प्रोफेसर पत्नी को संदेह था…डॉक्टर पति के हैं अवैध संबंध: पहले नींद की गोली दी, फिर करंट लगाकर मार डाला, कोर्ट में दी हैरतअंगेज दलीलें – Madhya Pradesh News

प्रोफेसर पत्नी को संदेह था…डॉक्टर पति के हैं अवैध संबंध:  पहले नींद की गोली दी, फिर करंट लगाकर मार डाला, कोर्ट में दी हैरतअंगेज दलीलें – Madhya Pradesh News


मध्यप्रदेश क्राइम फाइल्स के पार्ट 1 में आपने पढ़ा कि घर में 65 साल के डॉ. नीरज पाठक की लाश मिलती है। पीएम रिपोर्ट में खुलासा होता है कि करंट के झटके देकर उनकी हत्या की गई है। पुलिस को उनकी बुजुर्ग पत्नी पर संदेह था लेकिन कोई पुख्ता सबूत नहीं थे। हत्या

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आखिर कौन था डॉक्टर का कातिल? क्या किसी साजिश के तहत उनकी हत्या की गई?

पढ़िए इस रिपोर्ट में…

29 अप्रैल 2021 को हुई डॉ. नीरज पाठक की रहस्यमयी मौत अब हत्या का मुकदमा बन चुकी थी। जिला एवं सत्र न्यायालय नरसिंहपुर में इसकी सुनवाई शुरू हुई। कटघरे में थीं 65 साल के डॉ. नीरज की 63 वर्षीय पत्नी ममता पाठक। एक सम्मानित कॉलेज प्रोफेसर, समाज में पढ़ी-लिखी महिला की पहचान रखने वाली ममता अब हत्या के आरोप में न्यायालय के सामने थी। कोर्टरूम भरा हुआ था। हर कोई जानना चाहता था कि क्या एक पत्नी वाकई अपने पति की हत्यारिन हो सकती है?

जिला न्यायालय नरसिंहपुर के बाद जबलपुर हाईकोर्ट में भी इस मामले की सुनवाई हुई। ममता पाठक ने कोर्ट के सामने सुनवाई के दौरान कई हैरतअंगेज दलीलें दीं।

ओपन एंड शट केस की तरह ले रही थी पुलिस

सरकारी वकील ने मुकदमे को ‘ओपन एंड शट केस’ की तरह पेश करने की रणनीति बनाई। उनके पास

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट थी, जिसमें साफ लिखा था- करंट से दी गई चोटों से मौत हुईं और यह हत्या है। – घटनास्थल से बरामद बिजली का तार और उपकरण भी पुलिस के पास थे।

पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने भी गवाही में पति-पत्नी के झगड़ों का जिक्र किया था। ममता के बयान भी अहम थे, जिनमें वह बार-बार अपना स्टैंड बदल रही थी।

गवाह और सबूतों का इशारा- पत्नी ही है कातिल

मुकदमे के दौरान एक-एक करके 18 से ज्यादा गवाह अदालत में पेश हुए।

कई पड़ोसियों ने कहा – “हमने कई बार डॉ. नीरज और ममता के बीच झगड़े होते सुने हैं। अक्सर घर से चीखने-चिल्लाने की आवाजें आती थीं।”

डॉ. नीरज के परिवार वालों ने अदालत में बयान दिया – “दोनों के रिश्ते लंबे समय से खराब थे। ममता अक्सर पति पर गुस्सा करती और विवाद करती। कई बार नीरज भाई ने खुद यह बात हमें बताई थी।”

पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा- “यह मौत दुर्घटनावश नहीं थी। करंट लगाने की प्रकृति से साफ है कि तार को जबरन शरीर से संपर्क कराया गया। यह होमिसाइडल डेथ है।”

घटनास्थल की तस्वीरों से क्रूरता उजागर

अदालत के सामने जब घटनास्थल की तस्वीरें रखी गईं तो वारदात की क्रूरता उजागर हो गई। तस्वीरों में तार, रॉड और बिजली उपकरण साफ दिखाई दे रहे थे। नीरज पाठक के हाथों और शरीर पर गहरे जख्मों के निशान थे।

