कंधे पर साइकिल और हाथ में बस्ता…जान जोखिम में डाल नदी पार करता देश का भविष्य

कंधे पर साइकिल और हाथ में बस्ता…जान जोखिम में डाल नदी पार करता देश का भविष्य


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Balaghat News: ग्रामीणों ने लोकल 18 को बताया कि इलाके में नेहरा नदी पर पुल न होने से साल के चार महीने गांववाले अपने ही गांव में कैद होकर रह जाते हैं. बच्चों को जोखिम लेकर स्कूल जाना पड़ता है. कई बार नदी में ज्यादा बहाव होने की स्थिति में पढ़ाई भी छूट जाती है.

बालाघाट. बड़े-बुजुर्ग हमेशा अपने स्कूल जाने वाले किस्सों के बारे में बताते हैं कि वे किस तरह से नदी या पहाड़ पार कर स्कूल जाते थे लेकिन अब इस तरह के दृश्य आज के दौर में दिखने लगे, तो आप क्या कहेंगे. एक तरफ भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला, तरक्की करने वाला देश है और दूसरी तरफ ऐसा कुछ देखने को मिलता है, जो आधुनिक भारत की कल्पना पर सवाल खड़े करता है. यहां आज भी बच्चे कंधे पर साइकिल और सिर झोला लिए अर्धनग्न अवस्था में नदी पार कर स्कूल जाते हैं. एक ऐसा ही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें स्कूली बच्चे इसी तरह नदी पार कर स्कूल जा रहे हैं.

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही यह तस्वीर बालाघाट जिले के परसवाड़ा क्षेत्र के खराड़ी घाट की है. वीडियो में नजर आ रहे ये मासूम चेहरे छठवीं कक्षा के छात्र अजय, राकेश और अनिल हैं, जो अपने गांव टिकरिया से रोज दुरेंदा स्कूल निकलते हैं लेकिन रास्ते में आती है ये उफनती नदी. स्कूल की ड्रेस भीग न जाए, किताबें खराब न हों, इसके लिए बच्चे पहले यूनिफॉर्म उतारकर बैग में रख देते हैं. बैग को नदी किनारे छोड़ते हैं और फिर कंधे पर साइकिल उठाकर लहरों से जूझते हुए नदी पार करते हैं. इसके बाद दोबारा लौटकर बैग और किताबें लेकर दूसरी बार नदी पार करते हैं. यानी सिर्फ स्कूल तक पहुंचने के लिए इन मासूमों को रोजाना ये जद्दोजहद करनी पड़ती है और अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है.
हर साल बारिश के दिनों में यही हाल
हैरानी की बात यह है कि यह तस्वीर क्षेत्र के विधायक मधु भगत के गांव से 10 किलोमीटर दूर की है. यह हाल वन ग्राम टिकरिया और कातोली में हर साल बारिश के दिनों में होता है. ग्रामीणों ने बताया कि इलाके में नेहरा नदी पर पुल न होने की वजह से साल के चार महीने ग्रामीण अपने ही गांव में कैद होकर रह जाते हैं. बच्चों को जोखिम उठाकर स्कूल जाना पड़ता है, तो नदी में ज्यादा बहाव होने की स्थिति में पढ़ाई भी छूट जाती है. वहीं कोई बीमार पड़ जाए, तो अस्पताल ले जाने के लिए कई बार सोचना पड़ता है और खटिया का झूला बनाकर मरीज को अस्पताल ले जाना पड़ता है.

जिम्मेदारों से लगाई गुहार
ग्रामीणों ने इस मामले में जिम्मेदारों से गुहार लगाई, जिसके लिए वह कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और जिम्मेदारों को समस्याओं से अवगत कराया. वहीं पूर्व सांसद कंकर मुंजारे से मुलाकात कर मामले को उठाने की गुहार लगाई. इस पर कंकर मुंजारे ने चेतावनी दी है कि अगर 2026 तक नेहरा नदी पर पुल नहीं बना, तो एक बड़ा आंदोलन होगा. वहीं प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना बालाघाट की प्रबंधक माया परते का कहना है कि इस मामले में एस्टीमेट तैयार हो गया है. जल्द ही टेंडर निकलेंगे, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरु हो जाएगा.

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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