अर्शदीप ने मेरे पास आकर कहा…तो इस वजह से नंबर-11 तक पैड पहने बैठे रहे सूर्या

अर्शदीप ने मेरे पास आकर कहा…तो इस वजह से नंबर-11 तक पैड पहने बैठे रहे सूर्या


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Suryakumar yadav: सूर्यकुमार यादव ने हंसते-हंसते उस किस्‍से के बारे में बताया, जिसके चलते वो ओमान के खिलाफ मुकाबले के दौरान नंबर-11 तक केवल डगआउट में ही बैठै रहे. अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा भी भारतीय कप्‍तान से पहले बैटिंग के लिए आए.

सूर्यकुमार यादव ओमान के खिलाफ बैटिंग करने ही नहीं आए.
भारत और पाकिस्‍तान के बीच सुपर-4 मुकाबले से पहले प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के लिए आए भारतीय टी20 टीम के कप्‍तान सूर्यकुमार यादव से ओमान मैच में बैटिंग ऑर्डर को लेकर भी सवाल पूछा गया. भारत इस मैच में एक-एक कर विकेट गंवाता चला गया लेकिन कप्‍तान सूर्या बल्‍लेबाजी के लिए नहीं आए. यहां तक की अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा में मैदान में बैटिंग के लिए आ गए लेकिन SKY पिच पर बल्‍लेबाजी करने नहीं उतरे. इसे लेकर सूर्यकुमार यादव से सवाल पूछा गया तो कप्‍तान साहब ने हंसते हुए जवाब दिया.

‘अर्शदीप मेरे पास आए…’
सूर्यकुमार यादव ने यह स्पष्ट किया कि उनका प्राथमिक उद्देश्य मैच जीतना है न कि व्यक्तिगत रन बनाना. इसके चलते उन्होंने मैच की शुरुआत में खुद बैटिंग के लिए नहीं उतरने का निर्णय लिया. उन्होंने कहा, “हर्षित (राणा) वैसे भी बल्लेबाजी कर सकते हैं. हम देखना चाहते थे कि वह आखिरी 3–4 ओवरों में कैसे बल्लेबाजी करते हैं. जब 1–2 ओवर बाकी थे तो अर्शदीप ने कहा कि वह बैटिंग करना चाहते हैं. मैंने कहा कोई समस्या नहीं, आप जा सकते हैं.”

निचले क्रम को बैटिंग का अनुभव देना चाहता है भारत
इस रणनीति से यह संदेश भी मिलता है कि टीम इंडिया हर खिलाड़ी को मैदान पर अनुभव देने और दबाव में प्रदर्शन करने का अवसर देना चाहती है. युवा खिलाड़ियों को अंत के ओवरों में बल्लेबाजी करने का मौका देने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और टीम का प्रदर्शन भी संतुलित रहता है. सूर्यकुमार की सोच टीम की लंबी अवधि की सफलता पर आधारित है. उन्होंने कहा कि टूर्नामेंट में केवल व्यक्तिगत स्कोर की चिंता नहीं बल्कि टीम की रणनीति, दबाव में संयम और सही फैसले लेने पर ध्यान देना जरूरी है. उनकी यह मानसिकता सुपर-4 और फाइनल जैसे अहम मुकाबलों में भारत के लिए निर्णायक साबित हो सकती है.

Sandeep Gupta

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और… और पढ़ें

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