फोरेंसिक रिपोर्ट में कहा गया कि इन निशानों की प्रकृति ‘फोर्स फुल इलेक्ट्रिक कॉन्टैक्ट’ को दर्शाती है। इससे अभियोजन पक्ष की दलील और मजबूत हो गई।

चौकीदार बोला- घटना के पहले रहने आई मैडम

चौकीदारी धनीराम ने बताया कि वो डॉ.नीरज पाठक के घर पर पिछले 10-12 साल से चौकीदारी का काम करता है। डॉ.पाठक लोकनाथपुरम वाले मकान में रहते थे और पाठक की पत्नी ममता पैप्टक कॉलोनी वाले मकान में रहती थीं और घटना के समय डॉक्टर साहब की पत्नी ममता लोकनाथपुरम वाले मकान में साथ रह रही थीं। घटना के 10 महीने पहले ही वो डॉक्टर साहब के साथ रहने आई थीं।

साहब से कहती थीं मैडम- तुम्हारे दूसरी महिला से संबंध हैं

डॉ.पाठक के घर में खाना बनाने का काम करने वाली माया गुप्ता ने बताया कि उसने डॉ.पाठक के लोकनाथपुरम वाले मकान में 5-6 साल खाना बनाने का काम किया। घटना के कुछ समय पहले उसने काम बंद कर दिया था, क्योंकि उसका पैर टूट गया था।

उसने बताया कि जब वह खाना बनाने आती थी तो साहब और उनकी पत्नी के बीच बहसबाजी सुनी है। उनका झगड़ा चलता रहता था। साहब अच्छे स्वभाव के थे और मैडम शंकालु स्वभाव की थीं।

मैडम डॉक्टर साहब से इंग्लिश में बहस करती थीं

बताया जाता है कि ममता को लगता था कि दूसरी महिला से चक्कर के कारण रात के समय पति उसे नींद का इंजेक्शन देकर सुला देते हैं, जबकि डॉक्टर का तर्क था कि पत्नी की तबीयत खराब रहने से उसे नींद नहीं आती इसलिए इंजेक्शन देकर सुलाया जाता है। घर में काम करने वालों ने बताया कि मैडम जब साहब से बहस करती थीं तब इंग्लिश में बात करती थीं ताकि घर में काम करने वालों को समझ में न आए, लेकिन बीच-बीच में हिंदी बोलती थीं। हाव-भाव से भी पता चलता था।

विवाद के चलते बीते कई सालों में ममता पाठक ने संबंधित थाना, छतरपुर एसपी, सागर आईजी, भोपाल में डीजीपी तक से शिकायत करते हुए डॉ. नीरज पाठक पर अन्य महिला से संबंध रखने का मामला दर्ज कर कार्रवाई करने की शिकायत की, लेकिन जांच के दौरान मामला बेबुनियाद पाया गया था।

डॉ.पाठक ने फोन कर कहा- पत्नी प्रताड़ित कर रही

डॉ.नीरज पाठक के मौसाजी छन्दीलाल बाजपेई ने कहा कि 29 अप्रैल 2021 को नीरज ने फोन किया था। वो कह रहा था कि पत्नी ममता प्रताड़ित कर रही है। बाथरूम में बंद कर दिया है। दो-तीन दिन से खाना-पीना नहीं दिया है। बाथरूम में बंद करके धक्का दिया तो सिर में चोट लग गई। अलमारी तोड़कर उसमें रखा कैश, एटीएम, गाड़ी की चाबी, अन्य सामान एफडी सहित अन्य चीजें ममता ने अपने पास रख ली है।

वो कह रहे थे कि किसी प्रकार पुलिस को सूचना देकर बंधन से मुक्त कराओ।

पुलिस वालों ने डॉक्टर पाठक को बाहर निकाला था। पुलिस ने डॉक्टर साहब की फोटो डाली थी, जिसमें डॉ.पाठक के सिर पर पट्‌टी बंधी दिखाई दी। 29 अप्रैल की शाम को उन्होंने डॉ.पाठक को फोन किया था, लेकिन कोई रिप्लाई नहीं दिया।

