क्‍या है एफ्रो-एशियन कप? जिसे कराने की वकालत कर रहे अश्विन? BCCI को दिया सुझाव

क्‍या है एफ्रो-एशियन कप? जिसे कराने की वकालत कर रहे अश्विन? BCCI को दिया सुझाव


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Asia Cup 2025: रविचंद्रन अश्विन ने एशिया कप में कंपटीशन की कमी पर सवाल उठाए. उन्‍होंने साफ किया कि दक्षिण अफ्रीका को इस टूर्नामेंट में जोड़ा जाए और एफ्रो-‍एशियन कप का आयोजन किया जाए. अश्विन चाहते हैं कि अगर ऐसा…और पढ़ें

क्‍या है एफ्रो-एशियन कप? जिसे कराने की वकालत कर रहे अश्विन? BCCI को दिया सुझावअश्विन ने एशिया कप पर सवाल उठाए. (File Photo)
पूर्व भारतीय ऑफ-स्पिनर रविचंद्रन अश्विन अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं. आज भारतीय टीम एशिया कप में यूएई के खिलाफ मुकाबले के साथ अपने अभियान की शुरुआत करने जा रही है. ऐसे में अश्विन का ताजा बयान क्रिकेट जगत में हलचल पैदा करने वाला है. उन्होंने साफ कहा है कि मौजूदा टूर्नामेंट में कंपटीशन की कमी उन्हें झकझोर रही है. अश्विन का सुझाव है कि एशिया कप में दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमों को शामिल करके इसे “एफ्रो-एशियन कप” बनाया जाए, ताकि मैचों में थोड़ी दमदार टक्कर बने.

‘इंडिया ए को एशिया कप में भेजो’
अश्विनी यहीं नहीं रुके. उन्‍होंने एक कदम और आगे जाते हुए यह तक कह दिया कि अगर एफ्रो-एशियन कप कराना संभव नहीं है तो भारत को अपनी “ए” टीम को इस टूर्नामेंट में खेलने के लिए भेजना चाहिए, ताकि मुकाबला टक्‍कर का हो और कंपटीशन देखने को मिले. अश्विन ने बांग्‍लादेश को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि हमने बांग्लादेश के बारे में बात तक नहीं की है. क्योंकि उनके साथ बात करने के लिए कुछ है ही नहीं. ये टीमें भारत से मुकाबला कैसे करेंगी?

‘हमें उलटफेर देखना है’
रविचंद्रन अश्विन यहीं नहीं रुके. उन्होंने एक उलटफेर भरी जीत की भी उम्मीद जताई, ताकि एशिया कप में कुछ हद तक अपप्रिडिक्‍टेबिल्‍टी वापस आ सके. अश्विन का यह बयान सिर्फ आलोचना नहीं, बल्कि एक आह्वान है जिसमें क्रिकेट को एकतरफा मैचों से निकाल, कड़ी टक्‍क्‍र को फिर से जगाने की बात है. उन्होंने स्पष्ट किया है, अगर एशिया कप को वास्तव में चुनौतीपूर्ण बनाना है, तो चुनौतीपूर्ण टीमों को मैदान में लाना ही पड़ेगा.

वैश्विक प्रतियोगिता होनी चाहिए
अश्विन का कहना है कि भारत जैसे बुलंद कद वाली टीम में हार का डर जिंदा रखने के लिए और टीमों को आत्मविश्वास के साथ खेलना होगा. इस बयान में अश्विन की सोच साफ दिखती है कि क्रिकेट सिर्फ भारतीय या एशियाई टीमों के बीच नहीं रहना चाहिए बल्कि वैश्विक प्रतियोगितात्मकता की राह पर चलना चाहिए. वे चाहते हैं कि टूर्नामेंट में रोमांच और प्रतिस्पर्धा हो, न कि पूर्व-निर्धारित विजय की उड़ान हो.

Sandeep Gupta

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और… और पढ़ें

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