देसी गुड़ का सच: कोल्हू से क्रेशर तक… क्यों बदल गया स्वाद और शुद्धता का खेल?

देसी गुड़ का सच: कोल्हू से क्रेशर तक… क्यों बदल गया स्वाद और शुद्धता का खेल?


मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में सदियों पुरानी गुड़ बनाने की परंपरा अब आधुनिक तकनीक की बदौलत एक नया मुकाम हासिल कर चुकी है. पहले पारंपरिक कोल्हू का इस्तेमाल होता था, लेकिन अब आधुनिक क्रेशर तकनीक से बने शुद्ध और केमिकल-रहित गुड़ ने स्वाद और गुणवत्ता में नई ऊंचाइयां छू ली हैं.

खंडवा की मिट्टी से जुड़ी यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है. पहले किसान अपने खेतों से गन्ना लाकर कोल्हू में पीसते थे, जो काफी समय लेने वाली प्रक्रिया थी. कोल्हू से प्राप्त रस को बड़े बर्तनों में उबालकर गुड़ बनाया जाता था. हालांकि यह तरीका आज भी कुछ छोटे गांवों में अपनाया जाता है, पर अब समय बदल चुका है.

भरत राव, जो जैविक गुड़ बनाने वाले किसान हैं, बताते हैं कि आज के दौर में गुड़ बनाने की प्रक्रिया में आधुनिक क्रेशर मशीनों का उपयोग हो रहा है. क्रेशर मशीनें गन्ने को तेज और आसान तरीके से पीसती हैं और इसमें केमिकल का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं होता. यह प्रक्रिया पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से की जाती है. गन्ने का रस सीधे क्रेशर में पिसकर बड़े स्टेनलेस स्टील टैंकों में इकट्ठा किया जाता है. इसके बाद उस रस को खुले बॉयलरों में धीमी आंच पर गर्म करके गुड़ तैयार किया जाता है. इस प्रक्रिया में किसी भी रसायन का उपयोग नहीं किया जाता.

आधुनिक क्रेशर तकनीक से बने गुड़ का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसका स्वाद बेहद शुद्ध और मीठा होता है. पारंपरिक कोल्हू में गन्ना अच्छी तरह से नहीं पिसता था, जिससे रस में अवशेष रह जाते थे. वहीं क्रेशर मशीन से गन्ने का रस पूरी तरह निकाला जाता है, जिससे गुड़ की शुद्धता बनी रहती है. केमिकल मुक्त गुड़ स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है, क्योंकि इसमें कोई हानिकारक तत्व नहीं होते.

सिलोदा गांव के रहने वाले भरत राव ने Local 18 से बात करते हुए कहा कि लोग आजकल इस गुणवत्ता वाले गुड़ के लिए 3 गुना दाम तक देने को तैयार रहते हैं. अब यह केवल मिठाई बनाने का साधन नहीं, बल्कि स्वास्थ्यवर्धक पदार्थ के रूप में भी उपयोग किया जाता है. कई रसोइये, आयुर्वेदिक चिकित्सक और सेहतमंद भोजन बनाने वाले इस शुद्ध गुड़ का उपयोग करते हैं.

खंडवा के गन्ना उत्पादक अब आधुनिक क्रेशर तकनीक अपनाकर अधिक मात्रा में गुड़ तैयार कर रहे हैं. इससे न केवल उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ी है, बल्कि उनकी आमदनी में भी वृद्धि हुई है. पहले की तुलना में अब गुड़ बनाना ज्यादा साफ-सुथरा और स्वास्थ्यवर्धक हो गया है. किसान इस बदलाव से बहुत खुश हैं.

आजकल इस केमिकल-रहित शुद्ध गुड़ की मांग तेजी से बढ़ रही है. लोग बड़ी संख्या में इसे खरीदते हैं. दुकानदार और व्यापारी इसे बड़े पैमाने पर शहर-शहर और राज्य-राज्य तक पहुंचा रहे हैं. शुद्धता और स्वाद को देखकर ग्राहक इसे प्राथमिकता से खरीदते हैं.

गुड़ का यह बदलाव सिर्फ तकनीकी उन्नति नहीं, बल्कि एक परंपरा का आधुनिक स्वरूप है. पारंपरिक कोल्हू से लेकर आधुनिक क्रेशर तक का सफर यह दर्शाता है कि कैसे समय के साथ कृषि उद्योग ने कदमताल किया है. आज खंडवा के किसान न केवल स्वादिष्ट गुड़ बना रहे हैं, बल्कि स्वास्थ्य का भी ध्यान रख रहे हैं. यदि आप भी प्राकृतिक, शुद्ध और केमिकल मुक्त गुड़ खाना चाहते हैं तो आधुनिक क्रेशर से बने इस गुड़ का उपयोग जरूर करें. यह न केवल स्वाद में बेहतरीन है, बल्कि सेहत के लिए भी लाभकारी है.



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