खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे, हाथ नहीं मिलाया तो मांजरेकर को बनाया मुद्दा

खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे,  हाथ नहीं मिलाया तो मांजरेकर को बनाया मुद्दा


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भेजा गया संदेश यह था कि पाकिस्तान प्रेजेंटेशन में शामिल नहीं होगा क्योंकि इसका संचालन एक भारतीय संजय मांजरेकर कर रहे थे. ज़ाहिर है कि उन्हें यह बात रास नहीं आई, इसलिए उन्होंने इसमें शामिल न होने का फ़ैसला किया. हालाँकि, शाहीन शाह अफ़रीदी अपना पुरस्कार लेने ज़रूर आए, जो एक बार फिर दोहरे मानदंडों को दर्शाता है. और फिर, मैच के बाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस में, हाथ मिलाने की यह कहानी उछाली गई.

पाकिस्तान से भारतीय खिलाड़ियों ने हाथ नहीं मिलाया तो मांजरेकर को बना दिया मुद्दा
नई दिल्ली. भारत से मिला करारी शिकस्त के बाद  पाक टीम की हालत किसी रोते हुए बच्चे की तरह हो गई है  पाकिस्तान ने सलमान अली आगा को प्रेजेंटेशन में भेजने से साफ़ इनकार कर दिया क्योंकि भारतीय खिलाड़ियों ने मैच के बाद हाथ मिलाने से इनकार कर दिया था. इस समय यही कहानी फैलाई जा रही है जानकार लोगों से पूछिए, तो आपको पता चलेगा कि ऐसा नहीं था बल्कि, जो संदेश दिया गया वह बिल्कुल अलग था.

भेजा गया संदेश यह था कि पाकिस्तान प्रेजेंटेशन में शामिल नहीं होगा क्योंकि इसका संचालन एक भारतीय संजय मांजरेकर कर रहे थे. ज़ाहिर है कि उन्हें यह बात रास नहीं आई, इसलिए उन्होंने इसमें शामिल न होने का फ़ैसला किया. हालाँकि, शाहीन शाह अफ़रीदी अपना पुरस्कार लेने ज़रूर आए, जो एक बार फिर दोहरे मानदंडों को दर्शाता है. और फिर, मैच के बाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस में, हाथ मिलाने की यह कहानी उछाली गई.

मांजरेकर थे मुद्दा

सच तो यह है कि पाकिस्तान बुरी तरह हार गया है.उसे यह बात पच नहीं रही कि उसे करारी हार मिली है. अब उसे ध्यान भटकाने, कहानी बदलने और रोते रहने के लिए कुछ चाहिए. हाथ मिलाने की यह कहानी इसी पर आधारित है. खेल में हमेशा से ही विरोध के मज़बूत और शांतिपूर्ण बयानों की इजाज़त रही है, और भारत ने हर कदम पर पाकिस्तान को मात दी है. शिकायत करके पाकिस्तान केवल अपने आप को रोने वाला बच्चा बता रहा है.2004 में, जब वीरेंद्र सहवाग मुल्तान में पाकिस्तान के खिलाफ तिहरा शतक जड़ने की ओर बढ़ रहे थे, तो शोएब अख्तर लगातार उनसे बाउंसर खेलेने की अपील कर रहे थे. आखिरकार, सहवाग ने शोएब को बुलाया और कहा, “गेंद डाल रहा है कि भीख माँग रहा है?” यह बात क्रिकेट के इतिहास में दर्ज है और खिलाड़ियों द्वारा कई बार दोहराई गई है सच तो यह है कि पाकिस्तान भी यही कर रहा है.

हाथ मिलाना है तो गला मत पकड़ो

अगर भारतीय खिलाड़ी हाथ नहीं मिलाना चाहते और आगे बढ़ना चाहते हैं, तो यह उनका अधिकार है. उनसे हाथ मिलाने की भीख माँगने और बड़े बच्चों की तरह व्यवहार करने का क्या मतलब है? और यह सब तब जब आप प्रेजेंटेशन में शामिल नहीं हुए थे, यह कहते हुए कि यह एक भारतीय द्वारा संचालित किया जा रहा है? बस एक साधारण सा सुझाव यह सब भूल जाओ, और अपना खेल सुधारने की कोशिश करो अगले रविवार को एक और मैच होना है और अगर पाकिस्तान ने अपने खेल में आमूल-चूल सुधार नहीं किया, तो उसे और भी शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ेगा. और हां, भारत भी तब हाथ नहीं मिलाएगा, क्योंकि यह उनकी पसंद है.

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