पहले नींद की गोली, फिर करंट से मौत

जांच अधिकारी टीआई जगतपाल सिंह ने अदालत में खुलासा किया कि आरोपी ममता पाठक ने पूछताछ के दौरान चौंकाने वाला बयान दिया था। उसने माना कि पति डॉ. नीरज पाठक से उसका लगातार झगड़ा हो रहा था। एक रात विवाद इतना बढ़ा कि उसने ठान लिया कि अब इस रिश्ते को हमेशा के लिए खत्म करना है।

घटना वाले दिन पत्नी ममता ने पति को नींद की चार गोलियां खिला दीं। इन गोलियों का असर कुछ ही घंटों में दिखा। डॉ.पाठक गहरी नींद में चले गए। तीन–चार घंटे बाद, जब पति पूरी तरह बेसुध हो चुके थे, ममता ने योजना का दूसरा चरण शुरू किया।

हत्या के बाद सबूत छिपाने की कोशिश

  • इस्तेमाल हुआ तार उसने ड्रेसिंग टेबल की दराज में छिपा दिया।
  • गोलियों का खाली पत्ता किचन में फेंक दिया। जब पुलिस ने किचन से वह पत्ता बरामद किया तो उसमें 6 गोलियां बाकी थीं और 4 खाली जगह दिख रही थी।

CCTV फुटेज न मिले इसलिए कैमरे बंद

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि घटना की असली कहानी सीसीटीवी फुटेज में कैद हो सकती थी। डॉ.पाठक के घर में दो DVR लगे थे। एक ऊपर की मंजिल (जहां उनकी मौत हुई) और दूसरा नीचे की मंजिल पर। जब पुलिस ने DVR चेक किया तो पाया कि ऊपर वाले DVR का वायर कटा हुआ था।

यानी हत्या के समय ऊपर के कैमरे बंद थे, कोई रिकॉर्डिंग नहीं हुई। नीचे की मंजिल की फुटेज सामान्य मिली, लेकिन उसमें सिर्फ रोजमर्रा की गतिविधियां ही नजर आईं।

वारदात के वक्त घर में कौन था?

घटना की रात घर में सिर्फ तीन लोग मौजूद थे। डॉ. नीरज पाठक। उनकी पत्नी ममता पाठक और बड़ा बेटा नीतीश, जो मानसिक और शारीरिक रूप से अस्वस्थ था। छोटा बेटा मानस उस समय विदेश में था। इस तरह पूरी तरह सक्षम और सचेत सिर्फ एक ही व्यक्ति मौजूद था- पत्नी ममता।

पत्नी ममता ने खुद को बताया बेकसूर

आरोपों से घिरी ममता पाठक ने अदालत में खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया। उसका कहना था कि-

“मेरे पति की मौत एक दुर्घटना थी। मुझे झूठा फंसाया जा रहा है। पुलिस ने गलत निष्कर्ष निकाला और मुझे कातिल बना दिया।”

बिस्तर और बिजली की दलील

अपनी सफाई में ममता ने अदालत को एक तकनीकी तर्क भी दिया। उसने कहा कि जिस कमरे में डॉक्टर नीरज थे, वहां बिजली से झटका लगना संभव ही नहीं था। डॉक्टर लकड़ी के बिस्तर पर गद्दे और चादर के साथ लेटे थे, पैरों के नीचे प्लास्टिक की कुर्सी थी।

ऐसी स्थिति में शरीर को अर्थिंग नहीं मिलती, इसलिए करंट से मौत होना असंभव था।

उसने पीएम रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि डॉ. मुकुल साहू द्वारा बताए गए “विद्युत धारा के निकास घाव” की थ्योरी गलत है।

ममता ने कहा-

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बिजली का झटका लगने का कोई कारण ही नहीं था। घर में MCB और RCCB लगे थे, जो करंट लीक होते ही सेकेंड के एक हिस्से में ट्रिप कर जाते हैं। फिर करंट लगने से पति की मौत कैसे हो सकती है?

