खुले में अंतिम संस्कार करने को मजबूर ग्रामीण: गढ़ा गांव में नहीं है मुक्तिधाम, आने जाने का रास्ता तक नहीं; 20 वर्ष से मांग कर रहे ग्रामीण – Guna News

खुले में अंतिम संस्कार करने को मजबूर ग्रामीण:  गढ़ा गांव में नहीं है मुक्तिधाम, आने जाने का रास्ता तक नहीं; 20 वर्ष से मांग कर रहे ग्रामीण – Guna News


ग्रामीण खुले में अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं।

गुना शहर से कुछ किलोमीटर दूर गढ़ा गांव के लोगों को आज भी खुले में शवों का अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले 12 साल से मुक्तिधाम की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी सुनवाई नहीं हुई है।

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गांव में प्रदीप कुमार शर्मा के पिता सुदामा प्रसाद शर्मा का शुक्रवार को निधन हुआ था। शनिवार सुबह परिजन और रिश्तेदार शव लेकर गांव के बाहर एक खुली जगह पर पहुंचे और वहीं अंतिम संस्कार किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि यही जगह अंतिम संस्कार के लिए इस्तेमाल होती है, लेकिन यहां मुक्तिधाम या शेड जैसी कोई सुविधा नहीं है।

रास्ता भी मुश्किल, पगडंडी से पहुंचना पड़ता है

ग्रामीणों ने बताया कि इस जगह तक पहुंचने के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं है। ऊबड़-खाबड़ पगडंडी से होकर शव लेकर जाना पड़ता है। शनिवार को भी लोग शव को लेकर ऐसे ही रास्ते से मुक्तिधाम तक पहुंचे।

मुक्तिधाम तक आने जाने के लिए रास्ता तक नहीं है।

बारिश में और बढ़ जाती है परेशानी

गांववालों ने कहा कि बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है। पानी भरने और खुले मैदान के कारण तिरपाल डालकर शवों का अंतिम संस्कार करना पड़ता है।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में एक स्थायी मुक्तिधाम बनाया जाए और वहां तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता तैयार किया जाए, ताकि अंतिम संस्कार के समय उन्हें परेशानी का सामना न करना पड़े।



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