एक बार की लागत फिर 12 साल तक फायदा
प्रीति कमल कोल्हे बताते हैं कि करीब आधा एकड़ खेत में 500 मोरिंगा के पौधे लगाए थे. अब उनमें भी फूल आने लगे हैं. ऐसे में उन्होंने खेती को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम किया. अब इनसे वह 12 साल तक लगातार मुनाफा कमाएंगे. कहा, सब्जियों की खेती पर किसानों को ध्यान देना चाहिए, जिससे खेती में विविधता भी आए और लाभ के ज्यादा मौके बनें. अनाज आसानी से मिल जाता है, लेकिन सब्जियों के लिए किसानों मेहनत करनी चाहिए. वह पूरी तरह से जैविक खेती की कोशिश कर रहे हैं.
मोरिंगा की खेती के लिए किसान भाइयों को ऐसी भूमि का चुनाव करना चाहिए, जिसमें जलभराव की स्थिति न बने. इसलिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी बेहतर है. इसमें भूमि का पीएच 6.5 से 7.5 होना चाहिए. वहीं, इसकी बुआई के लिए सितंबर का महीना बेहतर माना जाता है.
खेत की तैयारी भी जरूरी
खेत से खरपतवार को साफ कर लेना चाहिए, जिससे फसल को नुकसान हो. 2.5 x 2.5 मीटर की दूरी पर 45 x 45 x 45 सेमी के गड्ढे बनाएं. इनमें हर गड्ढे को ऊपर की मिट्टी के साथ 10 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाकर भर दें.
कृषि विशेषज्ञ ऊषा राठौर ने लोकल 18 को बताया, सब्जियों की खेती में सबसे ज्यादा ध्यान वाली बात ये है कि खेत में जलभराव की स्थिति न बने. अगर ऐसा होता है तो फसल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. वहीं, किसान भाई को ज्यादा नुकसान हो सकता है. जलभराव की स्थिति से रोग और कीट लगने की आशंका बढ़ जाती है. ऐसे में किसान भाईयों को जल निकास के लिए पहले ही व्यवस्था बनानी चाहिए.
हर साल होगा तगड़ा उत्पादन
मोरिंगा यानी सहजन से ज्यादा उत्पादन के लिए कई बातों का ध्यान रखना चाहिए. मोरिंगा साल में दो बार उत्पादन दे सकते हैं. बेहतर स्थिति में एक पेड़ से करीब 50 किलो ग्राम तक उत्पादन हो सकता है, यानी एक एकड़ से 20 टन तक उत्पादन हो सकता है.
इसके साथ करें ये खेती
मोरिंगा की खेती के साथ उसी खेत में अदरक, मूसली, हल्दी सहित कई फसलों की खेती कर सकते हैं.