आचार्य विष्णु दत्त दुबे के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ धार्मिक अनुष्ठान।
निवाड़ी जिले के कंचना घाट पर पितृपक्ष के अवसर पर धार्मिक आयोजन चल रहा है। प्रतिदिन सुबह श्रद्धालु शास्त्रोक्त विधि-विधान से अपने पूर्वजों को जल अर्पण कर पुण्य लाभ ले रहे हैं। श्रद्धालु रोज सुबह 6 बजे से पूर्वजों को जल अर्पण करने पहुंच रहे हैं। आचार्य
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7 सितंबर से शुरू हुआ पितृपक्ष 21 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान श्रद्धालु अपने पूर्वजों को जल अर्पित कर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। आचार्य दुबे के अनुसार यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि कृतज्ञता का पर्व है।
कंचना घाट पर पितृपक्ष में जल अर्पण करते श्रद्धालु।
20 सितंबर को होगा पिंडदान और हवन
पितृपक्ष अश्विनी कृष्ण पक्ष की पूर्णिमा से प्रारंभ होकर अमावस्या तक चलता है। श्रद्धा और भाव से किया गया जल अर्पण ही पूर्वजों को शांति और परिवार को पुण्य प्रदान करता है। 20 सितंबर को अश्विनी कृष्ण चतुर्दशी पर तर्पण, पिंडदान और हवन होगा। 21 सितंबर अमावस्या को विसर्जन के साथ पितृपक्ष समाप्त होगा।
शास्त्रों के अनुसार इस अवधि में पितृलोक के द्वार खुलते हैं। पूर्वजों की आत्माएं पृथ्वी पर आकर अपने वंशजों से तर्पण और श्राद्ध ग्रहण करती हैं। इसलिए इसे धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ कृतज्ञता और सम्मान का पर्व माना जाता है।