कृषि के लिए वरदान बना अमृत जल, घर पर कैसे बनाएं? जानिए यहां

कृषि के लिए वरदान बना अमृत जल, घर पर कैसे बनाएं? जानिए यहां


Khandwa News: आज के समय में जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में किसान बड़ी तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं. इसी कड़ी में एक प्राकृतिक और उपयोगी उपाय के तौर पर अमृत जल (Amrit Jal) को अपनाया जा रहा है. यह विशेष प्रकार का ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर और कीटनाशक है, जो पौधों की वृद्धि को बढ़ावा देता है, मिट्टी की सेहत को सुधारता है और फसलों की पैदावार बढ़ाने में मदद करता है. अब किसान अपने घर पर ही अमृत जल आसानी से बना सकते हैं और इससे सब्जियों, फलों, फूलों और जड़ी-बूटियों को भरपूर फायदा पहुंचा सकते हैं.

अमृत जल क्या होता है?
अमृत जल एक जैविक तरल खाद है, जिसे मुख्य रूप से गोबर, गौमूत्र, गुड़ और पानी को किण्वित (Fermentation) करके तैयार किया जाता है. फर्मेंटेशन प्रोसेस से इन सामग्रियों में मौजूद पोषक तत्व टूटकर पौधों के लिए उपयोगी रूप में परिवर्तित हो जाते हैं. यह पूरी तरह प्राकृतिक है और इसमें कोई केमिकल तत्व नहीं होता है. इसलिए इसे इस्तेमाल करने से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है. फसल को रसायनों से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है और पौधों की प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है.

अमृत जल बनाने की सामग्री
ताजा गोबर- 1 किलो
गोमूत्र- 1 लीटर
देशी गुड़- 50 ग्राम
साफ पानी- 10 लीटर
मिट्टी (पेड़ के नीचे की)- 1 किलो
बड़ा मटका या कंटेनर

अमृत जल बनाने की विधि

Step 1: सबसे पहले ताजा गोबर को गोमूत्र में अच्छी तरह मिलाएं. गोबर और गोमूत्र के यह मिश्रण जैविक पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो अमृत जल के आधार बनते हैं.
Step 2: उसके बाद गुड़ को थोड़े से पानी में घोल बनाकर अच्छी तरह मिलाएं. गुड़ में प्राकृतिक शर्करा और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो किण्वन प्रक्रिया को सक्रिय करते हैं.
Step 3: फिर गोबर, गौमूत्र और गुड़ के घोल को 10 लीटर पानी में मिला दें.
Step 4: अब इस मिश्रण में 1 किलो मिट्टी मिलाएं. मिट्टी में मौजूद माइक्रोब्स किण्वन प्रक्रिया को संतुलित बनाए रखने में मदद करते हैं. मिश्रण को लकड़ी की सहायता से अच्छी तरह घुमाएं. इसे 12 बार उल्टा-सीधा हिलाना जरूरी है ताकि सभी सामग्री अच्छी तरह से मिल जाएं.
Step 5: इस मिश्रण को तीन दिनों तक छांव में रखें. इन तीन दिनों में सुबह, दोपहर और शाम तीनों समय में 12-12 बार मिश्रण को हिलाते रहें. इससे किण्वन प्रक्रिया बेहतर तरीके से पूरी होती है.
Step 6: चौथे दिन इस तैयार घोल को 100 लीटर पानी में मिला दें. इस तरह आपका अमृत जल तैयार हो जाएगा.

अमृत जल लगाने का तरीका और लाभ
तैयार अमृत जल को आप अपने सब्जियों, फलों और फूलों के पौधों में छिड़क सकते हैं. इसकी मात्रा लगभग 2 से 3 लीटर प्रति पौधा होती है. इसे नियमित रूप से हर 15 दिन में लगाने से पौधों की वृद्धि अच्छी होती है, फूल जल्दी आते हैं और फल ज्यादा मीठे और बड़े बनते हैं. इसके साथ ही मिट्टी की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहती है.
अमृत जल लगाने से कीट प्रबंधन भी प्राकृतिक तरीके से होता है, जिससे कीटनाशकों की जरूरत कम हो जाती है. इसके अलावा, यह मिट्टी में जैव विविधता को बनाए रखने में मदद करता है.

निष्कर्ष
अब किसान अपने खेत में महंगे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बजाय घर पर ही अमृत जल बना सकते हैं. यह तरीका बेहद आसान, सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल है. ताजा गोबर, गौमूत्र, गुड़ और मिट्टी से बनने वाला अमृत जल पौधों को न केवल प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराता है, बल्कि मिट्टी की सेहत को भी सुधारता है. इसलिए, आज ही अमृत जल बनाना शुरू करें और अपने खेत के साथ-साथ बगिया को फसल से भरपूर बनाएं. इससे आपके पौधे भी स्वस्थ रहेंगे और आपके स्वास्थ्य को भी फायदा मिलेगा.



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