को बड़े बर्तनों में उबालकर गुड़ बनाया जाता था. हालांकि यह तरीका आज भी कुछ छोटे गांवों में अपनाया जाता है, पर अब समय बदल चुका है.
आधुनिक क्रेशर तकनीक से बने गुड़ का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसका स्वाद बेहद शुद्ध और मीठा होता है. पारंपरिक कोल्हू में गन्ना अच्छी तरह से नहीं पिसता था, जिससे रस में अवशेष रह जाते थे. वहीं क्रेशर मशीन से गन्ने का रस पूरी तरह निकाला जाता है, जिससे गुड़ की शुद्धता बनी रहती है. केमिकल मुक्त गुड़ स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है, क्योंकि इसमें कोई हानिकारक तत्व नहीं होते.
खंडवा के गन्ना उत्पादक अब आधुनिक क्रेशर तकनीक अपनाकर अधिक मात्रा में गुड़ तैयार कर रहे हैं. इससे न केवल उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ी है, बल्कि उनकी आमदनी में भी वृद्धि हुई है. पहले की तुलना में अब गुड़ बनाना ज्यादा साफ-सुथरा और स्वास्थ्यवर्धक हो गया है. किसान इस बदलाव से बहुत खुश हैं.
गुड़ का यह बदलाव सिर्फ तकनीकी उन्नति नहीं, बल्कि एक परंपरा का आधुनिक स्वरूप है. पारंपरिक कोल्हू से लेकर आधुनिक क्रेशर तक का सफर यह दर्शाता है कि कैसे समय के साथ कृषि उद्योग ने कदमताल किया है. आज खंडवा के किसान न केवल स्वादिष्ट गुड़ बना रहे हैं, बल्कि स्वास्थ्य का भी ध्यान रख रहे हैं. यदि आप भी प्राकृतिक, शुद्ध और केमिकल मुक्त गुड़ खाना चाहते हैं तो आधुनिक क्रेशर से बने इस गुड़ का उपयोग जरूर करें. यह न केवल स्वाद में बेहतरीन है, बल्कि सेहत के लिए भी लाभकारी है.