हरदा में रविवार को सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या के अवसर पर अजनाल नदी तट पर दीपावली जैसा नजारा दिखा। पितृपक्ष के समापन पर शाम के समय नदी किनारे श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने घी के दीपक जलाकर अपने पुरखों को विदाई दी।
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श्रद्धालु प्रतिभा कश्यप ने बताया कि मान्यता के अनुसार पितर अपने वंशजों के हाथों तर्पण ग्रहण कर वापस लौटते हैं। इस दौरान वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। सीहोर के कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के अनुसार, अमावस्या की शाम को किसी जलाशय के किनारे दक्षिण दिशा में दीया लगाने से पितृ दोष समाप्त होते हैं।
पितृ प्रदोष काल में पितर जल ग्रहण करते हैं। इस समय वे अपने परिजनों को खुशहाली, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद देकर पितृलोक जाते हैं। इसी मान्यता के चलते बड़ी संख्या में लोगों ने दीपदान किया।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने अजनाल नदी तट पर फैली गंदगी को लेकर नाराजगी जताई। महिलाओं का कहना था कि पूरे श्राद्ध पक्ष में आस्था से पूजन किया, लेकिन अंतिम दिन गंदगी के बीच दीपक लगाना पड़ा। नागरिकों ने नगर पालिका से धार्मिक अवसरों पर घाट की विशेष सफाई कराने की मांग की है।
