पशुपालन विभाग की जमीन पर हुए कब्जे पर इस तरह से निशान बनाए गए हैं।
भोपाल के अनंतपुरा कोकता की एक अवैध कॉलोनी में ‘मछली’ कनेक्शन होने का शक है। अफसरों की पड़ताल में सामने आया है कि यह कॉलोनी सरकारी जमीन पर बनी है। इसलिए यह टीएंडसीपी से अप्रूव्ड भी नहीं है। इस कॉलोनी में एक ही समुदाय को प्लॉट बेच जाने की भी जानकारी साम
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सूत्रों के अनुसार, इस कॉलोनी में मछली परिवार का सीधे दखल है। पिछले दिनों कोकता में पशुपालन विभाग की 65 एकड़ जमीन के सीमांकन के दौरान ही अफसरों को इस बात की जानकारी लगी। लेक सिटी नाम से कट रही कॉलोनी में कई प्लॉट बेचे जा चुके हैं।
आज से नोटिस देने की कार्रवाई इधर, पशुपालन विभाग की जिस जगह पर कब्जा है, उसे लेकर सोमवार से नोटिस देने की कार्रवाई शुरू होगी। गोविंदपुरा तहसीलदार सौरभ वर्मा नोटिस देने की कार्रवाई करेंगे। सीमांकन में नगर निगम की 50 दुकान, पेट्रोल पंप और एसटीपी यानी, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का बनाया जाना भी सामने आया था। 5 एकड़ जमीन पर कृषि से जुड़े काम और खेती कराना, 200 फीट कोकता बायपास का निर्माण भी हुआ।
डायमंड सिटी के लोगों ने एसडीएम रवीशकुमार श्रीवास्तव को आवेदन भी दिया है। ताकि, कार्रवाई न हो सके।
सीमांकन रिपोर्ट के अनुसार- 4 कॉलोनी के गेट, सड़क और पार्क भी कब्जे में शामिल हैं। वहीं, डायमंड सिटी कॉलोनी में 20 मकान, एक प्राइवेट स्कूल, शादी हॉल/रिसोर्ट, 1 एकड़ जमीन पर खेती, फार्म हाउस और पक्का निर्माण और 130 डेसीमल भूमि पर अवैध तरीके से खेती करना पाया गया है।
ये कब्जा सामने आते ही उन लोगों की तस्वीर साफ हो गई है, जिनके कब्जे हैं। हालांकि, कॉलोनी के लोगों का कहना है कि उन्होंने सारे दस्तावेज देखकर ही जमीन खरीदी थी। उस समय प्रशासन ने रजिस्ट्री के बाद नामांतरण, बंटवारे जैसी प्रक्रिया भी की। इसके बाद बैंकों से लोन मिला। अब कब्जा बताया जा रहा है।

पहले पशुपालन विभाग देने वाला था नोटिस जमीन पर जिनका कब्जा है, उन्हें नोटिस दिए जाने की तैयारी है। पहले पशुपालन विभाग नोटिस देने वाला था, लेकिन कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के आदेश के बाद अब गोविंदपुरा तहसीलदार सौरभ वर्मा नोटिस जारी करेंगे। सूत्रों के अनुसार, सबसे पहले कमर्शियल कब्जों पर कार्रवाई होगी। नगर निगम की दुकानों को लेकर सरकारी प्रक्रिया हो सकती है। इससे दुकानें तोड़ने वाली जद में नहीं आएगी। बता दें कि 65 एकड़ जमीन के सीमांकन के बाद पिछले सप्ताह बुधवार को कलेक्टर सिंह को रिपोर्ट दे दी गई थी।
अब तक यह प्रक्रिया हुई
- 27 अगस्त को गोविंदपुरा एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव, तहसीलदार सौरभ वर्मा की मौजूदगी में 11 पटवारी और 3 राजस्व निरीक्षकों ने सीमांकन शुरू किया था।
- तीन दिन के भीतर सीमांकन कार्य पूरा हो गया। इसके बाद रिपोर्ट एसडीएम और तहसीलदार को दी गई। रिपोर्ट में बताया गया कि किस रकबे में किसका और कितना कब्जा है?
- इसी बीच 2 सितंबर को डायमंड सिटी समेत आसपास रहने वाले कई लोग एसडीएम ऑफिस पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई।
- 3 सितंबर को यह रिपोर्ट एसडीएम श्रीवास्तव और तहसीलदार वर्मा ने कलेक्टर को पेश की।
- अब चिंह्नित कब्जाधारियों को पशुपालन विभाग से नोटिस भेजे जाएंगे।
इसलिए किया गया था सीमांकन 34 साल बाद पशुपालन विभाग को सीमांकन के पीछे भोपाल के मछली परिवार पर हुई कार्रवाई है। ड्रग्स और रेप केस के मामले में इस परिवार के दो सदस्य जेल में बंद है, जबकि अन्य पर भी कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद 30 जुलाई और फिर 21 अगस्त को जिला प्रशासन ने दो बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 बड़े अवैध निर्माण जमींदोज कर दिए। ये सभी सरकारी जमीन पर बनाए जाना सामने आए। इस जमीन की कीमत सवा सौ करोड़ रुपए आंकी गई।
इसी बीच पशुपालन विभाग ने गोविंदपुरा एसडीएम श्रीवास्तव और तहसीलदार वर्मा को एक आवेदन दिया, जिसमें कहा गया कि उनकी जमीन पर भी कब्जा हो सकता है। इसलिए सीमांकन किया जाए। प्रशासन ने पड़ताल की तो कब्जे की बात सही निकली। इसके बाद मछली परिवार समेत 20 लोगों को नोटिस दिए गए। इन्हें भी सीमांकन के दौरान मौजूद रहने को कहा गया था। हालांकि, मछली परिवार की तरफ से वकीलों ने अपना पक्ष भी रखा। कहा कि जमीन पर उनका कब्जा नहीं है।