मानवता की सेवा और चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा देने वाली एक प्रेरक पहल सामने आई है। टीकमगढ़ निवासी आशुतोष अवस्थी ने शुक्रवार को अपने पिता स्व. हरि विष्णु अवस्थी का पार्थिव शरीर दतिया मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग को दान कर समाज में एक उदाहरण पेश किया ह
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मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. दीपक सिंह मरावी ने अवस्थी परिवार के इस कदम को समाज के लिए प्रेरणा बताते हुए कहा, देहदान सबसे बड़ा दान है। इससे चिकित्सा शिक्षा को मजबूती मिलती है और मानवता की सेवा का संदेश मिलता है। अवस्थी परिवार का यह निर्णय कई अन्य परिवारों को भी इस दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करेगा।
एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. समीर साठे ने बताया कि मृत देह से चिकित्सा छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान मिलेगा, जिससे उन्हें शरीर की जटिल संरचना को समझने में सहायता होगी। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद भी जीवन सार्थक बन सकता है, यही संदेश अवस्थी परिवार ने दिया है।
मेडिकल कॉलेज में पार्थिव शरीर को दान किए जाने से पहले कॉलेज के सभी चिकित्सकों, छात्रों, कर्मचारियों और परिवारजन ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। दो मिनट का मौन धारण कर ईश्वर से आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। इसके साथ ही स्व. हरि विष्णु अवस्थी को गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित भी किया गया।