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लास्ट सीन थ्योरी पर सवाल

अभियोजन पक्ष की ‘लास्ट सीन’ थ्योरी को भी ममता ने खारिज किया। उसने कहा कि शादी 11 मई 1984 को हुई थी। पति-पत्नी एक ही घर में रहते थे, लेकिन घटना के दौरान वे अलग-अलग मंजिलों पर थे। पति नीरज पाठक कोरोना जैसे लक्षणों के कारण पहली मंजिल पर अलग रह रहे थे। वह खुद बेटे के साथ ग्राउंड फ्लोर पर रह रही थी।

पहली मंजिल क्लिनिक से जुड़ी थी, जहां रोजाना 7–8 लोग (लैब कर्मी, मेडिकल स्टोर कर्मचारी, पेशेंट) आते-जाते थे।

उसने कहा कि 30 अप्रैल 2021 की रात करीब 9:30 बजे मेरी पति से बात हुई थी। उसके बाद लगभग 10 घंटे तक हम दोनों के बीच कोई मुलाकात नहीं हुई। ऐसे में ‘लास्ट सीन’ का सिद्धांत मुझ पर लागू ही नहीं होता।

नीरज पाठक की हत्या के मामले में लास्ट सीन थ्योरी अहम साबित हुई।

नीरज पाठक की हत्या के मामले में लास्ट सीन थ्योरी अहम साबित हुई।

ममता ने कहा- हत्या नहीं, मौत प्राकृतिक थी

ममता ने अदालत में दावा किया कि पति की मौत हत्या से नहीं, बल्कि प्राकृतिक कारणों से हुई। उसने कहा कि- नीरज पाठक की उम्र 65 साल थी। वे उच्च रक्तचाप के मरीज थे और कोरोनरी आर्टरी डिजीज से पीड़ित थे।

अप्रैल 2021 में जब कोरोना की दूसरी लहर चरम पर थी, पति कोविड के लक्षणों से परेशान थे और होम आइसोलेशन में थे। उनकी मौत उम्र और धमनियों के संकुचित होने (Coronary Artery Calcification) की वजह से हुई।

उसने यह भी आरोप लगाया कि-

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अटॉप्सी सर्जन ने कोरोनरी धमनियों को खोला ही नहीं और न ही रक्त वाहिकाओं की सही स्थिति दर्ज की। यही वजह है कि वास्तविक कारण सामने नहीं आया।

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अभियोजन लास्ट सीन थ्योरी पर अड़ा रहा

पूरे ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष बार-बार यही दोहराता रहा कि घटना घर के भीतर हुई। उस समय घर में केवल ममता मौजूद थी।

शव पर मिले करंट के निशान दुर्घटना नहीं, बल्कि हत्या की ओर इशारा करते हैं। यानी “लास्ट सीन थ्योरी” पूरी तरह से ममता पर लागू हो रही थी।

अदालत की टिप्पणी और फैसला

फैसला सुनाने से पहले अदालत ने अपने आदेश में लिखा- मृत्यु प्राकृतिक या आकस्मिक नहीं है। पोस्टमॉर्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट हत्या की पुष्टि करती हैं। आरोपी ममता पाठक घटनास्थल पर मौजूद थी और वही इस मौत की जिम्मेदार है।

जज ने कहा कि यदि आरोपी निर्दोष होती तो घटना के तुरंत बाद मदद के लिए चीखती, पुलिस को कॉल करती, लेकिन उसके व्यवहार ने संदेह को और गहरा कर दिया।

आखिरकार 29 जून 2022 को जिला न्यायालय नरसिंहपुर ने अपना फैसला सुनाया। ममता पाठक को IPC की धारा 302 (हत्या) में दोषी ठहराया गया। आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई। कोर्ट का आदेश सुनते ही कोर्टरूम में सन्नाटा छा गया। एक पढ़ी-लिखी महिला, जिसने अपना जीवन शिक्षा जगत में बिताया था, अब जेल की सलाखों के पीछे अपनी बाकी जिंदगी गुजारने को मजबूर थी।



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