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एमपी का जबलपुर भारत देश का दूसरा सबसे स्वच्छ वायु वाला शहर बन गया है. इस शहर का डंका भारत देश में बज रहा है. वहीं, स्वच्छ वायु सर्वे में इंदौर ने पहली बाजी मारी है और आगरा तीसरे स्थान पर रहा।
दरअसल, मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतर्गत देश भर के 171 शहरों में स्वच्छ वायु का सर्वेक्षण कराया गया था. जहां जबलपुर शहर ने देशभर में दूसरा स्थान हासिल किया है. जबकि इंदौर पहले नंबर पर रहा. स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2025 के लिए 10 लाख से अधिक आबादी वाली शहरों में जबलपुर को 200 अंकों में से 199 अंक मिले. इतना ही नहीं एक करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि भी दी गई हैं. जिसके चलते अब देश भर में शुद्ध हवा के मामले में जबलपुर शहर ने परचम लहरा दिया है.
जबलपुर शहर में डुमना नेचर पार्क और मदन महल की पहाड़ियों में अर्बन फॉरेस्ट मौजूद है, जो जबलपुर शहर की वायु को स्वच्छ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इतना ही नहीं शहर की वायु काफी हद तक इन फॉरेस्ट के कारण स्वच्छ रहती है. दूसरी तरफ नगर निगम और जिला प्रशासन ने मिलकर पराली जलाने और तंदूर पर सख्ती से रोक लगाई हुई है. जिसके कारण शहर की वायु गुणवत्ता देश भर में परचम लहरा रही है. खास बात यह भी है कि जबलपुर शहर को स्वच्छता में देश में 5वां स्थान मिलने के साथ ही 7 स्टार रैंकिंग भी मिली है. जहां संस्कारधानी को वाटर प्लस और गार्बेज फ्री सिटी का भी गौरव मिला हुआ है.
पिछले 4 सालों में कैसी रही जबलपुर की रैंकिंग
2022 में जबलपुर की वायु गुणवत्ता रैंकिंग 22 में पायदान पर 2023 में नौ अंकों की उछाल लगाकर 13वीं रैंकिंग 2024 में देश भर में दूसरा स्थान और 2025 में भी देशभर में दूसरा स्थान संस्कारधानी ने हासिल कर जबलपुर का नाम काबिज रखा हुआ है. वहीं, अब देश भर में प्राकृतिक नजरिए से जबलपुर शहर रहने के मामले में और स्वच्छ वायु में लोगों की पहली पसंद बन गया है. जहां किसी भी प्रकार का वायु प्रदूषण नहीं है.
देशभर में स्वच्छ वायु के मामले में दूसरा स्थान मिलने के बाद नगर निगम जबलपुर परिसर ढोल बाजे की धुन में गूंज उठा. इतना ही नहीं जबलपुर के रहवासियों ने भी मिलकर जश्न मनाया. नगर निगम कमिश्नर प्रीति यादव और महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू के मुताबिक, यह टीम वर्क और जबलपुर के लोगों के सहयोग का ही नतीजा है कि देशभर में एक बार फिर जबलपुर शहर ने परचम लहराया है. गौरतलब है शहर का साल भर औसतन वायु गुणवत्ता सूचकांक 90 के नजदीक बना रहता है. जो हमेशा संतोषजनक रहता है. इतना ही नहीं जबलपुर शहर ने हरियाली की चुनरी ओढ़ ली है, जिसका श्रेय संस्कारधानी वासियों को जाता है.
एक नंबर से चूका जबलपुर
संस्कारधानी जबलपुर को 200 में से 199 अंक मिले, जहां एक नंबर से जबलपुर शहर चूक गया. जिसके पीछे के कुछ कारण है, जहां मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा फ्लाईओवर वायु सर्वेक्षण के दौरान निर्माणाधीन था. इसके अलावा सीवर लाइन और पेयजल लाइन के चलते शहर 1 नंबर से चूक गया.
किन कामों ने दिलाया देशभर में दूसरा स्थान
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में दूसरा स्थान देश भर में मिलने का कारण रहा है कि जबलपुर शहर के केंद्र में स्थित 2 हजार एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ डुमना नेचर रिजर्व पार्क को विकसित किया गया. इतना ही नहीं शहर के प्रमुख स्थानों पर एयर क्वालिटी की मॉनिटरिंग के लिए डिस्प्ले स्टेशन स्थापित किए गए. जिससे लगातार आंकड़े मिलते गए. एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत जबलपुर शहर में लगभग 13 लाख पौधों को भी रोपने का काम किया गया. शहर के 25 स्थान पर नए उद्यान को बनाने का भी बीड़ा उठाया गया. सड़कों के किनारे खाली स्थान को ग्रीन कॉरिडोर घोषित करने के साथ ही तेजी से पौधारोपण किया गया. मां नर्मदा के गौरीघाट समेत सभी तट का स्वच्छ होना. जिसके चलते देशभर में जबलपुर शहर में परचम लहराया.