रीवा के उद्यान विभाग में पदस्थ प्रभारी अधीक्षक छवि केशरी कहती हैं कि ये सवाल आपके मन में भी आता होगा कि आखिर रातरानी फूल रात में ही क्यों खिलती है और खिलकर धरती पर गिरती है. दिन में ये फूल बंद हो जाते हैं. ऐसी क्या वजह है कि ये भीनी भीनी खुशबु चारों ओर बिखेरने वाला फूल रात में ही खिलता है, फूल आधी रात चुपके से फूलता है और फूलते ही झरने लगता है.
रातरानी पर सांप आते हैं ?
ये बात हमेशा कही जाती है कि रात की रानी पौधा लगाने से वहां पर सांप आ जाते हैं. ये केवल प्रचलित भ्रम है. इसमें कोई सच्चाई नहीं है. रात की रानी केवल छोटे पतंगों, मधुमक्खी और चिड़ियों को अपनी ओर आकर्षित करती है. वैसे रातरानी की पत्तियों में मच्छर भगाने का गुण होता है. इसके फूल और पत्तियों को पीसकर आंगन में छिड़काव करने से शाम को मच्छर नहीं आते.
आमतौर पर जिन पौधों के फूल रात में खिलते हैं, उन फूलों में बहुत ही मनमोहक सुगंध होती है. इस सुगंध के कारण पतंगे जैसे रात में एक्टिव जीव-जंतु इन पौधों की ओर आकर्षित हो जाते हैं. जब ये कीड़े फूल पर आकर बैठते हैं तो इनके पंखों से परागकण चिपक जाते हैं. जब कोई कीड़ा एक पौधे से दूसरे पौधे पर जाता है तो ये परागकण दूसरे फूल तक पहुंच जाते हैं. इस प्रकार परागसेचन की क्रिया संपन्न हो जाती है.
इसलिए हम कह सकते हैं कि रातरानी के फूल रात में उन कीड़ों को आकर्षित करने के लिए ही खिलते हैं, जो पराग-सेचन की क्रिया में सहायक होते हैं. फूलों से बने फल और फलों से प्राप्त बीजों से ही नए पौधों का जन्म होता है.
रात्रि में अक्सर वे फूल खिलते हैं, जो दिन के समय सूर्य की गर्मी और प्रकाश को सहन नहीं कर पाते. रातरानी के फूल भी ऐसे ही होते हैं. सूरज की गर्मी से ये जल्दी ही मुरझा जाते हैं, इसीलिए ये रात में खिलते हैं.
इनके रात में खिलने का असल कारण
रातरानी के फूल रात में खिलने का कारण उसकी जैविक संरचना और पर्यावरणीय कारक हैं. ये फूल दिन के समय बंद रहते हैं. जैसे ही रात होती है, तापमान में गिरावट और आर्द्रता में वृद्धि के कारण ये खिलने लगते हैं. यह प्रक्रिया पौधे की प्राकृतिक आदतों का हिस्सा है, जो इसे रात के समय पर परागणकों, जैसे कि मच्छरों और अन्य कीटों, को आकर्षित करने में मदद करती है.
रात में खिलने वाले फूलों के विषय में एक तथ्य और भी है. इन फूलों का रंग बहुत चमकीला नहीं होता क्योंकि यह रंग रात्रि के अंधेरे में दिखाई नहीं देते. इसलिए कीड़ों को आकर्षित करने में इनके रंगों का कोई अधिक महत्व नहीं होता. रात्रि में खिलने वाले अधिकतर फूलों का रंग सफेद ही होता है क्योंकि सफेद रंग रात्रि के अंधरे में भी साफ साफ नजर आता है या चमकता है तो कीड़ों को आकर्षित करता है.
इन्हें नाइट ब्लूमिंग जैस्मिन भी कहते हैं
रात की रानी के पौधे की पतली शाखाएं 4 मीटर (13 फीट) तक ऊंची होती हैं. यह पौधा कई शाखाओं वाला और भारी पत्तियों वाला होता है. गजब की लाजवाब खुशुबू वाले इस फूल को अंग्रेजी में नाइट ब्लूमिंग जैस्मिन भी कहते हैं. मूलतौर पर ये पौधा वेस्ट इंडीज का है. ये पौधे साल में करीब 4 बार फूल देते हैं. ये फूल इंसान या जानवरों के खाने के लिए नहीं हैं.
इसे भगवान कृष्ण राधा को भेंट करते थे
रात की रानी फूलों से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं. भारतीय पौराणिक कथाओं में इसे पारिजात के पेड़ से जोड़ा जाता है. कहा जाता है कि यह फूल स्वर्ग की देवी, उर्वशी द्वारा धरती पर लाया गया. एक अन्य कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण ने इस फूल को अपनी प्रेमिका राधा को भेंट किया था, जिससे यह प्रेम और सुंदरता का प्रतीक बन गया.