घर के लोग लगाते हैं डांट, दादा हरिराम लगाते हैं चाट, 35 हजार पेंशन के बाद भी नहीं रूके हाथ!

घर के लोग लगाते हैं डांट, दादा हरिराम लगाते हैं चाट, 35 हजार पेंशन के बाद भी नहीं रूके हाथ!


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Jabalpur Street Food: हुनर की कोई उम्र नहीं…इस बात को साबित कर दिखाया है जबलपुर के दादा हरिराम ने. 66 साल की उम्र में वह अपना चाट का ठेला चलाते हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में…

आकाश निषाद, जबलपुर. किसी ने क्या खूब कहा हैं….एक शौक बेमिसाल रखो, हालात चाहे जैसे भी हो…. होठों पर मुस्कान रखो. ऐसी ही कुछ कहानी है मध्यप्रदेश के जबलपुर में रहने वाले 66 साल के बुजुर्ग की. जिनका शौक ऐसा है कि  शौक पूरा करने घर के लोगों की फटकार भी सुनते हैं लेकिन उस फटकार को यह बुजुर्ग मुस्कान में बदल लेते हैं.

दरअसल जबलपुर के 66 साल के दादा हरिराम, जो जीआईएफ फैक्ट्री में काम किया करते थे. 6 साल पहले सरकारी नौकरी से रिटायर हो चुके हैं. करीब 35 हजार रूपए पेंशन भी मिलती हैं. लेकिन आज भी जबलपुर के मिलोनीगंज में चाट का ठेला लगाते हैं और लोगों को चाट खिलाकर अपना शौक पूरा करते हैं. लोकल 18 की टीम से उन्होंने क्या कहां देखिए यह रिपोर्ट….

घर के कारण बुजुर्ग ने बड़ी मुश्किल में दिया इंटरव्यू

लोकल 18 की टीम जब मिलौनीगंज पहुंची. तब सड़क किनारे 66 साल के दादा का ठेला लगा हुआ था. ठेले के ऊपर दुकान सजी थी और बुजुर्ग भी उसी ठेले के ऊपर बैठे हुए थे और चारों तरफ ग्राहकों की भीड़ को चाट-फुल्की खिलाने का काम कर रहे थे. हमने दादा का इंटरव्यू करना चाहा, लेकिन दादा ने कैमरे के सामने आने से मना कर दिया. वजह सिर्फ इतनी थी कि मीडिया में सभी देखेंगे, तब घर के लोग चिल्लाएंगे. हालांकि दादा के ग्राहकों ने ही उन्हें समझाया फिर क्या था दादा घर की डांट की फिक्र किए बिना इंटरव्यू देने तैयार हो गए.

नौकरी के साथ-साथ विरासत को भी संभाला
बुजुर्ग दादा ने बताया चाट की दुकान विरासत में मिली थी. आजादी के पहले सन 1927 में पिताजी चाट बेचा करते थे. जैसे-जैसे हम बड़े हुए, हमने भी चाट का ठेला संभाला. हालांकि बाद में जीआईएफ फैक्ट्री में सरकारी नौकरी लग गई. नौकरी के बाद जैसे ही शाम को काम करके लौटते फिर घर आकर देर शाम तक शौक पूरा करने ठेला लगा लेते. वहीं 6 साल से रिटायर होने के बाद फुल टाइम लोगों को चाट खिलाने का काम कर रहे हैं.

घर के लोग कहते हैं पेंशन मिलती है, यह काम छोड़ दो

उन्होंने बताया घर के लोग डांटते भी हैं और कहते हैं सरकारी पेंशन करीब 35 हजार मिलती है. अब चाट का यह काम छोड़ दो….आराम से घर में रहो. लेकिन बुजुर्ग दादा अपनी विरासत के साथ ही अपने शौक को पूरा करना नहीं छोड़ रहे हैं. यही कारण है कि आज भी चाट खाने वालों का मेला ठेले के चारों तरफ दिखाई देता है. जहां दोपहर होते ही चाट के चटकारे लेने ग्राहक दादा के पास पहुंच जाते हैं.

सादा चाट, दोना-पत्तल का करते हैं इस्तेमाल

उन्होंने बताया चाट सादा होता है, सादा मतलब ऐसा जैसे दाल-चावल होता है. किसी भी तरह के विशेष मसाले का इस्तेमाल नहीं करते हैं. प्याज और लहसुन भी चाट में नहीं होता हैं. पर्यावरण का ध्यान रखते हुए चाट को शुरू से ही ग्राहकों को दोना पत्तल में देते हुए आए हैं. इतना ही नहीं चाट को गर्म करने के लिए गैस का नहीं बल्कि सिगड़ी का इस्तेमाल करते हैं. जिसके चलते चाट स्वादिष्ट बनता है. जिसे महज 25 रूपए में दादा बेचने का काम करते हैं.

shweta singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

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