विदिशा में जैन धर्म के पर्वराज पर्यूषण पर्व का समापन सोमवार को क्षमावाणी महापर्व के रूप में हुआ। श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन छोटा मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
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शोभायात्रा में घोड़े, बग्घी और बैंड-बाजे के साथ आकर्षक झांकियां सजाई गईं। भगवान महावीर स्वामी की चांदी की पालकी को श्रद्धालु कंधों पर लेकर चले। यात्रा बजरिया, बड़ा बाजार और किरी मोहल्ला होते हुए माधवगंज तक पहुंची।
मार्ग में जैन और अन्य समाज के लोगों ने पालकी में विराजमान भगवान की आरती उतारी, श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा की। माधवगंज में धर्मसभा का आयोजन किया गया। यहां भगवान महावीर स्वामी का अभिषेक, शांतिधारा और पूजन हुआ।
धर्मसभा में वक्ताओं ने क्षमावाणी पर्व का महत्व समझाया। कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक-दूसरे से मन, वचन और काय से क्षमा मांगी। छोटों ने बड़ों के पैर छूकर क्षमा याचना की।
जैन समाज के प्रदीप जैन ने बताया कि क्षमावाणी पर्व आत्मशुद्धि और आपसी सौहार्द का पर्व है। उन्होंने कहा कि जीवन में क्षमा सबसे बड़ा धर्म है। जैन समाज के लोगों ने जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए सभी से क्षमा मांगी, ताकि किसी के मन में कोई कटुता न रहे।
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