भोपाल में शुरू की ओपन बुक लाइब्रेरी, अब सम्मानित होंगे विवेक रंजन

भोपाल में शुरू की ओपन बुक लाइब्रेरी, अब सम्मानित होंगे विवेक रंजन


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Bhopal News: इस ओपन डिब्बा लाइब्रेरी में आप अपनी एक किताब रखकर दूसरी कोई भी किताब पढ़ने के लिए लेकर जा सकते हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि यह लाइब्रेरी 24 घंटे खुली रहती है और सड़क से गुजरने वाला कोई भी व्यक्ति क…और पढ़ें

भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल (Bhopal Open Library) के रहने वाले साहित्यकार विवेक रंजन श्रीवास्तव को उनके बहुमूल्य साहित्यिक योगदान के लिए निर्मला साहित्य रत्न सम्मान से नवाजा जाएगा. विवेक ने भोपाल में ओपन बुक लाइब्रेरी की शुरुआत की है, जिसमें कोई भी व्यक्ति पढ़ने के लिए किताबें ले जा सकता है. शहर के ओल्ड मिनाल क्षेत्र में रहने वाले विवेक रंजन श्रीवास्तव ने अपने घर की बाउंड्री वॉल पर एक ओपन बुक डिब्बा लाइब्रेरी बनाई है. इसमें न तो कोई ताला है और न ही किसी लाइब्रेरियन की जरूरत. लोकल 18 से बात करते हुए विवेक रंजन श्रीवास्तव ने बताया कि निर्मला साहित्य रत्न सम्मान साहित्यिक योगदान के लिए कुछ चुनिंदा लोगों को दिया जाता है. उन्हें भी उन्हीं लोगों में शामिल किया गया है. इसके लिए उन्होंने किसी तरीके का नॉमिनेशन नहीं किया था लेकिन उनके रचनात्मक कार्य के लिए उन्हें इस सम्मान से नवाजा जा रहा है. हाल ही में आई उनकी नई किताबें ‘जलनाद’ और ‘काशी काबा दोनों पूरब में हैं’ के लिए उन्हें यह सम्मान दिया जा रहा है. जलनाद नाटक में उन्होंने पौराणिक प्रसंगों पर पानी की समस्या का जिक्र किया है.

उन्होंने कहा कि पानी की समस्या सदियों से मुख्य विषय बना रहा है. इसमें चाहें बाढ़ आने पर लोग पानी से पीड़ित होते हैं या फिर पानी की कमी के चलते प्यास से परेशान होते नजर आते हैं. पानी का महत्व हमारी संस्कृति में हमेशा से रहा है. पृथ्वी का उद्भव और विकास भी पानी से ही हुआ है. साथ ही प्रलय की कल्पना भी पानी से ही की गई है. हर धर्म में पानी का महत्व बताया गया है. इन्हीं सबको एकत्रित करते हुए उन्होंने करीब 12 अंश का नाटक लिखा है. ओपन बुक लाइब्रेरी के बारे में बात करते हुए विवेक रंजन ने कहा कि वह मिनल रेजिडेंसी किटिस कॉलोनी में रहते हैं. वहां भी यह लाइब्रेरी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. यदि रात को दो बजे भी किसी को नींद नहीं आती है, तो वह यहां आता है और अपनी पसंद की किताब निकालकर ले जाता है. हमारा परिवार भी साहित्यिक रहा है. उनके पिता द्वारा भी कई किताबें लिखी गई हैं.

अब तक लिख चुके कई किताबें
विवेक कहते हैं कि वह मूलतः व्यंग्य के लेखक हैं. उनके द्वारा कई किताबें लिखी गई हैं. जलनाद, काशी काबा दोनों पूरब में हैं, हिंदुस्तान हमारा, जादू शिक्षा का, खटर पटर, मध्य प्रदेश की पुरातात्विक संपदा, आक्रोश, लॉकडाउन, क्रांतिकारी भगत सिंह और मानस मंथन जैसी कई किताबें इस फेहरिस्त में शामिल हैं.

एक बुक रखो और दूसरी ले जाओ
इस ओपन डिब्बा लाइब्रेरी में आप अपनी एक किताब रखकर दूसरी अन्य कोई किताब पढ़ने के लिए लेकर जा सकते हैं. सबसे मजेदार बात यह है कि यह 24 घंटे खुली रहती है और सड़क से गुजरने वाला कोई भी व्यक्ति कभी भी यहां से किताब ले सकता है. इस पुस्तक मित्र लाइब्रेरी की शुरुआत लगभग 4000 रुपये मूल्य की किताबों से की गई है.

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