सिर्फ हिंदू ही नहीं मुस्लिम भी इस मंदिर में जाकर मांगते हैं मन्नत, मनोकामना का तरीका भी है अनोखा

सिर्फ हिंदू ही नहीं मुस्लिम भी इस मंदिर में जाकर मांगते हैं मन्नत, मनोकामना का तरीका भी है अनोखा


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Khajrana Ganesh Temple: एमपी के इंदौर में खजराना गणेश मंदिर सबसे प्राचीन है और इसकी नींव सन 1735 में रखी गई थी. तब से ही ये इंदौर शहर की श्रद्धा का केंद्र है. इस मंदिर के बारे में कई बातें भी प्रख्यात हैं.

Khajrana Ganesh Temple: खजराना गणेश मंदिर इंदौर के सबसे प्राचीन मंदिरों में से है. इसकी नींव सन 1735 में रखी गई थी. तब से ही ये हर इंदौरवासियों की श्रद्धा का केंद्र है. कोई भी शुभ कार्य हो किसी ने नई गाड़ी ली हो या किसी की शादी हुई हो या घर में संतान का आगमन हुआ। इंदौर समेत आसपास के लोग सबसे पहले खजराना गणेश का शुक्रिया करने और उनका आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं. न केवल हिंदू बल्कि मुस्लिम भी खजराना गणेश मंदिर में पहुंचते हैं.

सपने में आए गणेश जी
खजराना गणेश की सेवा में लगे शिवम भट्ट 11वीं पीढ़ी है जो मंदिर की पूजा कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि भगवान की ये प्रतिमा स्वयंभू है. सदियों से इस मूर्ति की पूजा होती आ रही है. एक समय था जब औरंगज़ेब के आक्रमण के डर से इस मूर्ति को नगरवासियों ने बावड़ी में छिपा दिया था और लंबे समय तक ये वहीं छिपी रही किसी को इसका पता नहीं था. एक समय बाद मंगल भट्ट नाम के जमीदार को सपना आया कि गणेश जी की मूर्ति बावड़ी में दबाकर रखी गई है. उन्होंने ये सपना महारानी अहिल्या बाई होल्कर को बताया. उन्हें इस सपने को गंभीरता से लिया और खुदाई कराई। इस खुदाई में ठीक वैसी ही मूर्ति मिली जैसी भट्ट जी ने बताई थी.

अचानक मूर्ति हो गई भारी
जब मूर्ति मिल गई तो इसे महारानी के महल में ले जाने की योजना थी. लेकिन जैसे ही मूर्ति को बावड़ी से थोड़ी दूर ले जाया गया ये काफी भारी हो गई इतनी भारी कि इसे कोई उठा ही नहीं सका। इसे गणेश जी के संदेश के रुप में देखा गया और फिर मूर्ति को यहीं स्थापित कर दिया गया. अहिल्या बाई ने उसके बाद यहां मंदिर का निर्माण कराया और मंगल भट्ट को ही इस मंदिर की देखरेख और पूजा पाठ करने की जिम्मेदारी दे दी. तब से लेकर अब उनकी 11वीं पीढ़ी ही खजराना गणेश की सेवा करती आ रही है.

हिंदू मुस्लिम सभी आते हैं 
खजराना गणेश मंदिर में हिंदू मुस्लिम सभी आते हैं. यह धार्मिक सद्भाव का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है. दरअसल, मंदिर के प्रांगण में ही एक दरगाह भी है, जिसका नाम नहर सैयद दरगाह है, जहां मुस्लिम समुदाय के लोग दर्शन करने आते हैं. उन्हीं में से कईं मुस्लिम ऐसे भी हैं जो मंदिर में आकर भगवान गणेश से प्रार्थना करते हैं, खासकर जब उन्हें कोई विशेष मनोकामना पूरी करानी होती है.

मनोकामना का अनोखा तरीका
खजराना गणेश की पीठ की तरफ उल्टा स्वास्तिक बनाने से भक्तों की मनोकामना पूर्ण हो जाती है. जब मनोकामना पूरी हो जाती है, तब वही भक्त यहां पर आकर फिर सीधा स्वास्तिक बनाता है. यह मान्यता सदियों से चली आ रही है, जो लोग सक्षम हैं वो अपने घर संतान होने पर यहां उसे तौलते हैं और उस वजन के लड्डू भगवान गणेश को प्रसाद के रुप में चढ़ाते हैं. गणेश चतुर्थी पर यहां भक्तों की भारी भीड़ लगती है.

Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें

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